पढ़ाई के साथ जिम्मेदारी और कौशल भी जरूरी,बच्चों को ‘मजबूत’ बनाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोर।

 पढ़ाई के साथ जिम्मेदारी और कौशल भी जरूरी,बच्चों को ‘मजबूत’ बनाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोर।

शिक्षा विभाग के कार्यक्रम में बोले मुख्यमंत्री-बच्चों का सर्वांगीण विकास केवल पुस्तकीय ज्ञान से नहीं,खेलकूद,अनुशासन और व्यावहारिक कार्यों से भी होता है,सोशल मीडिया पर वायरल बयान को लेकर छिड़ी चर्चा।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शिक्षा, बाल विकास और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिया गया एक वक्तव्य इन दिनों व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षा विभाग से संबंधित एक कार्यक्रम और सेमिनार को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के समग्र विकास के लिए केवल पुस्तकीय शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाने के लिए खेलकूद, अनुशासन, जिम्मेदारी, व्यवहारिक ज्ञान और कार्य संस्कृति से भी जोड़ना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री के संबोधन के कुछ अंश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद विभिन्न वर्गों में इस विषय पर बहस शुरू हो गई। किसी ने इसे बच्चों में जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता विकसित करने की दिशा में सकारात्मक संदेश बताया, तो कुछ लोगों ने इसे बाल अधिकारों और बाल श्रम से जोड़कर देखा। हालांकि मुख्यमंत्री के पूरे वक्तव्य का अध्ययन करने वाले शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि उनका मूल संदेश बच्चों के सर्वांगीण विकास और जीवन कौशल को बढ़ावा देने से संबंधित था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ऐसे नागरिक तैयार करना है जो जीवन के हर क्षेत्र में सक्षम, आत्मविश्वासी, अनुशासित और जिम्मेदार हों। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे केवल किताबों तक सीमित रह जाएंगे तो वे जीवन की वास्तविक परिस्थितियों का सामना करने में कठिनाई महसूस करेंगे। इसलिए आवश्यक है कि उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ व्यवहारिक अनुभव भी प्राप्त हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज समाज में एक प्रवृत्ति विकसित हो गई है, जिसमें बच्चों द्वारा किए जाने वाले हर छोटे कार्य को नकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाता है। जबकि वास्तविकता यह है कि बच्चों को छोटी-छोटी जिम्मेदारियां सौंपने से उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। उन्होंने कहा कि घर में अपने सामान को व्यवस्थित रखना, विद्यालय में स्वच्छता के प्रति जागरूक रहना, खेल गतिविधियों में भाग लेना और सामूहिक कार्यों में सहयोग करना बच्चों के व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि बच्चों को केवल सुविधाओं के बीच नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें जीवन के व्यावहारिक पक्षों से भी परिचित कराना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले के समय में माता-पिता बच्चों को छोटी-छोटी जिम्मेदारियां सौंपते थे, जिससे उनमें आत्मनिर्भरता का विकास होता था। विद्यालयों में भी शिक्षकों द्वारा अनुशासन, श्रम और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर विशेष बल दिया जाता था। यही कारण था कि बच्चे कम उम्र से ही जीवन की कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो जाते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलकूद और शारीरिक गतिविधियां बच्चों के विकास का अभिन्न हिस्सा हैं। खेल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं, बल्कि टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और निर्णय लेने की योग्यता भी विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों को केवल पढ़ाई के केंद्र के रूप में नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था भी अनुभव आधारित शिक्षण, कौशल विकास और व्यावहारिक ज्ञान पर विशेष बल देती है। आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को तकनीकी कौशल, समस्या समाधान क्षमता, रचनात्मक सोच और सामाजिक दायित्वों की समझ भी विकसित करनी होगी। यही गुण भविष्य में उन्हें सफल नागरिक बनाने में सहायक होंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बच्चों को स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक सेवा और सामाजिक जागरूकता जैसे कार्यक्रमों से जोड़ना चाहिए। ऐसे कार्यक्रमों से उनमें समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं बल्कि अच्छे नागरिक तैयार करना भी है।

वक्तव्य के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली में बच्चों को अत्यधिक संरक्षण देने की प्रवृत्ति बढ़ गई है, जिससे उनमें व्यवहारिक कौशल और आत्मनिर्भरता का विकास प्रभावित होता है। वहीं कुछ लोगों ने आशंका जताई कि बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य करवाने की अवधारणा को गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को जिम्मेदारी और जीवन कौशल सिखाना आवश्यक है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी स्थिति में बाल श्रम को प्रोत्साहन न मिले। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और अधिकार सर्वोच्च प्राथमिकता होने चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार घर और विद्यालय में दिए जाने वाले छोटे-छोटे जिम्मेदारी वाले कार्य तथा बाल श्रम के बीच स्पष्ट अंतर है। पहला बच्चों के व्यक्तित्व विकास का हिस्सा है जबकि दूसरा कानूनन अपराध और सामाजिक बुराई माना जाता है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्व में कई अवसरों पर बाल श्रम के खिलाफ अपनी स्पष्ट राय व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने बाल श्रम को सामाजिक अभिशाप बताते हुए बच्चों को शिक्षा और विकास के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया है। राज्य सरकार भी समय-समय पर ऐसे अभियान चलाती रही है जिनका उद्देश्य बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है।

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब देश में शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यवहारिक, कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख बनाने पर जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, नवाचार, कौशल प्रशिक्षण और अनुभव आधारित शिक्षण को विशेष महत्व दिया गया है।

फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान ने शिक्षा जगत, अभिभावकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों के बीच एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है। यह बहस इस बात पर केंद्रित है कि बच्चों के विकास में पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक अनुभव, जिम्मेदारी, अनुशासन और जीवन कौशल की क्या भूमिका होनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, संस्कार, खेलकूद, सामाजिक सहभागिता और व्यावहारिक अनुभवों के संतुलित समन्वय से ही ऐसे नागरिक तैयार किए जा सकते हैं जो भविष्य में स्वयं के साथ-साथ राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।यह संस्करण अखबार में प्रकाशित होने योग्य विस्तृत और संतुलित समाचार शैली में तैयार किया गया है।



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