दतिया उपचुनाव से पहले कांग्रेस में बढ़ी कलह,अवधेश नायक के आरोपों से सियासत गरम।
टिकट नहीं मिलने से नाराज नेता ने दिग्विजय सिंह पर लगाया लॉबिंग का आरोप,भाजपा से प्रस्ताव मिलने की कही बात,कांग्रेस ने आरोपों की पुष्टि नहीं की।
दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ सामने आया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अवधेश नायक द्वारा पार्टी नेतृत्व पर लगाए गए गंभीर आरोपों ने प्रदेश की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। टिकट वितरण को लेकर नाराज चल रहे अवधेश नायक ने सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उनका नाम उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाया था, लेकिन वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की कथित लॉबिंग के कारण उनका टिकट काट दिया गया।
अवधेश नायक ने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर उनके साथ न्याय नहीं हुआ और टिकट वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यक्तिगत प्रभाव और आंतरिक राजनीति के चलते उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर नहीं दिया गया। हालांकि कांग्रेस की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और न ही दिग्विजय सिंह या प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने इन आरोपों को स्वीकार किया है।
राजनीतिक हलकों में उस समय चर्चा और तेज हो गई जब अवधेश नायक की भाजपा नेताओं से मुलाकात की खबरें सामने आईं। इस मुलाकात के बाद उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रस्ताव मिला है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा। उनके इस बयान के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि वे जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर भी इस घटनाक्रम को लेकर हलचल बनी हुई है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता अवधेश नायक को मनाने की कोशिश में जुटे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी सार्वजनिक रूप से नाराजगी दूर करने की अपील की है और पार्टी की एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया है।
दतिया उपचुनाव को पहले ही प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है। ऐसे समय में कांग्रेस के भीतर उभरा यह असंतोष पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अवधेश नायक भाजपा में शामिल होते हैं तो इसका असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है, क्योंकि वे क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय नेता माने जाते हैं और उनका अपना जनाधार है।
फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर प्रदेश की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस अपने नाराज नेताओं को मनाने में कितनी सफल होती है और अवधेश नायक आखिरकार किस राजनीतिक दल के साथ अपनी अगली पारी शुरू करते हैं। वहीं यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि जीतू पटवारी द्वारा नाम भेजे जाने और दिग्विजय सिंह द्वारा टिकट कटवाने संबंधी बातें अवधेश नायक के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।


