बाकल में अघोषित बिजली कटौती पर ग्रामीणों का फूटा आक्रोश,10 दिन में व्यवस्था नहीं सुधरी तो होगा आंदोलन।
रातभर की बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों ने कनिष्ठ अभियंता को सौंपा ज्ञापन,विद्युत विभाग पर मनमानी का लगाया आरोप।
बाकल। बाकल एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। लंबे समय से रात के समय बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली आपूर्ति बंद किए जाने से परेशान ग्रामीणों ने सोमवार को बाकल विद्युत वितरण केंद्र पहुंचकर कनिष्ठ अभियंता को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग पर मनमानीपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि आगामी 10 दिनों के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो क्षेत्रवासी व्यापक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से प्रतिदिन रात के समय कई-कई घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित की जा रही है। अघोषित कटौती के कारण आमजन का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। उमस भरी गर्मी में लोगों को पूरी रात जागकर बितानी पड़ रही है, वहीं छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। किसान भी सिंचाई कार्य समय पर नहीं कर पा रहे हैं, जिससे कृषि कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। वहीं बिजली आधारित छोटे व्यवसाय भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा न तो कटौती की पूर्व सूचना दी जाती है और न ही बिजली बंद होने का कोई स्पष्ट कारण बताया जाता है।
ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने मांग की कि क्षेत्र में नियमित एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। यदि किसी तकनीकी कारण से बिजली बंद करना आवश्यक हो तो उसकी पूर्व सूचना उपभोक्ताओं तक पहुंचाई जाए, ताकि लोग अपनी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से कर सकें। साथ ही विद्युत वितरण व्यवस्था में सुधार कर अनावश्यक एवं मनमानी कटौती पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की गई।
यह ज्ञापन बाकल मंडल अध्यक्ष डॉ. पीयूष अग्रवाल के नेतृत्व में सौंपा गया। इस दौरान किसान पटेल, भगवान दास पटेल, अर्जुन सिंह, सूरत पटेल, निलेश अग्रवाल, बबलू राय, राजाराम पटेल, कृष्ण कुमार लोधी, जितेंद्र सिंह चंदेल, शंकर चक्रवर्ती, राजू ठाकुर, वीरेंद्र पटेल, सतेंद्र कुमार, गुड्डू वंशकार सहित बड़ी संख्या में मंगेला, पटोरी, राजा सलैया, खमतरा, इमलिया, रतनपुरा, कुम्हरावरा, आगोध एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिक उपस्थित रहे।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे बिजली विभाग के साथ टकराव नहीं चाहते, बल्कि केवल नियमित और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति की अपेक्षा रखते हैं। उनका कहना है कि यदि निर्धारित 10 दिनों के भीतर अघोषित बिजली कटौती की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो क्षेत्र के सभी ग्रामीण एकजुट होकर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी विद्युत विभाग की होगी।
ग्रामीणों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती केवल असुविधा का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और दैनिक जीवन से जुड़ा गंभीर जनहित का मुद्दा बन चुकी है। अब सभी की निगाहें विद्युत विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं कि विभाग ग्रामीणों की मांगों पर कितना गंभीरता से अमल करता है।


