जंतर-मंतर हिंसा की जांच में डिजिटल साक्ष्यों पर फोकस,विदेशी डिजिटल नेटवर्क की भूमिका की भी पड़ताल।
ड्रोन फुटेज,सीसीटीवी,मोबाइल वीडियो और सोशल मीडिया गतिविधियों की गहन जांच जारी,पुलिस ने कई डिजिटल इनपुट्स को फोरेंसिक सत्यापन के दायरे में लिया।
नई दिल्ली।जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच अब पूरी तरह डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच आधुनिक तकनीकी संसाधनों की मदद से पूरे घटनाक्रम की परत-दर-परत जांच कर रही हैं। जांच एजेंसियों का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा कैसे भड़की, किन लोगों की भूमिका संदिग्ध रही और क्या इसके पीछे किसी संगठित डिजिटल नेटवर्क का हाथ था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक इनपुट्स में कुछ विदेशी डिजिटल हैंडल्स का उल्लेख सामने आया है। प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से संचालित कुछ संदिग्ध सोशल मीडिया हैंडल्स की गतिविधियां जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। हालांकि, इन जानकारियों का अभी तकनीकी एवं फोरेंसिक स्तर पर सत्यापन किया जा रहा है और पुलिस ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया है।
पूरे मामले की जांच के लिए स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसीपी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की टीम घटनास्थल से प्राप्त ड्रोन फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, मोबाइल फोन से बनाए गए वीडियो तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों का फ्रेम-दर-फ्रेम विश्लेषण कर रही है। जांच दल ने घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण कर उपलब्ध फुटेज का वास्तविक परिस्थितियों से मिलान भी किया है, ताकि हिंसा शुरू होने से पहले और उसके दौरान मौजूद लोगों की गतिविधियों का क्रमवार अध्ययन किया जा सके।
जांच केवल वीडियो विश्लेषण तक सीमित नहीं है। पुलिस डंप डाटा, डिजिटल ट्रैकिंग, मैनुअल सर्विलांस और इंटरनेट गतिविधियों की भी गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का प्रयास है कि यह पता लगाया जाए कि घटनास्थल से रिकॉर्ड किए गए वीडियो सबसे पहले किन व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए, उन्हें किसने आगे प्रसारित किया तथा वे किन-किन समूहों और व्यक्तियों तक तेजी से पहुंचे।
सूत्रों का कहना है कि इस डिजिटल ट्रेल के आधार पर कई ऐसे अकाउंट और संपर्क सामने आए हैं, जिनकी गतिविधियां जांच एजेंसियों के संदेह के दायरे में हैं। इन सभी डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रत्येक तथ्य का वैज्ञानिक आधार पर सत्यापन किया जा सके।
पुलिस विभिन्न डिजिटल बातचीत, सोशल मीडिया गतिविधियों तथा संदेशों का भी परीक्षण कर रही है। प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे संदेशों की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है, जिनमें प्रदर्शन के दौरान आक्रामक रुख अपनाने और पुलिस के साथ टकराव बढ़ाने जैसी बातें दर्ज होने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन संदेशों की प्रमाणिकता और उनसे जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की जांच अभी जारी है।
जांच एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम में किसी संभावित विदेशी डिजिटल नेटवर्क या संगठित ऑनलाइन अभियान की भूमिका से जुड़े प्रत्येक पहलू की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और सभी डिजिटल साक्ष्यों का फोरेंसिक सत्यापन होने के बाद ही किसी भी प्रकार का अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक किया जाएगा।
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष, वैज्ञानिक और साक्ष्य आधारित तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है। जांच एजेंसियों का प्राथमिक उद्देश्य हिंसा की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना, जिम्मेदार लोगों की पहचान करना तथा कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करना है। मामले की जांच अभी जारी है और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही सभी तथ्यों की अंतिम पुष्टि हो सकेगी।यह समाचार उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है तथा इसमें जिन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, उन्हें जांचाधीन या प्रारंभिक जांच के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।


