शिक्षा विभाग की बड़ी चूक,प्राथमिक शिक्षिका को बना दिया माध्यमिक अंग्रेजी शिक्षक,फिर अतिशेष बताकर कर दिया तबादला।
पिपरिया कला स्कूल में बिना रिक्त पद के पदस्थापना से बढ़ा विवाद,अतिथि शिक्षिका के रोजगार पर संकट,शिक्षिका और अतिथि शिक्षिका दोनों ने की शिकायत,जांच और आदेश निरस्त करने की मांग।
कटनी जिले के बड़वारा विकासखंड से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। विभागीय रिकॉर्ड और एजुकेशन पोर्टल में कथित विसंगति के चलते एक प्राथमिक शिक्षिका को माध्यमिक शिक्षक (वर्ग-2) अंग्रेजी विषय का शिक्षक दर्शाते हुए पहले अतिशेष घोषित कर दिया गया और बाद में उनका स्थानांतरण ऐसे विद्यालय में कर दिया गया, जहां संबंधित पद पहले से भरा हुआ बताया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम से न केवल विभागीय प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगे हैं, बल्कि विद्यालय में कार्यरत अतिथि शिक्षिका के रोजगार पर भी संकट उत्पन्न हो गया है।
मामला शासकीय प्राथमिक शाला सुड्डी में पदस्थ प्राथमिक शिक्षिका ज्योति पटेल तथा शासकीय पूर्व माध्यमिक बालक शाला पिपरिया कला से जुड़ा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एजुकेशन पोर्टल पर तकनीकी अथवा विभागीय त्रुटि के कारण ज्योति पटेल का पद माध्यमिक शिक्षक वर्ग-2 (अंग्रेजी) के रूप में दर्ज हो गया। इसी आधार पर उन्हें अतिशेष मानते हुए लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल तथा संभागीय संयुक्त संचालक, जबलपुर के आदेश क्रमांक SED/2026/VO/000711 के तहत पिपरिया कला विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार अगस्त 2024 में संयुक्त संचालक, जबलपुर द्वारा उच्च पद प्रभार प्रक्रिया के अंतर्गत ज्योति पटेल को माध्यमिक शिक्षक के रूप में शासकीय प्राथमिक शाला देवरी हटाई में पदस्थ किए जाने का आदेश जारी किया गया था। हालांकि उन्होंने उस विद्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं किया। विभागीय नियमों के अनुसार कार्यभार ग्रहण न करने की स्थिति में उक्त आदेश प्रभावहीन माना जाता है और कर्मचारी अपने मूल पद पर ही कार्यरत रहता है। इसके बावजूद वर्तमान में उन्हें माध्यमिक शिक्षक मानते हुए पिपरिया कला विद्यालय में प्रभार ग्रहण कराने की कार्रवाई किए जाने से विभागीय प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि पिपरिया कला स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक बालक शाला में स्वीकृत सेटअप के अनुसार प्राथमिक शिक्षक के सभी पद पहले से भरे हुए हैं। ऐसे में अतिरिक्त रूप से की गई पदस्थापना भविष्य में वेतन आहरण, बजट स्वीकृति तथा ऑनलाइन सेवा अभिलेखों के संचालन में गंभीर प्रशासनिक एवं तकनीकी समस्याएं उत्पन्न कर सकती है। शिक्षा विभाग के जानकारों का मानना है कि बिना रिक्त पद की पुष्टि किए इस प्रकार की पदस्थापना विभागीय व्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकती है।
इस पूरे मामले का सबसे अधिक प्रभाव विद्यालय में अंग्रेजी विषय पढ़ा रही अतिथि शिक्षिका पूर्णिमा निगम पर पड़ा है। उनका कहना है कि यदि नियमित शिक्षक के रूप में नई पदस्थापना लागू होती है तो उनकी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसी आशंका को लेकर उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला शिक्षा केंद्र कटनी को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा उचित मार्गदर्शन देने की मांग की है।
दूसरी ओर स्वयं ज्योति पटेल ने भी विभाग के "हमारे-शिक्षक" पोर्टल पर परिवेदना दर्ज कराई है। उन्होंने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि पोर्टल पर गलत प्रविष्टि के कारण उन्हें माध्यमिक शिक्षक वर्ग-2 अंग्रेजी विषय का शिक्षक प्रदर्शित किया गया, जिसके आधार पर उन्हें अतिशेष घोषित कर स्थानांतरण कर दिया गया। उनका कहना है कि इस त्रुटि के कारण उन्हें नए विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के दौरान अनेक प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पोर्टल में सुधार करते हुए त्रुटिपूर्ण स्थानांतरण आदेश को निरस्त करने की मांग की है।
शिक्षा विभाग में सामने आए इस प्रकरण ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या स्थानांतरण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया केवल ऑनलाइन पोर्टल की प्रविष्टियों के आधार पर पूरी की जा रही है या फिर वास्तविक पदस्थिति, रिक्त पदों तथा सेवा अभिलेखों का भौतिक सत्यापन भी किया जाता है। यदि समय रहते ऐसी त्रुटियों का निराकरण नहीं किया गया तो भविष्य में अनेक शिक्षक और कर्मचारी इसी प्रकार की समस्याओं का सामना कर सकते हैं।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि विभाग को इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि पोर्टल पर गलत प्रविष्टि कैसे हुई, बिना रिक्त पद के पदस्थापना किस आधार पर की गई तथा इससे प्रभावित कर्मचारियों के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी। साथ ही दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की प्रशासनिक विसंगतियां दोबारा सामने न आएं।
अब सभी की निगाहें जिला शिक्षा अधिकारी कटनी पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इस मामले की जांच कर तथ्यों के आधार पर क्या निर्णय लेता है और क्या संबंधित आदेशों में संशोधन कर प्रभावित शिक्षकों एवं अतिथि शिक्षिका को राहत प्रदान की जाती है, अथवा यह मामला आगे उच्च स्तर तक पहुंचता है।


