दो वर्ष का कार्यकाल पूरा,सिहोरा को अब भी बड़े विकास की दरकार,सांसद आशीष दुबे से जनता की उम्मीदें कायम।
सिहोरा को जिला बनाने की मांग,आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और दीर्घकालिक विकास योजना को लेकर क्षेत्रवासियों की निगाहें अगले तीन वर्षों पर टिकीं।
सिहोरा। जबलपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद आशीष दुबे के कार्यकाल के दो वर्ष जून 2026 में पूर्ण हो चुके हैं। इस अवसर पर क्षेत्र में उनके अब तक के कार्यों, उपलब्धियों और विकास संबंधी प्रयासों को लेकर विभिन्न वर्गों में चर्चा का दौर तेज हो गया है। सामाजिक संगठनों, व्यापारिक वर्ग, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों की प्रतिक्रियाओं में संतोष के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण अपेक्षाएं भी सामने आ रही हैं। लोगों का मानना है कि सांसद के रूप में उनकी सक्रियता पूर्व की अपेक्षा क्षेत्र में बढ़ी है, लेकिन सिहोरा के समग्र विकास को लेकर जिस व्यापक दृष्टि और ठोस कार्ययोजना की अपेक्षा थी, वह अब तक स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे सकी है।
सिहोरा लंबे समय से प्रशासनिक, औद्योगिक और आधारभूत विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार, उद्योग और प्रशासनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए एक सुनियोजित विकास मॉडल की आवश्यकता है। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि सांसद अपने शुरुआती कार्यकाल में क्षेत्र के लिए एक दीर्घकालिक विकास रोडमैप प्रस्तुत करेंगे, जिससे आने वाले वर्षों में विकास कार्यों की स्पष्ट दिशा तय हो सके। हालांकि ऐसा कोई व्यापक दस्तावेज या सार्वजनिक योजना अब तक सामने नहीं आ सकी है।
सिहोरा को जिला बनाए जाने की मांग वर्षों से यहां के जनआंदोलनों और सामाजिक अभियानों का प्रमुख विषय रही है। क्षेत्र के नागरिकों का मानना है कि यदि सिहोरा को जिला बनाया जाता है तो प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी, सरकारी सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान होगी तथा विकास कार्यों में भी तेजी आएगी। लोगों का कहना है कि सांसद की ओर से इस महत्वपूर्ण मांग को लेकर अब तक ऐसा कोई बड़ा सार्वजनिक प्रयास दिखाई नहीं दिया, जिससे यह विश्वास मजबूत हो सके कि इस दिशा में प्रभावी पहल की जा रही है। परिणामस्वरूप यह मुद्दा आज भी क्षेत्र की सबसे बड़ी अपेक्षाओं में शामिल है।
स्थानीय नागरिक यह भी स्वीकार करते हैं कि केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सिहोरा क्षेत्र के लोगों को भी प्राप्त हुआ है। प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि सहित अनेक योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचा है। हालांकि क्षेत्र के कई नागरिकों का मानना है कि इन योजनाओं का क्रियान्वयन राष्ट्रीय स्तर पर संचालित व्यवस्था का हिस्सा है, इसलिए इसे सांसद की व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जा सकता।
सांसद के दो वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए स्थानीय लोग यह भी बताते हैं कि सिहोरा रेलवे स्टेशन पर दो ट्रेनों के ठहराव को एक सकारात्मक उपलब्धि माना जा सकता है। इसके अतिरिक्त अभी तक कोई ऐसी बड़ी परियोजना, औद्योगिक निवेश, संस्थान या विकास कार्य सामने नहीं आया है, जिसे आने वाले वर्षों में सिहोरा की पहचान के रूप में याद किया जा सके। यही कारण है कि क्षेत्र में बड़े विकास कार्यों की अपेक्षा अभी भी बनी हुई है।
सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि सांसद को अब अपने कार्यकाल के शेष तीन वर्षों के लिए क्षेत्र के विकास की स्पष्ट प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संगठनों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ नियमित संवाद स्थापित कर विकास का एक समग्र खाका तैयार किया जा सकता है। यदि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार कर उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से क्रियान्वित कराया जाए तो सिहोरा क्षेत्र विकास के नए आयाम स्थापित कर सकता है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सिहोरा भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है, लेकिन इसके अनुरूप विकास की गति अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में सांसद से अपेक्षा है कि वे क्षेत्र की लंबित मांगों को प्राथमिकता देते हुए जिला निर्माण, आधारभूत संरचना के विस्तार, औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास जैसे मुद्दों पर विशेष पहल करें।
सांसद आशीष दुबे के कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने पर क्षेत्र में उनके कार्यों को लेकर सकारात्मक और आलोचनात्मक दोनों प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां कुछ उपलब्धियों को लेकर संतोष व्यक्त किया जा रहा है, वहीं बड़े विकास कार्यों, जिला निर्माण की मांग और दीर्घकालिक विकास योजना को लेकर जनता की उम्मीदें अभी भी बरकरार हैं। अब सभी की निगाहें कार्यकाल के शेष तीन वर्षों पर टिकी हैं कि इन वर्षों में क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित मांगों को किस स्तर तक पूरा किया जा सकेगा और सिहोरा विकास की नई दिशा की ओर कितनी तेजी से आगे बढ़ पाएगा।


