2600 करोड़ के उज्जैन-गरोठ ग्रीनफील्ड हाईवे की एप्रोच रोड फिर धंसी,निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल।

 2600 करोड़ के उज्जैन-गरोठ ग्रीनफील्ड हाईवे की एप्रोच रोड फिर धंसी,निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल।

सात महीने पहले जिस हिस्से में आई थी समस्या,उसी क्षेत्र में दोबारा धंसाव और दरारें,NHAI ने प्रभावित हिस्से को दुरुस्त करने के दिए निर्देश।

उज्जैन। करीब 2600 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे उज्जैन-गरोठ ग्रीनफील्ड फोरलेन हाईवे के निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाईवे के निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच रोड के एक हिस्से में दोबारा धंसाव और दरारें दिखाई देने की जानकारी सामने आई है। खास बात यह है कि जिस क्षेत्र में कुछ महीने पहले भी सड़क के धंसने की समस्या सामने आई थी, उसी क्षेत्र में एक बार फिर ऐसी स्थिति बनने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

उज्जैन-गरोठ ग्रीनफील्ड हाईवे प्रदेश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद उज्जैन से गरोठ और आगे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक आवागमन अधिक सुगम होने की उम्मीद है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2600 करोड़ रुपये बताई गई है और इसकी लंबाई लगभग 135 किलोमीटर है। ऐसे में निर्माणाधीन हिस्सों में बार-बार सामने आ रही तकनीकी समस्याएं संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी के लिए चिंता का विषय मानी जा रही हैं।

जानकारी के अनुसार उज्जैन के प्रेमनगर-चंदेसरी क्षेत्र में देवास रोड ब्रिज से रेलवे पटरी के बीच निर्माणाधीन हिस्से में करीब 500 मीटर क्षेत्र में धंसाव और दरारें दिखाई दी हैं। यह क्षेत्र रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच से जुड़ा हुआ है। स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और जानकारी के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

बताया जा रहा है कि इसी क्षेत्र में करीब सात महीने पहले भी सड़क के एक हिस्से में धंसाव की समस्या सामने आई थी। उस समय संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की ओर से सुधार कार्य कराया गया था। अब उसी क्षेत्र में दोबारा धंसाव सामने आने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर पहले किए गए सुधार कार्य के बावजूद समस्या दोबारा क्यों उत्पन्न हुई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से प्रभावित हिस्से को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर खराब हिस्से को हटाकर दोबारा निर्माण करने की बात भी सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि विभाग भी इस समस्या को केवल सामान्य सतही क्षति के रूप में नहीं देख रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े हाईवे प्रोजेक्ट में रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच रोड का निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यहां मिट्टी की गुणवत्ता, भराव की प्रक्रिया, लेयरिंग, कम्पैक्शन, जल निकासी तथा अन्य तकनीकी मानकों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। यदि इन प्रक्रियाओं में किसी स्तर पर कमी रह जाए तो सड़क अथवा एप्रोच में धंसाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। हालांकि इस मामले में वास्तविक कारण तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

फिलहाल निर्माणाधीन सड़क में दोबारा सामने आई समस्या ने परियोजना की निगरानी और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग पूरे मामले की तकनीकी जांच कराए और यह स्पष्ट करे कि धंसाव की वास्तविक वजह क्या है तथा पहले कराए गए सुधार कार्य के बाद समस्या दोबारा कैसे उत्पन्न हुई।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईवे का निर्माण अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में निर्माणाधीन हिस्से में सामने आई खामी को समय रहते दूर करना जरूरी है, ताकि भविष्य में हाईवे शुरू होने के बाद वाहन चालकों और यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी अथवा सुरक्षा संबंधी जोखिम का सामना न करना पड़े।

अब निगाहें NHAI और निर्माण एजेंसी की आगामी कार्रवाई पर हैं। यदि प्रभावित हिस्से की तकनीकी जांच कर वास्तविक कारण सामने लाया जाता है और मानकों के अनुरूप स्थायी समाधान किया जाता है, तो परियोजना की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब भी मिल सकेगा। वहीं, यदि ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आती हैं तो इतने बड़े और महत्वपूर्ण सड़क प्रोजेक्ट की निर्माण प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक होगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post