गौरा माध्यमिक विद्यालय में शाला समय के दौरान शिक्षकों के मोबाइल उपयोग पर प्रतिबंध,शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की अनूठी पहल।
प्राचार्य महेंद्र सिंह ठाकुर की पहल पर शिक्षकों की सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय,आवश्यक शासकीय कार्यों के लिए कार्यालय में रहेगा एक कॉमन मोबाइल,क्षेत्रभर में हो रही सराहना।
सिलौंडी,ग्रामीण खबर MP।
ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय गौरा में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं अनुशासित बनाने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल की गई है। विद्यालय के प्राचार्य महेंद्र सिंह ठाकुर के नेतृत्व में समस्त शिक्षकों ने आपसी सहमति से यह निर्णय लिया है कि शाला समय के दौरान कोई भी शिक्षक व्यक्तिगत मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करेगा। यह व्यवस्था प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक प्रभावी रहेगी।
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि मोबाइल के अनावश्यक उपयोग से शिक्षण कार्य प्रभावित होता है तथा विद्यार्थियों का ध्यान भी भटक सकता है। इसी सोच के साथ शिक्षकों ने स्वयं आगे बढ़कर यह निर्णय लिया कि शाला अवधि में वे पूरी तरह विद्यार्थियों की पढ़ाई, कक्षा संचालन और शैक्षणिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इस व्यवस्था के अंतर्गत सभी शिक्षक बिना व्यक्तिगत मोबाइल के कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे, जिससे शिक्षण कार्य की गुणवत्ता में और अधिक सुधार होने की उम्मीद है।
विद्यालय प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसी प्रकार के शासकीय, प्रशासनिक अथवा अत्यंत आवश्यक कार्य में कोई बाधा न आए। इसके लिए विद्यालय कार्यालय में एक कॉमन मोबाइल नंबर उपलब्ध रहेगा, जिस पर विभागीय अधिकारियों या प्रशासन की महत्वपूर्ण सूचनाएं प्राप्त की जा सकेंगी। आवश्यकता पड़ने पर उसी माध्यम से संबंधित जानकारी शिक्षकों तक पहुंचाई जाएगी।
विद्यालय की इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन और जिम्मेदारी का सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों तथा शिक्षाविदों ने इस निर्णय की खुले मन से सराहना की है। लोगों का कहना है कि जब शिक्षक पूरी तरह कक्षा शिक्षण पर ध्यान देंगे तो विद्यार्थियों की पढ़ाई का स्तर भी बेहतर होगा और विद्यालय में अनुशासन की भावना मजबूत होगी।
जैसे ही इस निर्णय की जानकारी सिलौंडी क्षेत्र में पहुंची, विद्यालय की इस पहल की व्यापक प्रशंसा शुरू हो गई। क्षेत्र के अनेक अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे अन्य विद्यालयों के लिए भी अनुकरणीय कदम बताया है। उनका मानना है कि यदि सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में शाला समय के दौरान केवल आवश्यक प्रशासनिक कार्यों के लिए ही मोबाइल का उपयोग किया जाए और व्यक्तिगत उपयोग पर नियंत्रण रखा जाए, तो विद्यार्थियों को अधिक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।
क्षेत्रवासियों ने शासन और शिक्षा विभाग से भी मांग की है कि इस प्रकार की व्यवस्था पर व्यापक स्तर पर विचार करते हुए सभी विद्यालयों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि शाला समय का पूरा उपयोग विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के लिए सुनिश्चित हो सके। गौरा माध्यमिक विद्यालय की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन, समर्पण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

