वीडियो क्रिएटर अंकित पटेल से कथित मारपीट मामले ने पकड़ा तूल,न्याय की मांग को लेकर कलाकारों और समाजजनों का प्रदर्शन,एसपी को सौंपा ज्ञापन।
कलाकारों ने उठाए निष्पक्ष जांच और जवाबदेही के सवाल,कहा-एक कलाकार के साथ अन्याय पूरे रचनात्मक समाज के सम्मान पर आघात,दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी।
रीवा,ग्रामीण खबर MP।
वीडियो क्रिएटर और कलाकार अंकित पटेल के साथ कथित मारपीट एवं अभद्र व्यवहार के मामले ने अब व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक बहस का रूप ले लिया है। घटना के विरोध में विभिन्न कलाकारों, सामाजिक संगठनों, युवाओं तथा समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने एकजुट होकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कलाकार अंकित पटेल के साथ अनुचित व्यवहार किया गया तथा उन्हें कथित रूप से प्रताड़ित किया गया, जिससे कलाकार समुदाय में गहरा रोष व्याप्त है।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे लोगों ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह उन सभी कलाकारों, पत्रकारों, वीडियो क्रिएटर्स और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जुड़े लोगों की चिंता का विषय है, जो समाज की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए ताकि सत्य सामने आ सके और किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दो दिन पूर्व अंकित पटेल अपने साथी मनीष के साथ एक स्थान पर पहुंचे थे, जहां वे बाहर से वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान उनके विरुद्ध धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई। घटना के बाद यह मामला धीरे-धीरे चर्चा का विषय बन गया और सोशल मीडिया सहित स्थानीय स्तर पर लोगों ने विभिन्न सवाल उठाने शुरू कर दिए। कलाकारों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक क्षेत्र में वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा है और वह किसी कानून का उल्लंघन नहीं कर रहा, तो उसके साथ कठोर या अपमानजनक व्यवहार उचित नहीं कहा जा सकता।
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि सिविल लाइन थाना क्षेत्र में अंकित पटेल के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया तथा उनके साथ मारपीट की गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है, लेकिन घटना को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में चिंता और असंतोष का माहौल देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा अधिकारों का दुरुपयोग किया गया है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होना आवश्यक है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जिस समय अंकित पटेल वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे, उस दौरान अन्य लोग भी अपने मोबाइल फोन से वीडियो बना रहे थे, लेकिन कार्रवाई केवल उनके विरुद्ध की गई। इस तथ्य को आधार बनाकर प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार का नियम उल्लंघन हुआ था, तो समान परिस्थिति में मौजूद सभी लोगों के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए था। केवल एक व्यक्ति को लक्ष्य बनाना कई तरह की आशंकाओं को जन्म देता है।
कलाकारों ने कहा कि आधुनिक दौर में डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और वीडियो कंटेंट समाज की आवाज बन चुके हैं। हजारों युवा वीडियो निर्माण, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक विषयों पर जनजागरूकता फैलाने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे समय में यदि किसी कलाकार या कंटेंट क्रिएटर को अपने कार्य के दौरान भय, दबाव या उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, तो यह रचनात्मक स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय बन जाता है।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे कलाकारों ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी बात रखने, सामाजिक गतिविधियों को रिकॉर्ड करने और जनहित के मुद्दों को सामने लाने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि कानून का सम्मान सभी को करना चाहिए, लेकिन कानून के नाम पर किसी व्यक्ति की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाना भी स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि कलाकार समाज का दर्पण होते हैं। वे अपनी कला, अभिनय, संगीत, लेखन, वीडियो निर्माण और अन्य रचनात्मक माध्यमों से समाज की वास्तविकताओं को सामने लाने का कार्य करते हैं। ऐसे लोगों को प्रोत्साहन और संरक्षण मिलना चाहिए, ताकि वे स्वतंत्र रूप से अपने विचारों और रचनात्मकता को अभिव्यक्त कर सकें। यदि कलाकार स्वयं असुरक्षित महसूस करेंगे, तो समाज की रचनात्मक ऊर्जा भी प्रभावित होगी।
ज्ञापन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज अंकित पटेल के साथ जो हुआ है, वह भविष्य में किसी अन्य कलाकार, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता या सामान्य नागरिक के साथ भी हो सकता है। इसलिए यह आवश्यक है कि इस मामले को केवल एक व्यक्ति से जुड़ा प्रकरण मानकर न देखा जाए, बल्कि इसे नागरिक अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही के दृष्टिकोण से भी समझा जाए। उन्होंने कहा कि न्याय और निष्पक्षता लोकतंत्र की आधारशिला हैं और इन्हें किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं होने दिया जा सकता।
कलाकारों और समाजजनों ने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जाए। यदि जांच में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही अंकित पटेल को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
ज्ञापन सौंपने के दौरान उपस्थित लोगों ने यह भी कहा कि वे कानून और प्रशासन का सम्मान करते हैं तथा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। उनका उद्देश्य किसी संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि एक ऐसे मामले में न्याय की मांग करना है जिसने कलाकार समुदाय को झकझोर कर रख दिया है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों, कलाकार समूहों और युवाओं को भी साथ जोड़ने की रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि न्याय मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा और वे लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। कलाकार समुदाय, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की निगाहें अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। सभी को उम्मीद है कि संबंधित पक्षों के तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच होगी तथा जो भी सत्य होगा, उसे सार्वजनिक रूप से सामने लाया जाएगा। वहीं कलाकारों और समाजजनों का कहना है कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि वह होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए, ताकि आम नागरिकों का विश्वास व्यवस्था में बना रहे और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

