बरही बाकल धान खरीदी केंद्र बना भ्रष्टाचार का अड्डा,नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाकर हो रही खरीदी।

 बरही बाकल धान खरीदी केंद्र बना भ्रष्टाचार का अड्डा,नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाकर हो रही खरीदी।

किसानों की बोरी से बिना जांच सीधे सरकारी बारदाने में धान,लेबर खर्च वसूली और दलालों का दबदबा उजागर।

बहोरीबंद,ग्रामीण खबर MP।

बहोरीबंद तहसील अंतर्गत बरही बाकल धान खरीदी केंद्र इन दिनों गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। शासन द्वारा किसानों की सुविधा और पारदर्शी धान खरीदी के उद्देश्य से बनाए गए नियमों को इस केंद्र पर खुलेआम नजरअंदाज किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह से मनमानी और भ्रष्टाचार से प्रभावित हो चुकी है, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों के अनुसार, धान खरीदी के दौरान गुणवत्ता जांच और तौल की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। शासन के नियमों के तहत धान की जांच हड़प्पा मशीन से की जानी चाहिए, ताकि नमी और गुणवत्ता का सही आकलन हो सके, लेकिन बरही बाकल केंद्र में इस मशीन का उपयोग ही नहीं किया जा रहा है। किसानों की बोरी से बिना किसी जांच के सीधे सरकारी बारदाने में धान पलटी जा रही है, जिससे खरीदी की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

किसानों ने यह भी आरोप लगाए हैं कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद लेबर और पल्लेदार की व्यवस्था खरीदी केंद्र प्रभारी द्वारा नहीं की जा रही है। नियमों के अनुसार किसान केवल धान का ढेर लगाएगा, इसके बाद समस्त व्यवस्था केंद्र प्रबंधन को करनी होती है, लेकिन यहां किसानों से ही लेबर का भुगतान कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि खरीदी प्रभारी बद्री पटेल द्वारा किसानों पर जबरन यह अतिरिक्त खर्च डलवाया जा रहा है, जो सीधे तौर पर शासन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

धान तौल प्रक्रिया को लेकर भी किसानों में भारी आक्रोश है। किसानों का कहना है कि तौल के समय न तो पारदर्शिता बरती जा रही है और न ही निर्धारित मानकों का ध्यान रखा जा रहा है। कई किसानों को समय पर तौल पर्ची नहीं दी जाती, जिससे उन्हें घंटों केंद्र पर भटकना पड़ता है। कभी मशीन खराब होने का बहाना तो कभी स्टाफ की कमी का हवाला देकर किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है।

केंद्र पर दलालों और विचौलियों की सक्रिय भूमिका भी सामने आ रही है। किसानों का आरोप है कि धान खरीदी का पूरा संचालन इन्हीं लोगों के इशारों पर हो रहा है। कमीशन के खेल के चलते नियमों को ताक पर रख दिया गया है और जिन किसानों की पहुंच दलालों तक है, उनका धान आसानी से खरीदा जा रहा है, जबकि सामान्य किसानों को बार-बार रोका-टोका जा रहा है।

यह भी गंभीर आरोप हैं कि खरीदी प्रभारी अक्सर घंटों केंद्र से बाहर रहते हैं, जिससे केंद्र की जिम्मेदारी पूरी तरह दलालों और अस्थायी कर्मचारियों के हाथों में चली जाती है। ऐसी स्थिति में न तो किसानों की शिकायतें सुनी जाती हैं और न ही किसी प्रकार की जवाबदेही तय होती है।

किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इस केंद्र की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो धान खरीदी में बड़े घोटाले की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन, खाद्य विभाग और जिला आपूर्ति अधिकारियों से मांग की है कि बरही बाकल धान खरीदी केंद्र में हो रही अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शी, नियमसम्मत एवं किसानहितैषी धान खरीदी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों का शोषण रोका जा सके।

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