डाक विभाग के निजीकरण के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू,कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध।

 डाक विभाग के निजीकरण के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू,कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध।

सिलौंडी सहित जबलपुर संभाग के डाकघरों में विरोध प्रदर्शन प्रारंभ,चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा,मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी।

सिलौंडी। भारतीय डाक विभाग कर्मचारी संघ ने डाक विभाग के कथित निजीकरण, कर्मचारियों पर बढ़ते कार्यभार तथा विभिन्न लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया है। आंदोलन के प्रथम चरण के अंतर्गत सिलौंडी सहित जबलपुर संभाग के सभी डाकघरों में कर्मचारी 20 जुलाई से 27 जुलाई 2026 तक काली पट्टी बांधकर अपने नियमित कार्य का निर्वहन करते हुए विरोध दर्ज करा रहे हैं।

भारतीय डाक विभाग कर्मचारी संघ के संभागीय सचिव अनिल सिंह बागरी ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि संघ का आरोप है कि विदेशी कंपनी मैकेंजी के सुझावों के आधार पर डाक विभाग का निजीकरण करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उनका कहना है कि विभाग में "टारगेट" आधारित कार्य प्रणाली लागू कर कर्मचारियों पर लगातार मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। संघ का आरोप है कि ग्रामीण डाक सेवकों तथा विभागीय कर्मचारियों से अपने वेतन से खाते खुलवाकर लक्ष्य पूरे कराए जा रहे हैं, जिसे संगठन आर्थिक एवं मानसिक शोषण मानता है।

संघ ने बताया कि आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जाएगा। प्रथम चरण में 20 से 27 जुलाई तक सभी डाकघरों में काली पट्टी बांधकर विरोध किया जा रहा है। इसके बाद 28 जुलाई को लंच अवकाश के दौरान मंडलीय कार्यालयों में विशाल प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 5 अगस्त को पूरे मध्यप्रदेश में एक दिवसीय हड़ताल की जाएगी। इसके बावजूद समाधान नहीं निकलने पर 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

संघ ने अपनी प्रमुख मांगों में कर्मचारियों पर टारगेट के नाम पर होने वाले कथित शोषण को तत्काल बंद करने, रेल डाक सेवा को पुनः बहाल करने, मेल मोटर विभाग सहित अन्य रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती करने तथा विभाग में बढ़ रहे भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

इसके अतिरिक्त संगठन ने पोस्टल अकाउंट के विकेंद्रीकरण पर रोक लगाने, भूतपूर्व सैनिक कोटे से भर्ती कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों का शीघ्र निराकरण करने, वर्तमान एनडीसी/आईडीसी डिलीवरी प्रणाली को समाप्त कर पुरानी डाक वितरण व्यवस्था बहाल करने तथा आगामी 17 दिसंबर को राष्ट्रीय श्रम दिवस घोषित करने की भी मांग उठाई है।

संघ का कहना है कि यदि सरकार और विभागीय प्रशासन कर्मचारियों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर उचित निर्णय नहीं लेते हैं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। संगठन ने सभी कर्मचारियों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।

वहीं डाक विभाग की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आंदोलन की आगामी गतिविधियों पर कर्मचारियों और आम नागरिकों की निगाहें बनी हुई हैं।

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