ग्राम पंचायत बरेली में विकास कार्यों की राशि में गड़बड़ी के गंभीर आरोप।

 ग्राम पंचायत बरेली में विकास कार्यों की राशि में गड़बड़ी के गंभीर आरोप।

सीसी सड़क, नाली निर्माण,हैंडपंप,चौपाल चबूतरा और स्कूल की बाउंड्रीवाल को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल,ग्रामसभा नहीं होने का भी लगाया आरोप।

उमरिया पान। ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बरेली में पंचायत के विकास कार्यों और शासकीय राशि के उपयोग को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत क्षेत्र में कई ऐसे विकास एवं निर्माण कार्यों के नाम पर राशि आहरित की गई है, जो मौके पर या तो कराए ही नहीं गए अथवा अधूरे पड़े हुए हैं। ग्रामीणों ने पंचायत में हुए विभिन्न कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने तथा शासकीय राशि के उपयोग का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है।

ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम पंचायत में सरपंच के चुनाव के बाद से अब तक नियमित रूप से ग्रामसभा आयोजित नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामसभा पंचायत व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके माध्यम से ग्रामीणों को पंचायत में स्वीकृत विकास कार्यों, उनके बजट और प्रगति की जानकारी मिलती है। लेकिन बरेली में ग्रामीणों को ग्रामसभा के माध्यम से पंचायत के कार्यों की जानकारी नहीं मिल पा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत के कामकाज में आम ग्रामीणों की भागीदारी सीमित हो गई है।

सीसी सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने सबसे गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बरेली गांव में सीसी सड़क का निर्माण दिखाई नहीं देता, लेकिन सड़क निर्माण के नाम पर पंचायत की राशि आहरित कर ली गई। ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत के अभिलेखों में जिन स्थानों पर सीसी सड़क निर्माण स्वीकृत और पूर्ण दर्शाया गया है, उनका मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए। यदि कार्य कागजों में पूर्ण और जमीन पर अधूरा या अनुपस्थित पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय की जाए।

इसी तरह चौपाल चबूतरा निर्माण को लेकर भी ग्रामीणों ने अनियमितता का आरोप लगाया है। ग्रामीणों के अनुसार चौपाल चबूतरा निर्माण कार्य अभी तक आधा-अधूरा पड़ा हुआ है, जबकि संबंधित कार्य की पूरी राशि आहरित किए जाने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री, मजदूरों की संख्या, मस्टर रोल तथा भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

हैंडपंप खनन के नाम पर भी राशि निकाले जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में नया हैंडपंप खनन कराए जाने की जानकारी उन्हें नहीं है और मौके पर भी ऐसा कोई नया कार्य दिखाई नहीं देता। इसके बावजूद हैंडपंप खनन के नाम पर राशि आहरित किए जाने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत के रिकॉर्ड में दर्ज हैंडपंप खनन स्थलों का भौतिक सत्यापन कराया जाए और संबंधित भुगतान की जांच की जाए।

गांव में नालियों की सफाई और निर्माण की स्थिति को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण जगह-जगह गंदगी और अव्यवस्था बनी हुई है। इसके बावजूद नाली निर्माण एवं संबंधित कार्यों के नाम पर राशि खर्च किए जाने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों ने पंचायत द्वारा नाली निर्माण, मरम्मत और सफाई के नाम पर किए गए खर्च का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।

सड़कों की स्थिति भी ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार गांव की कई सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। बरसात के दिनों में इन गड्ढों में पानी भरने से आवागमन में परेशानी होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की मरम्मत के लिए आवश्यक मुरुम तक नहीं डलवाई जा रही है। ग्रामीणों ने कहा कि पंचायत में यदि सड़क मरम्मत या रखरखाव के नाम पर राशि खर्च की गई है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए।

शासकीय स्कूल की बाउंड्रीवाल निर्माण को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितता के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उपयोग की गई सामग्री की जांच आवश्यक है। ग्रामीणों ने बाउंड्रीवाल निर्माण की लागत, स्वीकृति, तकनीकी मापदंड, भुगतान एवं कार्य की गुणवत्ता की जांच किसी सक्षम तकनीकी अधिकारी से कराने की मांग की है।

चौपाल चबूतरा निर्माण में कार्य करने वाले मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं किए जाने का आरोप भी ग्रामीणों द्वारा लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मजदूरों के नाम मस्टर रोल में दर्ज हैं और उनके नाम से भुगतान निकाला गया है, तो वास्तविक मजदूरों तक राशि पहुंची या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए। मजदूरों ने भी अपने भुगतान को लेकर शिकायत किए जाने की बात कही है।

पंचायत की राशि के आहरण को लेकर ग्रामीणों ने सरपंच पति जयपाल सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत की राशि सरपंच की जानकारी के बिना कथित रूप से सरपंच पति द्वारा हस्ताक्षर कर निकाल ली जाती है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही इसकी वास्तविकता सामने आ सकती है। ग्रामीणों ने पंचायत के बैंक खाते, चेक, भुगतान आदेश, हस्ताक्षर, बिल-वाउचर तथा अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत के कामकाज में अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाने या शिकायत करने पर उन्हें झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने तथा जेल भिजवाने की धमकी दी जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के कार्यों में यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है तो निष्पक्ष जांच से स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी। इसलिए प्रशासन को शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए स्वतंत्र जांच करानी चाहिए।

ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत बरेली में पिछले वर्षों के दौरान स्वीकृत सभी निर्माण एवं विकास कार्यों की सूची तैयार कर प्रत्येक कार्य का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए। सीसी सड़क, नाली निर्माण, हैंडपंप खनन, चौपाल चबूतरा, स्कूल की बाउंड्रीवाल सहित अन्य कार्यों की स्वीकृत राशि और वास्तविक खर्च का मिलान किया जाए।

इसके साथ ही पंचायत के मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों से पूछताछ कर यह पता लगाया जाए कि उन्होंने वास्तव में संबंधित कार्यों में मजदूरी की थी अथवा नहीं और यदि कार्य किया था तो उन्हें मजदूरी का पूरा भुगतान प्राप्त हुआ या नहीं। ग्रामीणों ने पंचायत के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कराने की मांग की है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि शासकीय राशि किस कार्य के लिए, किसके माध्यम से और किस प्रक्रिया के तहत आहरित की गई।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों के लिए शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली राशि आम जनता के हित में होती है। ऐसे में यदि राशि का गलत तरीके से उपयोग हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। ग्रामीणों ने जिला पंचायत, जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जांच के दौरान पंचायत के अभिलेखों और मौके पर मौजूद निर्माण कार्यों का मिलान कराया जाए तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और जिन विकास कार्यों की राशि निकाली जा चुकी है लेकिन कार्य अधूरे हैं, उन्हें गुणवत्ता के साथ पूरा कराया जाए।

फिलहाल ग्राम पंचायत बरेली में ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों ने पंचायत के कामकाज और विकास कार्यों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पंचायत पदाधिकारियों एवं अधिकारियों का पक्ष सामने आने तथा दस्तावेजों और मौके की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों को अब प्रशासन की जांच और कार्रवाई का इंतजार है।

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