बांध उड़ाने की कथित साजिश में नरवर किले से 400 साल पुरानी तोप चोरी,राजस्थान से दो आरोपी गिरफ्तार।
पुलिस का दावा,पूछताछ में सामने आया पानी विवाद का एंगल,20 से अधिक लोगों की भूमिका की जांच जारी,ऐतिहासिक तोप अब भी लापता।
शिवपुरी। मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से 400 वर्ष पुरानी सिंधिया रियासत की ऐतिहासिक तोप चोरी होने के सनसनीखेज मामले में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। मामले में राजस्थान के करौली जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से उस लोडिंग वाहन को भी जब्त कर लिया है, जिसका उपयोग कथित रूप से तोप चोरी कर ले जाने में किया गया था। हालांकि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद चोरी गई ऐतिहासिक तोप अभी तक बरामद नहीं हो सकी है।
पुलिस के अनुसार इस वारदात में करीब 20 से 25 लोगों के शामिल होने की आशंका है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस को इस मामले में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि राजस्थान के करौली क्षेत्र में पांचना बांध के पानी को लेकर लंबे समय से दो पक्षों के बीच विवाद चला आ रहा है। पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से बताया कि विरोधी पक्ष पर दबाव और भय का माहौल बनाने के उद्देश्य से नरवर किले से ऐतिहासिक तोप चोरी करने की योजना बनाई गई थी। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने यह भी दावा किया कि यदि बांध से पानी नहीं मिलता तो कथित रूप से बांध को तोप से उड़ाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि इस दावे की जांच अभी जारी है और पुलिस सभी पहलुओं पर साक्ष्य जुटा रही है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहली बार 3 जुलाई को करीब 25 लोगों के साथ नरवर किले पहुंचे थे। उस समय तोप का वजन अत्यधिक होने के कारण वे उसे ले जाने में सफल नहीं हो सके। इसके बाद 15 जुलाई को दोबारा योजना बनाकर सभी लोग लोडिंग वाहन के साथ पहुंचे और ऐतिहासिक तोप को चोरी कर ले गए।
घटना का खुलासा तब हुआ जब पुरातत्व विभाग के चौकीदार रमेश कोली ने 16 जुलाई को नरवर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि कचहरी महल परिसर में रखी 14 ऐतिहासिक तोपों में से एक तोप गायब है। शिकायत मिलते ही पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्वालियर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने आरोपियों की गिरफ्तारी अथवा सुराग देने वाले के लिए 30 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की थी। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों, टोल प्लाजा फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। जांच का सिरा राजस्थान के करौली जिले के गांवडा मीणा गांव तक पहुंचा, जहां से पुलिस ने अमन कुमार पुत्र मोहनलाल मीणा तथा टिम्मूराम पुत्र भूराराम मीणा को गिरफ्तार किया।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर अन्य फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। साथ ही चोरी गई ऐतिहासिक तोप की बरामदगी के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान में संयुक्त स्तर पर लगातार कार्रवाई जारी है।
नरवर थाना प्रभारी विनय यादव ने बताया कि मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। चोरी गई ऐतिहासिक तोप को बरामद करना पुलिस की प्राथमिकता है और इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
यह मामला केवल एक ऐतिहासिक धरोहर की चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस जांच में सामने आए कथित उद्देश्य ने इसे और अधिक गंभीर बना दिया है। हालांकि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि बांध उड़ाने की योजना संबंधी जानकारी आरोपियों से पूछताछ के दौरान सामने आए कथित बयानों पर आधारित है। इस संबंध में जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया तथा पुलिस द्वारा जुटाए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।


