खितौला से सिहोरा तक गूंजा हर-हर महादेव,हजारों भक्तों ने निकाली भव्य कांवड़ यात्रा।

 खितौला से सिहोरा तक गूंजा हर-हर महादेव,हजारों भक्तों ने निकाली भव्य कांवड़ यात्रा।

हिरन नदी घाट से पवित्र जल लेकर नंगे पैर पांच किलोमीटर चले कांवड़िए,बाबाताल मंदिर में किया भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक।

सिहोरा। सावन के पावन माह के सोमवार को खितौला से सिहोरा तक निकली भव्य कांवड़ यात्रा में आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। हिरन नदी घाट से पवित्र जल लेकर हजारों की संख्या में कांवड़िए नंगे पैर करीब पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए सिहोरा के प्रसिद्ध बाबाताल मंदिर पहुंचे। यहां श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का पवित्र जल से जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा मार्ग और मंदिर परिसर शिवमय नजर आया।

सुबह से ही खितौला स्थित हिरन नदी घाट पर कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। देखते ही देखते घाट और आसपास का पूरा क्षेत्र भगवा रंग में रंग गया। श्रद्धालुओं ने हिरन नदी से पवित्र जल अपनी कांवड़ में भरा और भगवान शिव के जयकारों के साथ सिहोरा की ओर यात्रा शुरू की। नंगे पैर करीब पांच किलोमीटर की इस यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने कांवड़ियों का स्वागत किया और उनकी सेवा की।

यात्रा का प्रमुख आकर्षण भगवान भोलेनाथ की भव्य झांकी रही। रथ पर सजे भगवान शिव के मनमोहक स्वरूप ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। झांकी के साथ सिद्धन धाम के आचार्य भी यात्रा में शामिल रहे। डीजे पर गूंजते भजनों, शिव स्तुति और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

इस बार कांवड़ यात्रा में युवाओं और महिलाओं की विशेष रूप से बड़ी भागीदारी देखने को मिली। बड़ी संख्या में युवा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ कांवड़ लेकर यात्रा में शामिल हुए, वहीं महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग के श्रद्धालु शिवभक्ति में लीन नजर आए। आयोजकों के अनुसार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते यह पिछले 15 वर्षों में सिहोरा की सबसे बड़ी कांवड़ यात्राओं में से एक रही।

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धा के साथ अनुशासन और सेवा भावना भी देखने को मिली। श्रद्धालु पूरे रास्ते भगवान शिव का नाम जपते हुए आगे बढ़ते रहे। विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों द्वारा कांवड़ियों के लिए स्वागत, पेयजल और अन्य व्यवस्थाएं की गईं। इससे यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ गया।

सिहोरा पहुंचने पर कांवड़ यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद कांवड़िए बाबाताल मंदिर पहुंचे, जहां हिरन नदी से लाए गए पवित्र जल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया गया। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंज उठा।

सावन में कांवड़ यात्रा को भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, संकल्प और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु पवित्र नदी से जल लेकर उसे भगवान शिव को अर्पित करते हैं। खितौला से सिहोरा तक निकली यह कांवड़ यात्रा भी इसी धार्मिक परंपरा और लोक आस्था का जीवंत उदाहरण बनी।

भव्य कांवड़ यात्रा ने सिहोरा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत किया। हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि आस्था और भक्ति समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में जोड़ने की शक्ति रखती है। पूरे मार्ग में गूंजते हर-हर महादेव के जयघोष और श्रद्धालुओं के उत्साह ने सावन के इस पावन सोमवार को सिहोरा के लिए यादगार बना दिया।

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