सिलौंडी में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर गूंजा जय कन्हैया लाल की जयघोष।

 सिलौंडी में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर गूंजा जय कन्हैया लाल की जयघोष।

मंदिरों में भजन-कीर्तन,पूजन-अर्चन और झांकियों के साथ मनाया भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव,मटकी फोड़ प्रतियोगिता में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने लिया उत्साह से भाग।

सिलौंडी। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सिलौंडी में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नगर के विभिन्न मंदिरों में दिनभर धार्मिक आयोजनों का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। मंदिरों में भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

सिलौंडी के धरमपुरा क्षेत्र में अखंड श्री रामचरित मानस पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। वहीं श्री राधा-कृष्ण मंदिर गल्ला बाजार, श्री रामबाग मंदिर, श्री राम मंदिर, श्री बालाजी मंदिर सहित नगर के अन्य मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे।

जन्माष्टमी के अवसर पर बस स्टैंड क्षेत्र में मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। प्रतियोगिता में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर सभी का मन मोह लिया। बच्चों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में उनके उत्साह ने वातावरण को और भी आनंदमय बना दिया। मटकी फोड़ प्रतियोगिता के दौरान बच्चों और उपस्थित लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।

वहीं नगर के आंगनवाड़ी केंद्रों में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष आयोजन किए गए। केंद्रों में भगवान श्रीराधा-कृष्ण की आकर्षक झांकियां सजाई गईं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, उनके जीवन प्रसंगों और जन्माष्टमी पर्व के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी गई। बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक कार्यक्रमों में सहभागिता की और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप से जुड़े प्रसंगों को जाना।

पूरे सिलौंडी क्षेत्र में जन्माष्टमी पर्व को लेकर श्रद्धा और उल्लास का माहौल रहा। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से जहां लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की, वहीं बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं एवं संस्कारों से जोड़ने का प्रयास भी किया गया। देर रात तक मंदिरों और आयोजन स्थलों पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही तथा भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण भक्तिमय रहा।

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