छपरा पंचायत विवाद में ग्रामीणों का पक्ष आया सामने,वायरल वीडियो में धार्मिक आयोजन को बताया परंपरा का हिस्सा।
रामायण आयोजन को लेकर उठे विवाद के बीच दो ग्रामीणों ने वीडियो जारी कर कहा-गांव में पहले से होते रहे हैं कीर्तन-भजन,मामले की निष्पक्ष जांच की मांग।
स्लीमनाबाद। कटनी जिले की स्लीमनाबाद जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत छपरा में रामायण आयोजन को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रहे विवाद के बीच अब गांव के कुछ ग्रामीणों का पक्ष भी सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो अलग-अलग वीडियो में ग्रामीणों ने दावा किया है कि पंचायत में आयोजित रामायण एवं कीर्तन-भजन का कार्यक्रम किसी प्रकार के शुद्धिकरण या जातिगत भावना से प्रेरित नहीं था, बल्कि यह गांव की वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
गौरतलब है कि हाल ही में ग्राम पंचायत छपरा में आयोजित रामायण कार्यक्रम को लेकर पंचायत के पूर्व सचिव और सरपंच पति के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो गई थी। इस मामले में आरोप लगाए गए कि आयोजन का संबंध पंचायत में हुए प्रशासनिक घटनाक्रम और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग से जुड़े पूर्व सचिव को हटाए जाने के बाद की परिस्थितियों से था। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में पंचायत मेट संतोष कुमार हल्दकार ने कहा कि ग्राम पंचायत में आयोजित रामायण कार्यक्रम पूरे गांव की सहमति से किया गया था। उन्होंने बताया कि गांव के हनुमान मंदिर में पहले भी समय-समय पर रामायण और धार्मिक आयोजन होते रहे हैं तथा इस आयोजन का किसी प्रकार के शुद्धिकरण अथवा किसी व्यक्ति या वर्ग विशेष से कोई संबंध नहीं है। उनके अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था, सामाजिक सद्भाव और सामूहिक सहभागिता था।
एक अन्य ग्रामीण ने भी वीडियो संदेश जारी कर कहा कि ग्राम पंचायत में कीर्तन-भजन का आयोजन पहले भी कई बार हो चुका है। उन्होंने बताया कि सरपंच पति नीरज गुप्ता की धार्मिक आयोजनों में विशेष रुचि रही है और उनके सहयोग से पूर्व में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। उन्होंने उन दावों को असत्य बताया जिनमें कहा जा रहा है कि यह आयोजन पूर्व सचिव को हटाए जाने के बाद किसी विशेष उद्देश्य से कराया गया था।
ग्रामीणों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों को पंचायत की राजनीति या जातिगत विवादों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि गांव में लंबे समय से भाईचारे और सामाजिक सौहार्द के साथ धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं और भविष्य में भी यह परंपरा जारी रहनी चाहिए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं तथ्यों के आधार पर जांच करने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएं, उसी के आधार पर उचित निर्णय लिया जाए, ताकि गांव में शांति, सौहार्द और सामाजिक समरसता का वातावरण बना रहे।
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। प्रशासन की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही विवाद से जुड़े आरोपों और दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, वायरल वीडियो के सामने आने के बाद इस मामले में एक नया पक्ष भी चर्चा का विषय बन गया है।


