बिजली कंपनी के अधीक्षण यंत्री पर लोकायुक्त का बड़ा शिकंजा,9 ठिकानों पर छापे में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा।
बेटे,बहू और दामाद के नाम पर कंपनियां,मकान,प्लॉट और निवेश जांच के दायरे में,आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई जारी।
इंदौर। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रहे अभियान के तहत इंदौर लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (एमपीपीकेवीवीसीएल) के अधीक्षण यंत्री शिवराम सेमिल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक साथ नौ ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई इंदौर, पीथमपुर, धार और मुरैना स्थित उनके आवास, कार्यालय, औद्योगिक परिसरों तथा परिजनों से जुड़े प्रतिष्ठानों पर की गई। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से बिजली विभाग सहित प्रशासनिक हलकों में दिनभर चर्चा का माहौल बना रहा।
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार शिवराम सेमिल के विरुद्ध लंबे समय से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। प्रारंभिक जांच में उनकी वैध आय और संपत्तियों के बीच भारी अंतर सामने आने के बाद विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त कर एक साथ विभिन्न स्थानों पर छापेमार कार्रवाई की गई।
छापेमारी के दौरान लोकायुक्त की अलग-अलग टीमों ने दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, निवेश संबंधी कागजात, संपत्तियों के अभिलेख, कंपनियों के दस्तावेज तथा अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी एवं पुलिस बल मौजूद रहा।
जांच में सामने आया कि अधीक्षण यंत्री और उनके परिजनों के नाम पर कई अचल एवं चल संपत्तियां हैं। इनमें इंदौर स्थित आलीशान आवास, पीथमपुर और धार क्षेत्र में औद्योगिक प्लॉट, फैक्ट्री परिसर, व्यावसायिक प्रतिष्ठान तथा अन्य निवेश शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कई बैंक खातों, बीमा निवेश, शेयर एवं अन्य वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि शिवराम सेमिल के बेटे, बहू और दामाद के नाम पर ट्रांसफॉर्मर निर्माण, इलेक्ट्रिकल उपकरण तथा ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां संचालित होने की जानकारी मिली है। इन कंपनियों के वित्तीय लेनदेन, पूंजी निवेश तथा आय के स्रोतों की भी विस्तार से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि इन कंपनियों में लगाया गया निवेश वैध आय से किया गया था या नहीं।
प्रारंभिक जांच के अनुसार शिवराम सेमिल की सेवा अवधि के दौरान उनकी वैध आय लगभग दो करोड़ रुपये के आसपास आंकी गई है, जबकि उनके और परिजनों के नाम पर मिली संपत्तियों एवं निवेश का प्रारंभिक मूल्य सात करोड़ रुपये से अधिक पाया गया है। यह उनकी ज्ञात आय की तुलना में लगभग 258 प्रतिशत अधिक बताया गया है। वहीं जांच आगे बढ़ने के साथ कुछ संपत्तियों के मूल्यांकन में वृद्धि होने की संभावना भी जताई जा रही है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में कुल संपत्ति का अनुमान इससे कहीं अधिक होने की बात भी सामने आई है, हालांकि अंतिम मूल्यांकन लोकायुक्त की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार अभी कई दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। बैंक खातों, आयकर रिटर्न, कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति खरीद-बिक्री के दस्तावेज तथा निवेश संबंधी अभिलेखों का मिलान किया जाएगा। यदि जांच में आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित होना प्रमाणित होता है तो संबंधित प्रावधानों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। लोकायुक्त का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष एवं साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है तथा सभी पहलुओं का सूक्ष्म परीक्षण किया जाएगा।
बिजली विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के विरुद्ध हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद प्रदेश के सरकारी विभागों में भी हलचल देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो यह प्रदेश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रही कार्रवाई के प्रमुख मामलों में से एक माना जाएगा।
लोकायुक्त पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जांच जारी है और संपत्तियों का अंतिम मूल्यांकन, दस्तावेजों का सत्यापन तथा वित्तीय विश्लेषण पूरा होने के बाद ही विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा। इसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इस कार्रवाई को मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रहे अभियान की महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। लोकायुक्त की टीम आने वाले दिनों में जब्त किए गए दस्तावेजों, बैंक लेनदेन, कंपनियों के रिकॉर्ड तथा संपत्तियों के स्वामित्व से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच करेगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कुल संपत्ति का वास्तविक मूल्य कितना है तथा आय और संपत्ति के बीच वास्तविक अंतर कितना पाया जाता है।


