इंदौर के चंदन नगर थाने का हेड कांस्टेबल दुष्कर्म व ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तार,न्यायालय ने भेजा जेल।
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत की जांच के दौरान महिला से संपर्क का आरोप,वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का भी आरोप,पुलिस जांच के बाद हुई गिरफ्तारी।
इंदौर। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से पुलिस विभाग को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। चंदन नगर थाना में पदस्थ प्रधान आरक्षक (हेड कांस्टेबल) अंचल तिवारी को एक महिला से दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। घटना के सामने आने के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि उसने पूर्व में अपनी एक समस्या को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत की जांच के सिलसिले में उसकी मुलाकात चंदन नगर थाने में पदस्थ हेड कांस्टेबल अंचल तिवारी से हुई। आरोप है कि जांच के दौरान आरोपी पुलिसकर्मी ने महिला का विश्वास जीत लिया और इसी दौरान उसके साथ दुष्कर्म किया।
महिला का यह भी आरोप है कि आरोपी ने घटना का वीडियो बना लिया और उसी वीडियो के आधार पर उसे लगातार ब्लैकमेल करता रहा। शिकायत के अनुसार आरोपी लंबे समय तक महिला को धमकाता रहा, जिसके कारण वह मानसिक तनाव में रही और लंबे समय तक किसी को घटना की जानकारी नहीं दे सकी।
बताया जा रहा है कि जब महिला पर मानसिक दबाव बढ़ गया तो उसने पूरी घटना अपने पति को बताई। इसके बाद दोनों ने पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई।
प्रारंभिक जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर पाए जाने के बाद आरोपी हेड कांस्टेबल को पहले लाइन अटैच किया गया। इसके बाद उसके विरुद्ध दुष्कर्म सहित अन्य संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से न्यायालय ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जांच के दौरान प्राप्त होने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और आम नागरिकों के विश्वास को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने और लोगों को न्याय दिलाने का दायित्व निभाती है, वहीं यदि पुलिस विभाग का कोई कर्मचारी स्वयं गंभीर आपराधिक आरोपों के घेरे में आता है तो इससे विभाग की छवि भी प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच तथा दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।
उल्लेखनीय है कि आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही होगी।


