ट्विशा शर्मा मौत मामला,80 किलो के पुतले से होगा सीन रिक्रिएशन,सीबीआई वैज्ञानिक जांच के जरिए तलाशेगी मौत की गुत्थी का सच।

 ट्विशा शर्मा मौत मामला,80 किलो के पुतले से होगा सीन रिक्रिएशन,सीबीआई वैज्ञानिक जांच के जरिए तलाशेगी मौत की गुत्थी का सच।

समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को घटनास्थल पर ले जाकर दोहराया जाएगा पूरा घटनाक्रम,बेल्ट की मजबूती,फंदे की स्थिति और बयानों की होगी गहन पड़ताल।

भोपाल,ग्रामीण खबर MP।

राजधानी भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच लगातार नए चरण में पहुंच रही है। मामले में सामने आए विभिन्न दावों, आरोपों और परिस्थितियों के बीच अब जांच एजेंसी ने घटनास्थल पर पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण करने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया को जांच की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके माध्यम से सीबीआई यह समझने का प्रयास करेगी कि 12 मई की रात घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ था और आरोपियों द्वारा बताए गए घटनाक्रम में कितनी वास्तविकता है।

सूत्रों के अनुसार सीबीआई करीब 80 किलो वजन वाले डमी पुतले का उपयोग करते हुए सीन रिक्रिएशन करेगी। इस दौरान मृतका ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह को भी घटनास्थल पर मौजूद रखा जाएगा। जांच एजेंसी दोनों से यह प्रदर्शित करवाएगी कि जिस प्रकार का घटनाक्रम उन्होंने पूछताछ के दौरान बताया है, वह व्यवहारिक और वैज्ञानिक दृष्टि से संभव था या नहीं। इस प्रक्रिया के दौरान फोरेंसिक विशेषज्ञ, वीडियोग्राफी टीम और जांच अधिकारी मौजूद रहेंगे ताकि प्रत्येक गतिविधि का सूक्ष्म निरीक्षण किया जा सके।

मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान समर्थ सिंह ने दावा किया था कि उन्होंने फंदे से लटकी हुई ट्विशा शर्मा को नीचे उतारा था। वहीं गिरिबाला सिंह का कहना था कि उन्होंने गले में बंधी गांठ को खोला था। अब सीबीआई इन दोनों दावों की सत्यता को परखना चाहती है। इसके लिए उसी स्थान पर पूरा घटनाक्रम दोबारा दोहराया जाएगा जहां ट्विशा शर्मा मृत अवस्था में मिली थीं। जांच एजेंसी यह देखेगी कि क्या आरोपियों द्वारा बताए गए तरीके से किसी व्यक्ति को फंदे से नीचे उतारना संभव था और क्या घटनास्थल की परिस्थितियां उनके बयानों से मेल खाती हैं।

जांच के दौरान जिस डमी पुतले का उपयोग किया जाएगा उसका वजन लगभग 80 किलो रखा गया है। फोरेंसिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी व्यक्ति के शरीर को फंदे से नीचे उतारने की प्रक्रिया में शारीरिक क्षमता, स्थान की संरचना, फंदे की ऊंचाई और उपयोग की गई सामग्री की मजबूती जैसे कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए सीन रिक्रिएशन के दौरान इन सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों का उद्देश्य केवल घटनाक्रम को दोहराना नहीं बल्कि यह समझना भी है कि आरोपियों के बयान व्यावहारिक रूप से कितने विश्वसनीय हैं।

सीबीआई उस बेल्ट की भी जांच कर रही है जिसके बारे में कहा गया है कि उसका उपयोग फांसी लगाने में किया गया था। फोरेंसिक विशेषज्ञ बेल्ट की संरचना, उसकी मजबूती और भार वहन क्षमता का परीक्षण करेंगे। यह देखा जाएगा कि क्या वह बेल्ट वास्तव में इतने वजन को संभाल सकती थी और क्या उसके उपयोग से वही परिस्थितियां निर्मित हो सकती थीं जिनका उल्लेख आरोपियों द्वारा किया गया है। यदि फोरेंसिक परीक्षण और घटनास्थल की वास्तविक परिस्थितियां आरोपियों के दावों से मेल नहीं खातीं तो जांच को नई दिशा मिल सकती है।

मामले की जांच केवल घटनास्थल तक सीमित नहीं है। सीबीआई विभिन्न तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों का भी विश्लेषण कर रही है। जांच एजेंसी मोबाइल फोन रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, डिजिटल डेटा, सोशल मीडिया गतिविधियों और घटनाक्रम से जुड़े अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक जांच तकनीकों की सहायता से उन तथ्यों तक पहुंचा जा सकता है जो सामान्य जांच के दौरान सामने नहीं आते।

ट्विशा शर्मा की मौत के बाद उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए थे। परिवार का आरोप है कि ट्विशा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था तथा दहेज को लेकर भी दबाव बनाया जाता था। हालांकि इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा, लेकिन सीबीआई परिवार द्वारा लगाए गए प्रत्येक आरोप की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। जांच एजेंसी इस बात का भी परीक्षण कर रही है कि मौत से पहले ट्विशा किन परिस्थितियों से गुजर रही थीं और क्या कोई ऐसा तथ्य मौजूद है जो घटना के कारणों को स्पष्ट कर सके।

सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान मृतका के शरीर पर मिले संभावित चोटों के निशानों को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। फोरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम से प्राप्त जानकारियों का विश्लेषण कर यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि चोटों की प्रकृति क्या थी और उनका संबंध घटना से किस प्रकार हो सकता है। इसके अतिरिक्त कथित गर्भावस्था से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है ताकि मामले के प्रत्येक आयाम को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके।

गौरतलब है कि हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसके बाद अदालत ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह दोनों को 2 जून तक सीबीआई हिरासत में भेज दिया। हिरासत अवधि के दौरान जांच एजेंसी दोनों से लगातार पूछताछ कर रही है। कई बार अलग-अलग और कई बार आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है ताकि बयानों में किसी प्रकार के विरोधाभास या असंगति का पता लगाया जा सके।

सीबीआई की विशेष टीम के साथ दिल्ली से आए फोरेंसिक विशेषज्ञ भी इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विशेषज्ञों ने पहले ही घटनास्थल का विस्तृत निरीक्षण किया है और अब सीन रिक्रिएशन को जांच की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि घटनास्थल पर वास्तविक परिस्थितियों को दोबारा निर्मित करने से उन सवालों के जवाब मिल सकते हैं जो अब तक केवल बयानों और दस्तावेजों के आधार पर ही जांचे जा रहे थे।

प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में चर्चित बने इस मामले पर आमजन, सामाजिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। हर नए घटनाक्रम के साथ मामले को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ती जा रही है। ऐसे में सीबीआई का यह वैज्ञानिक परीक्षण जांच के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीन रिक्रिएशन, फोरेंसिक साक्ष्य और आरोपियों के बयान एक-दूसरे से मेल खाते हैं तो जांच एक दिशा में आगे बढ़ेगी, जबकि किसी प्रकार का विरोधाभास सामने आने पर नए सवाल खड़े हो सकते हैं।

फिलहाल जांच एजेंसी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रत्येक तथ्य का वैज्ञानिक परीक्षण कर रही है। सीबीआई का उद्देश्य केवल आरोपों की पुष्टि या खंडन करना नहीं बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटना की वास्तविक परिस्थितियों को सामने लाना है। आगामी दिनों में होने वाला सीन रिक्रिएशन और उससे प्राप्त निष्कर्ष इस बहुचर्चित मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अब सभी की निगाहें सीबीआई की अगली कार्रवाई और जांच से सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हुई हैं, जिनसे ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ी गुत्थी सुलझने की उम्मीद जताई जा रही है।



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