भारत के इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से पाकिस्तान में बढ़ी चिंता,रक्षा विशेषज्ञों ने दी नई सैन्य रणनीति अपनाने की सलाह।
भारतीय सेना की नई युद्धक संरचना को बताया बड़ा रणनीतिक बदलाव,सीमाओं पर त्वरित कार्रवाई की क्षमता बढ़ने से पाकिस्तान के रक्षा विश्लेषकों ने जताई चिंता।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
भारतीय सेना ने अपनी युद्धक क्षमता को और अधिक आधुनिक, तेज एवं प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (आईबीजी) की अवधारणा को लागू करना शुरू कर दिया है। इसे भारतीय सेना के हाल के वर्षों के सबसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक सुधारों में से एक माना जा रहा है। इस नई सैन्य व्यवस्था के लागू होने के बाद पाकिस्तान के कुछ रक्षा विशेषज्ञों और सैन्य विश्लेषकों ने सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त करते हुए पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को भी इसी प्रकार की आधुनिक एवं त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली सैन्य संरचना विकसित करने की सलाह दी है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय सेना की यह नई व्यवस्था सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों की तेज तैनाती, बेहतर समन्वय और कम समय में प्रभावी सैन्य कार्रवाई करने की क्षमता को मजबूत करेगी। यही कारण है कि पाकिस्तान के कुछ विश्लेषकों ने इसे दक्षिण एशिया के सामरिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव बताया है।
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स को इस प्रकार तैयार किया गया है कि किसी भी आपात स्थिति में उन्हें कम समय में सक्रिय कर सीमावर्ती क्षेत्रों में भेजा जा सके। इन समूहों में पैदल सेना, बख्तरबंद टैंक, तोपखाना, इंजीनियरिंग इकाइयां, वायु रक्षा प्रणाली, संचार व्यवस्था तथा लॉजिस्टिक सहायता जैसी सभी आवश्यक सैन्य क्षमताएं एक ही कमान के अंतर्गत उपलब्ध रहती हैं। इससे अलग-अलग सैन्य इकाइयों को जोड़ने में लगने वाला समय कम हो जाता है और ऑपरेशन अधिक प्रभावी तरीके से संचालित किए जा सकते हैं।
रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार पारंपरिक सैन्य संरचना की तुलना में आईबीजी अधिक लचीले, आत्मनिर्भर और तेज प्रतिक्रिया देने वाले सैन्य गठन हैं। इनका उद्देश्य सीमाओं पर बदलती परिस्थितियों के अनुसार तत्काल निर्णय लेकर कार्रवाई करना है। आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दुनिया के कई देशों ने भी इसी प्रकार की युद्धक संरचनाओं को प्राथमिकता दी है।
पाकिस्तान के कुछ रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय सेना की इस नई सैन्य व्यवस्था से क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन पर प्रभाव पड़ सकता है। उनका मानना है कि यदि भविष्य में किसी सीमावर्ती तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है तो भारतीय सेना पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से सैन्य कार्रवाई करने की स्थिति में होगी। इसी कारण उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व से आग्रह किया है कि वह भी आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी सैन्य संरचना में आवश्यक बदलावों पर विचार करे।
हालांकि किसी भी देश की सैन्य रणनीति उसके अपने सुरक्षा हितों और राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप निर्धारित होती है। भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी सैन्य तैयारियों का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना, सीमाओं की रक्षा करना तथा किसी भी चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना करने की क्षमता विकसित करना है।
सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य के युद्ध केवल सैनिकों की संख्या से नहीं बल्कि तकनीक, समन्वय, त्वरित निर्णय क्षमता और आधुनिक संगठनात्मक ढांचे से तय होंगे। इसी दृष्टि से भारतीय सेना द्वारा इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स की शुरुआत को एक महत्वपूर्ण और दूरगामी सैन्य सुधार माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि दक्षिण एशिया में बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत और पाकिस्तान दोनों अपनी-अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं। ऐसे में नई सैन्य अवधारणाओं और रणनीतिक सुधारों पर दोनों देशों के रक्षा विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है।

