जयपुर में मां की हत्या की कथित साजिश का सनसनीखेज खुलासा,बेटी समेत कई आरोपी गिरफ्तार।
अनुकंपा नियुक्ति,करोड़ों की संपत्ति और नौकरी के कथित लालच में रची गई साजिश,सड़क हादसे का रूप देकर हत्या का आरोप,सीसीटीवी फुटेज और पुलिस जांच से खुलीं परतें।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
कहते हैं,मां की पूरी दुनिया उसके बच्चे होते हैं। वह अपने हिस्से की खुशियां छोड़ सकती है, लेकिन अपने बच्चों का भविष्य कभी नहीं छोड़ती। जीवन की हर कठिनाई को मुस्कुराकर सहने वाली मां अपने परिवार को संवारने के लिए हर संघर्ष करती है। लेकिन जब उसी मां के खिलाफ उसके अपने ही कथित रूप से साजिश रच दें, तो यह केवल एक अपराध नहीं बल्कि रिश्तों और इंसानियत दोनों को झकझोर देने वाली घटना बन जाती है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर से सामने आया ऐसा ही एक मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस के अनुसार, यह मामला केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या की कथित साजिश है, जिसकी परतें एक-एक कर जांच के दौरान खुलती चली गईं।
पुलिस के अनुसार, कोर्ट कर्मचारी विजय शर्मा के निधन के बाद उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार में पत्नी निरजा शर्मा, बेटी आयुषी शर्मा और मानसिक रूप से दिव्यांग बेटा था। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए शासन के नियमों के तहत अनुकंपा नियुक्ति का अवसर मिला। पुलिस का कहना है कि दिव्यांग बेटे की देखभाल को ध्यान में रखते हुए निरजा शर्मा ने स्वयं यह नौकरी स्वीकार कर ली और परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली।
पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक की बेटी आयुषी शर्मा इस फैसले से संतुष्ट नहीं थी। वह चाहती थी कि अनुकंपा नियुक्ति उसे मिले। पुलिस के अनुसार, इसी बात को लेकर परिवार में मतभेद बढ़ने लगे और बाद में आयुषी पुराने घर में रहने लगी। इसी दौरान वह अपने चचेरे भाई बलराम के साथ एलएलबी की पढ़ाई भी कर रही थी।
जांच अधिकारियों का दावा है कि इसी दौरान निरजा शर्मा को रास्ते से हटाने की कथित योजना बनाई गई। पुलिस के अनुसार, आरोपियों को करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन और भविष्य में मिलने वाले लाभ का लालच दिया गया। पुलिस का कहना है कि योजना यह थी कि मां की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति और संपत्ति दोनों का लाभ आयुषी को मिल सके।
पुलिस के मुताबिक, हत्या की पहली कोशिश लगभग एक माह पहले की गई थी। आरोप है कि एक थार वाहन से निरजा शर्मा को कुचलने का प्रयास किया गया, लेकिन वह बाल-बाल बच गईं। इस घटना के बाद उन्हें अपनी जान को खतरे का अंदेशा हो गया। उन्होंने अपने भाई को पूरी घटना की जानकारी दी, घर से निकलना कम कर दिया और सुरक्षा के लिए अपने घर पर चार सीसीटीवी कैमरे भी लगवा दिए।
पुलिस का कहना है कि पहली कोशिश असफल होने के बाद आरोपियों ने निरजा शर्मा को घर से बाहर निकालने के लिए नए-नए तरीके अपनाए। जांच के अनुसार, घर के बाहर नींबू-मिर्च और लाल रंग फेंका जाने लगा ताकि वह डरकर बाहर निकलें, लेकिन वह लगातार सतर्क बनी रहीं।
पुलिस के अनुसार, इसके बाद भरतपुर निवासी हेमंत शर्मा से संपर्क किया गया। करीब सात लाख रुपये में कथित तौर पर सौदा तय हुआ। वारदात को अंजाम देने के लिए हरियाणा नंबर की एक स्कॉर्पियो किराये पर ली गई। अलग-अलग लोगों को रेकी करने, वाहन उपलब्ध कराने और पूरी योजना को अंजाम देने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
पुलिस के अनुसार, 4 जुलाई को निरजा शर्मा अपने दिव्यांग बेटे को फिजियोथेरेपिस्ट के पास लेकर गई थीं। इसी दौरान कथित तौर पर आयुषी शर्मा ने उन्हें किसी जरूरी काम का बहाना बनाकर वापस घर बुलाया। रास्ते में पहले से मौजूद लोगों ने स्कॉर्पियो सवार आरोपियों को संकेत दिया। आरोप है कि तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने सड़क किनारे पैदल चल रही निरजा शर्मा को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वह लगभग 100 मीटर दूर जा गिरीं और गंभीर चोटों के कारण उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद आयुषी शर्मा ने रोते हुए अपने मामा को फोन कर बताया कि उनकी मां का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया है। परिजन मौके पर पहुंचे और अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगे। हालांकि मृतका के भाई को अपनी भांजी के व्यवहार पर संदेह हुआ। उन्होंने पुलिस से केवल इतना कहा कि दुर्घटना की निष्पक्ष जांच की जाए। यही एक संदेह पूरे मामले की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।
इसके बाद पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जांच में सामने आया कि निरजा शर्मा सड़क के बिल्कुल किनारे पैदल चल रही थीं, जबकि सड़क लगभग खाली थी। फुटेज में कुछ दूरी पर पहले से खड़ी एक स्कॉर्पियो और दो संदिग्ध युवक भी दिखाई दिए। हादसे के बाद वाहन बिना रुके आगे बढ़ गया और आरोपी कथित रूप से कुछ दूरी पर मोटरसाइकिल के जरिए फरार हो गए।
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध स्कॉर्पियो की पहचान की। बाद में क्षतिग्रस्त वाहन बरामद कर उसके मालिक से पूछताछ की गई। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर एक-एक कर पूरी कथित साजिश का खुलासा होता गया।
पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान हत्या की योजना, रेकी, वाहन की व्यवस्था और कथित साजिश से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। एक आरोपी अब भी फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मामले की अंतिम सच्चाई न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। हालांकि प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है और इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या संपत्ति और नौकरी का लालच इंसान को अपने ही रिश्तों के खिलाफ खड़ा कर सकता है।

