नेपाल की विनाशकारी बाढ़ में तबाही के बीच अडिग रहा ‘हरा घर’,परिवार के लिए बना उम्मीद का प्रतीक।

 नेपाल की विनाशकारी बाढ़ में तबाही के बीच अडिग रहा ‘हरा घर’,परिवार के लिए बना उम्मीद का प्रतीक।

चारों ओर मलबा और उफनती नदी का कहर,फिर भी नहीं ढहा करीब 40 साल पुराना मकान,लक्ष्मी पांडेय बोलीं-‘ओम नमःशिवाय’ का जाप करती रही,भगवान शिव ने बचा लिया।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। बाढ़ और अचानक आए तेज जलप्रवाह ने कई इलाकों में घरों, वाहनों, सड़कों और अन्य संपत्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1,127 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4,858 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में तलाश और बचाव अभियान चला रहे हैं।

इस भयावह तबाही के बीच नेपाल से सामने आया एक वीडियो पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। वीडियो में चारों तरफ बाढ़ का पानी, मलबा और तबाही दिखाई दे रही है, लेकिन इसी विनाश के बीच एक हरे रंग का मकान मजबूती से खड़ा नजर आता है। आसपास मौजूद कई वस्तुएं और वाहन तेज बहाव में बह गए, लेकिन करीब 40 साल पुराना यह मकान बाढ़ के प्रचंड प्रवाह के बावजूद पूरी तरह ढहने से बच गया।

यह मकान नुवाकोट जिले के त्रिशूली क्षेत्र में स्थित बताया जा रहा है। बाढ़ के दौरान पानी और मलबे का दबाव इतना अधिक था कि आसपास का पूरा इलाका प्रभावित हो गया। देखते ही देखते पानी घर के चारों तरफ पहुंच गया और मकान के भीतर मौजूद परिवार के सदस्यों के सामने भी जान बचाने की चुनौती खड़ी हो गई।

मकान की मालकिन लक्ष्मी पांडेय ने उस भयावह समय को याद करते हुए बताया कि जब बाढ़ का पानी चारों ओर से घर को घेर रहा था, तब परिवार के लोग बेहद डर गए थे। पानी लगातार बढ़ रहा था और बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया था। ऐसे समय में परिवार ने घर की ऊपरी मंजिल पर शरण ली।

लक्ष्मी पांडेय के मुताबिक, उस दौरान उनके मन में केवल भगवान शिव का नाम था। वह लगातार ‘ओम नमः शिवाय’ का जाप करती रहीं। उनका कहना है कि परिवार नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा करता है और उन्हें पूरा विश्वास है कि संकट की उस घड़ी में भगवान शिव ने ही उनकी और उनके परिवार की रक्षा की।

बाढ़ के बीच परिवार करीब एक से डेढ़ घंटे तक बेहद कठिन परिस्थितियों में फंसा रहा। चारों ओर तेज पानी और मलबे का बहाव था। मकान के बाहर का दृश्य किसी भयावह मंजर से कम नहीं था। इसके बावजूद मकान का मुख्य ढांचा खड़ा रहा और परिवार को तत्काल सुरक्षित स्थान मिलने तक आश्रय देता रहा।

बाद में स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए परिवार को बाहर निकालने में मदद की। पाइप और रस्सी की सहायता से घर में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बताया गया है कि मकान में छह लोग फंसे हुए थे और सभी सुरक्षित बचा लिए गए।

बाढ़ के बाद सामने आए वीडियो में यह मकान आसपास की तबाही के बीच बिल्कुल अलग दिखाई देता है। इसी वजह से सोशल मीडिया पर इसे ‘नेपाल का वायरल हरा घर’ कहा जाने लगा। वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोग इसे देखकर हैरान हैं और परिवार के सुरक्षित बचने को किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं।

हालांकि मकान के बच जाने को केवल चमत्कार के रूप में देखना तकनीकी रूप से उचित नहीं होगा। विशेषज्ञों के अनुसार मकान की निर्माण गुणवत्ता, मजबूत ढांचा, नींव, पिलर और उसकी भौगोलिक स्थिति जैसे कई कारणों ने भी इसे तेज बहाव के बीच टिके रहने में मदद की हो सकती है। बाढ़ के बाद मकान में कुछ नुकसान और दरारों की बात भी सामने आई है, इसलिए इसके ढांचे की वास्तविक मजबूती का तकनीकी परीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लक्ष्मी पांडेय के लिए हालांकि इस घटना का सबसे बड़ा अर्थ उनके परिवार का सुरक्षित बचना है। उनका कहना है कि जिस समय चारों ओर मौत और तबाही का मंजर था, उस समय उन्हें भगवान शिव पर भरोसा था। उनका विश्वास है कि भगवान की कृपा और लोगों की मदद से उनका परिवार सुरक्षित बाहर निकल पाया।

नेपाल की इस विनाशकारी बाढ़ ने जहां हजारों परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है, वहीं त्रिशूली क्षेत्र का यह हरा मकान अब लोगों के लिए साहस, विश्वास और उम्मीद की कहानी बन गया है। उफनते पानी और मलबे के बीच खड़ा यह मकान प्राकृतिक आपदा की भयावहता को भी दिखाता है और यह भी याद दिलाता है कि सबसे कठिन परिस्थितियों में इंसानी हिम्मत, आपसी मदद और आस्था लोगों को संभालने की ताकत दे सकती है।

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