एमपी में समान नागरिक संहिता को कैबिनेट की मंजूरी,दूसरी शादी और बिना पंजीकरण लिव-इन पर सख्ती के प्रावधान।

 एमपी में समान नागरिक संहिता को कैबिनेट की मंजूरी,दूसरी शादी और बिना पंजीकरण लिव-इन पर सख्ती के प्रावधान।

विधानसभा में पेश होगा विधेयक,सभी नागरिकों के लिए समान वैवाहिक कानून लागू करने की दिशा में बड़ा कदम,अनुसूचित जनजाति को प्रस्तावित कानून के दायरे से बाहर रखने का प्रावधान।

मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) के मसौदा विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी देकर प्रदेश में समान नागरिक कानून लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। अब इस विधेयक को विधानसभा के चालू सत्र में पेश किया जाएगा। सदन से पारित होने और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह कानून के रूप में लागू हो सकेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कटनी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए समान वैवाहिक व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि एक व्यक्ति के लिए एक ही विवाह का नियम है तो वही नियम सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद समान नागरिक संहिता को लेकर पूरे प्रदेश में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

सरकार के अनुसार प्रस्तावित यूसीसी का प्रारूप काफी हद तक उत्तराखंड में लागू मॉडल पर आधारित है, हालांकि मध्य प्रदेश की सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इसमें कुछ आवश्यक संशोधन किए गए हैं। ड्राफ्ट को सरल और व्यवहारिक बनाने का प्रयास किया गया है, वहीं उत्तराधिकार से जुड़े कुछ जटिल प्रावधानों को भी आसान बनाया गया है। प्रस्तावित कानून में अनुसूचित जनजाति समुदाय को इसके दायरे से बाहर रखने का प्रावधान रखा गया है।

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार कोई भी व्यक्ति पहली शादी रहते हुए बिना वैधानिक तलाक लिए दूसरी शादी नहीं कर सकेगा। यदि कोई ऐसा करता है तो उसके विरुद्ध प्रस्तावित कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। सरकार का उद्देश्य सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह संबंधी समान नियम लागू करना बताया गया है।

ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई युवक-युवती या वयस्क जोड़ा लिव-इन संबंध में रहता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण नहीं कराने अथवा गलत जानकारी देने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

विधेयक में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि कोई पहले से विवाहित व्यक्ति अपनी वैवाहिक स्थिति छिपाकर लिव-इन संबंध स्थापित करता है तो उसके विरुद्ध भी दंडात्मक कार्रवाई की जा सकेगी। साथ ही लिव-इन संबंध समाप्त होने की स्थिति में महिला के भरण-पोषण और उसके अधिकारों को भी कानूनी संरक्षण देने का प्रस्ताव रखा गया है।

सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य किसी विशेष धर्म या समुदाय को लक्ष्य बनाना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक अधिकारों से जुड़े मामलों में समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है। विधि विशेषज्ञों का भी मानना है कि वर्षों से विभिन्न न्यायालयों, विशेषकर सरला मुद्गल प्रकरण सहित कई मामलों में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की जाती रही हैं।

राज्य सरकार का दावा है कि प्रस्तावित कानून महिलाओं के अधिकारों को अधिक मजबूत करेगा, विवाह संबंधी विवादों में स्पष्टता लाएगा तथा बहुविवाह जैसी व्यवस्थाओं पर समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। वहीं लिव-इन संबंधों को कानूनी रूप से पंजीकृत किए जाने से संबंधित पक्षों के अधिकारों का संरक्षण भी संभव हो सकेगा।

हालांकि फिलहाल यह केवल कैबिनेट से स्वीकृत ड्राफ्ट विधेयक है। इसे विधानसभा में प्रस्तुत किए जाने के बाद सदन में विस्तृत चर्चा होगी। विधेयक पारित होने, राज्यपाल की मंजूरी तथा अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह कानून प्रभावी होगा। तब तक वर्तमान कानूनी व्यवस्था ही लागू रहेगी।

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