आदिवासी बेटी की पढ़ाई के लिए पूर्व बीईओ लखन लाल बागरी ने बढ़ाया मदद का हाथ।

 आदिवासी बेटी की पढ़ाई के लिए पूर्व बीईओ लखन लाल बागरी ने बढ़ाया मदद का हाथ।

कक्षा 9वीं में प्रवेश पर 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि,11वीं में प्रवेश लेने पर 10 हजार रुपये देने का किया वादा।

सिलौंडी। आदिवासी बाहुल्य ग्राम कारोपानी में शिक्षा को बढ़ावा देने और बेटियों को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित करने की दिशा में पूर्व बीईओ एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य लखन लाल बागरी ने सराहनीय एवं प्रेरणादायक पहल की है। उन्होंने ग्राम कारोपानी की उस बेटी को कक्षा 9वीं में प्रवेश लेने पर 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की है, जो आजादी के बाद आदिवासी बाहुल्य ग्राम की पहली बेटी बताई जा रही है, जिसने कक्षा 9वीं में प्रवेश लिया है।

पूर्व बीईओ लखन लाल बागरी ने छात्रा को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने और उसके परिवार को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पूर्व में ही 5 हजार रुपये की राशि देने का वादा किया था। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संकल्प को पूरा करते हुए उन्होंने यह राशि प्राचार्य के माध्यम से छात्रा को प्रदान कराई। इस राशि से छात्रा की पढ़ाई से संबंधित आवश्यकताओं में सहायता मिल सकेगी और उसे आगे की शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

बताया गया कि लखन लाल बागरी का उद्देश्य केवल एक छात्रा की आर्थिक मदद करना नहीं, बल्कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के बच्चों और विशेष रूप से बेटियों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करना है। उनका मानना है कि किसी भी समाज की प्रगति का सबसे मजबूत आधार शिक्षा है और जब बेटियां शिक्षित होती हैं तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है।

लखन लाल बागरी ने छात्रा को आगे भी मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा है कि यदि छात्रा अपनी पढ़ाई निरंतर जारी रखते हुए कक्षा 11वीं में प्रवेश लेती है, तो उस समय उसे 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। उनके इस संकल्प से छात्रा और उसके परिवार में खुशी का माहौल है तथा छात्रा को आगे पढ़ने के लिए नया उत्साह मिला है।

आदिवासी बाहुल्य ग्राम कारोपानी में शिक्षा के प्रति इस प्रकार की पहल को ग्रामीणों द्वारा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक परिस्थितियों के कारण कई बार प्रतिभावान बच्चे आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते। ऐसे समय में समाज के शिक्षित एवं सक्षम लोगों द्वारा बच्चों की मदद और उनका उत्साहवर्धन किया जाना निश्चित रूप से सराहनीय है।

क्षेत्रवासियों ने कहा कि लखन लाल बागरी ने अपने सेवाकाल में शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहने के बाद सेवानिवृत्ति के पश्चात भी बच्चों की शिक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को कायम रखा है। उनकी यह पहल आदिवासी अंचल के अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणा का काम करेगी और अभिभावकों में अपनी बेटियों को अधिक से अधिक पढ़ाने के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी।

विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्र की बेटी को कक्षा 9वीं में प्रवेश लेने पर आर्थिक प्रोत्साहन देना और आगे कक्षा 11वीं में प्रवेश पर 10 हजार रुपये देने का संकल्प करना शिक्षा को लेकर सकारात्मक सोच का उदाहरण है। इससे छात्रा को न केवल आर्थिक सहयोग मिला है, बल्कि यह विश्वास भी मिला है कि उसकी शिक्षा और मेहनत को समाज में महत्व दिया जा रहा है।

लखन लाल बागरी की इस पहल की सिलौंडी सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समाज के अन्य लोग भी शिक्षा के क्षेत्र में इसी तरह आगे आकर बच्चों का सहयोग करें, तो आदिवासी एवं ग्रामीण अंचलों में शिक्षा का स्तर और बेहतर हो सकता है। ऐसे प्रयास बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें उच्च शिक्षा की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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