नौतपा की अग्नि परीक्षा में तप की ज्योति,कलहरा धाम में आचार्य हनुमान प्रसाद पाण्डेय की साधना से उमड़ रही आस्था।
43 डिग्री की भीषण गर्मी में दोपहर 12 से 4 बजे तक अग्नि तप कर रहे आचार्य,श्रद्धालुओं के लिए बने भक्ति,त्याग और संकल्प के प्रेरणास्रोत।
विजयराघवगढ़,ग्रामीण खबर MP।
नौतपा की भीषण गर्मी जहां आम जनजीवन को प्रभावित कर रही है, वहीं कटनी जिले के विजयराघवगढ़ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कलहरा स्थित महावीर स्वामी हनुमान जी मंदिर इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा, श्रद्धा और तपस्या का केंद्र बना हुआ है। नौतपा के दौरान पड़ रही लगभग 43 डिग्री सेल्सियस की प्रचंड गर्मी के बीच आचार्य श्री हनुमान प्रसाद पाण्डेय द्वारा किया जा रहा अग्नि तप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण, प्रेरणा और आस्था का विषय बन गया है।
प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक चलने वाली यह कठोर साधना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। जब लोग तेज धूप और गर्म हवाओं से बचने के लिए घरों और छायादार स्थानों का सहारा ले रहे हैं, तब आचार्य श्री हनुमान प्रसाद पाण्डेय अग्नि के मध्य बैठकर तपस्या कर रहे हैं। उनकी यह साधना केवल शारीरिक सहनशक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना, आत्मसंयम और ईश्वर के प्रति समर्पण की एक अद्भुत मिसाल मानी जा रही है।
महावीर स्वामी हनुमान जी मंदिर परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। दूर-दूर के गांवों एवं कस्बों से लोग इस अनूठी तपस्या के दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि नौतपा की भीषण गर्मी में भी जिस प्रकार आचार्य जी अडिग भाव से तप कर रहे हैं, वह धर्म और साधना के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है। उनके तप से लोगों के मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव और अधिक प्रबल हो रहा है।
मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक गतिविधियों का क्रम प्रारंभ हो जाता है। भगवान हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना, सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। पूरा वातावरण भक्तिमय स्वर और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहता है। श्रद्धालु न केवल तपस्या के दर्शन कर रहे हैं, बल्कि धर्म लाभ प्राप्त करने के साथ-साथ अपने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थनाएं भी कर रहे हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि कलहरा धाम वर्षों से धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है, लेकिन इस बार नौतपा के दौरान आयोजित अग्नि तप ने इसे विशेष पहचान दिलाई है। आसपास के क्षेत्रों में भी इस तपस्या की चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में जब भौतिकता और भागदौड़ ने जीवन को प्रभावित कर दिया है, तब ऐसी साधनाएं समाज को आध्यात्मिक मूल्यों की ओर लौटने का संदेश देती हैं।
धर्मशास्त्रों में नौतपा के दौरान तप और साधना को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इस काल में किया गया जप, तप और ध्यान विशेष फलदायी होता है तथा साधक की आत्मिक शक्ति को बढ़ाता है। आचार्य श्री हनुमान प्रसाद पाण्डेय की साधना भी इसी आध्यात्मिक परंपरा का निर्वहन कर रही है। उनकी तपस्या लोगों को यह संदेश दे रही है कि कठिन परिस्थितियों में भी यदि मनुष्य का संकल्प दृढ़ हो तो वह अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर सकता है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि आचार्य जी के तप के दर्शन मात्र से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। कई लोग इसे आत्मबल, संयम और त्याग का जीवंत उदाहरण मान रहे हैं। मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिससे यह स्थान क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है।
नौतपा की तपती दोपहर में अग्नि के मध्य बैठकर की जा रही यह साधना न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह समाज को धैर्य, अनुशासन, संयम और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का संदेश भी दे रही है। कलहरा धाम में जल रही तप की यह ज्योति श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति और विश्वास का प्रकाश फैलाने का कार्य कर रही है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि ऐसी साधनाएं भारतीय सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और आने वाली पीढ़ियों को धर्म, संस्कार और आध्यात्मिकता के प्रति प्रेरित करती हैं।

