बरहटा ग्राम पंचायत में सरपंच-सचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल,वित्तीय अनियमितताओं के आरोप।

 बरहटा ग्राम पंचायत में सरपंच-सचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल,वित्तीय अनियमितताओं के आरोप।

पंचायत से अनुपस्थित रहने से लेकर फर्जी बिलों,आंगनबाड़ी निर्माण और पंचवन नर्सरी में कथित गड़बड़ी तक उठे सवाल,ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।

ढीमरखेड़ा। कटनी जिले की जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत बरहटा इन दिनों ग्रामीणों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पंचायत में मनमानी, वित्तीय अनियमितताओं, शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी तथा विभिन्न निर्माण कार्यों में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में आम जनता से जुड़े कार्यों के लिए सरपंच एवं सचिव की मौजूदगी नियमित रूप से नहीं रहती। ग्रामीणों के आरोप के अनुसार पंचायत सचिव सैयद अहमद अली कभी एक सप्ताह तो कभी 15 दिन के अंतराल में पंचायत पहुंचते हैं। इसके कारण पंचायत में आने वाले ग्रामीणों को अपने काम के लिए परेशान होना पड़ता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पंचायत कार्यालय के नियमित रूप से संचालित नहीं होने के कारण शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, पात्रता एवं लाभ लेने की प्रक्रिया की जानकारी आम ग्रामीणों तक समय पर नहीं पहुंच पाती।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत में विभिन्न कार्यों के नाम पर भुगतान संबंधी दस्तावेज एवं बिलों में भी कथित अनियमितताएं की जा रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि कई बार पंचायत से बाहर रहकर भी कागजी प्रक्रिया पूरी कर शासकीय राशि का भुगतान कराया जा रहा है। उन्होंने आरोपों की जांच के लिए पंचायत के कैशबुक, वाउचर, बिल, भुगतान अभिलेख, निर्माण कार्यों के माप पुस्तिका सहित संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर उन्होंने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के समक्ष कई बार शिकायतें कीं, लेकिन उनके अनुसार शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं तो संबंधित अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर पंचायत के कार्यों एवं अभिलेखों का परीक्षण करना चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि शिकायतों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

नवीन आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर आपत्ति जताई है। ग्रामीणों का आरोप है कि नया आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे स्थान पर बनाया गया है, जिसे वे डूब प्रभावित क्षेत्र बता रहे हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि निर्माण के लिए स्थान का चयन किस आधार पर किया गया, क्या संबंधित विभाग से आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति ली गई और क्या निर्माण स्थल का पूर्व में परीक्षण कराया गया था। ग्रामीणों ने आंगनबाड़ी भवन की स्वीकृति, निर्माण लागत, तकनीकी मापदंड और स्थल चयन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

वहीं दूसरी आंगनबाड़ी केंद्र को लेकर भी ग्रामीणों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत परिसर से लगी बाउंड्रीवॉल को तोड़कर निर्माण किया गया है तथा कुछ पिलर सड़क के ऊपर तक लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे सड़क से आवागमन करने वाले लोगों और वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित निर्माण की स्थिति का मौके पर निरीक्षण कर यह भी देखा जाए कि निर्माण निर्धारित नक्शे, स्वीकृति एवं नियमों के अनुरूप किया गया है या नहीं।

ग्राम पंचायत से संबंधित पंचवन नर्सरी का मामला भी ग्रामीणों की शिकायतों में प्रमुखता से सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के अधीन रही पंचवन नर्सरी में बड़े-बड़े पेड़ों को कटवाकर नष्ट किया गया। ग्रामीणों ने कहा कि यदि नर्सरी पंचायत के अधीन थी तो वहां लगे पेड़ों एवं पौधों की सुरक्षा तथा संरक्षण की जिम्मेदारी भी संबंधित पंचायत एवं जिम्मेदार अधिकारियों की थी। ऐसे में पेड़ों की कटाई एवं नर्सरी को नुकसान पहुंचाने की शिकायत की विधिवत जांच होना आवश्यक है।

ग्रामीणों के अनुसार पंचवन नर्सरी में पेड़ों की कटाई की शिकायत लेकर वे जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी यजुवेंद्र कोरी के पास पहुंचे थे। ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वन विभाग अथवा राजस्व विभाग में शिकायत करने की बात कही गई। ग्रामीणों का कहना है कि काफी आग्रह के बाद उनका आवेदन लिया गया, लेकिन इसके बाद भी आज दिनांक तक मामले में कोई प्रभावी जांच नहीं हुई। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि नर्सरी किस विभाग अथवा संस्था के अधीन थी और पेड़ों की कटाई किसकी अनुमति से हुई।

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि पंचवन नर्सरी ग्राम पंचायत के अधीन थी और पंचायत की संपत्ति अथवा जिम्मेदारी से जुड़ा मामला था, तो पंचायत स्तर पर प्राप्त शिकायत के बाद संबंधित रिकॉर्ड एवं मौके की जांच कराई जानी चाहिए थी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में पेड़ों की अवैध कटाई या शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की बात सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

ग्रामीणों के मुताबिक पंचवन नर्सरी मामले के संबंध में उन्होंने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, ढीमरखेड़ा को भी लिखित शिकायत दी थी। ग्रामीणों का दावा है कि शिकायत पर एसडीएम द्वारा नायब तहसीलदार, सिलौंडी को मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर अपेक्षित जांच नहीं हुई और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई की गई। ग्रामीणों ने इस संबंध में भी प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के लिए शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली राशि जनता के हित में खर्च की जाती है। इसलिए पंचायत के प्रत्येक निर्माण कार्य और भुगतान प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता एवं जवाबदेही होना जरूरी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पिछले कुछ वर्षों में ग्राम पंचायत बरहटा में कराए गए विकास कार्यों और किए गए भुगतानों का रिकॉर्ड खंगाला जाए तथा मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत बरहटा से जुड़ी सभी शिकायतों की एक संयुक्त एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच के दौरान पंचायत के वित्तीय अभिलेख, कैशबुक, बिल-वाउचर, भुगतान रिकॉर्ड, निर्माण कार्यों की स्वीकृति, तकनीकी परीक्षण, माप पुस्तिका, आंगनबाड़ी भवनों की स्थिति तथा पंचवन नर्सरी से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभागों के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर मौके का निरीक्षण कराया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में सरपंच, सचिव अथवा किसी अन्य जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता प्रमाणित होती है तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यदि लगाए गए आरोप निराधार पाए जाते हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों के बीच बनी शंकाओं का समाधान हो सके।

ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष को बदनाम करना नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत में पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उनका कहना है कि पंचायत में आने वाले प्रत्येक ग्रामीण को शासन की योजनाओं की जानकारी मिले, पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ मिले और विकास कार्यों में खर्च होने वाली शासकीय राशि का सही उपयोग हो, यही उनकी मुख्य मांग है।

अब ग्रामीणों की शिकायतों पर जिला प्रशासन कितना गंभीरता से संज्ञान लेता है और क्या ग्राम पंचायत बरहटा के कार्यों की निष्पक्ष जांच के लिए टीम गठित की जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएगा और जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मामले में लगाए गए आरोप ग्रामीणों के बयानों एवं शिकायतों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित सरपंच, सचिव एवं अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद समाचार को और अधिक पूर्ण रूप से प्रस्तुत किया जा सकेगा।

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