स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय स्लिमनाबाद में मिट्टी परीक्षण नमूना लेने का प्रशिक्षण एवं प्रयोग प्रदर्शन।
जैविक खेती को बढ़ावा देने विद्यार्थियों को दी गई वैज्ञानिक तकनीकी जानकारी।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
मध्य प्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जैविक खेती के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत जिले के विभिन्न महाविद्यालयों में जैविक खेती का प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय, स्लिमनाबाद में जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे द्वारा विद्यार्थियों को मिट्टी परीक्षण हेतु नमूना लेने का प्रशिक्षण एवं प्रायोगिक प्रदर्शन कराया गया।
कार्यक्रम महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सरिता पांडे के मार्गदर्शन एवं उपस्थिति में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्र से हैं और कृषि कार्य से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। ऐसे में कम लागत पर अधिक उत्पादन प्राप्त कर कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। जीरो बजट फार्मिंग एवं जैविक खेती के माध्यम से ग्राम स्तर पर कृषकों को प्रशिक्षित कर बाजार पर निर्भरता कम करने तथा उपज के विक्रय से अधिक आय प्राप्त करने की दिशा में यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है।
मिट्टी परीक्षण के लिए नमूना लेने की वैज्ञानिक विधि बताते हुए बताया गया कि गेहूं की कटाई के बाद अप्रैल-मई माह में प्रति हेक्टेयर 15 से 20 स्थानों से मिट्टी के नमूने लिए जाने चाहिए। इसके लिए 6 से 9 इंच गहरा व्ही आकार का गड्ढा खोदकर प्रत्येक गड्ढे से ऊपर से नीचे की परत का लगभग 500 ग्राम मिट्टी निकाली जाती है। सभी गड्ढों से प्राप्त मिट्टी को अच्छी तरह मिलाकर उसमें से निर्धारित विधि अनुसार 500 ग्राम मिट्टी अलग की जाती है, जिसे नमूना पत्र के साथ मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जाता है।
प्रशिक्षण में यह भी जानकारी दी गई कि मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर प्रयोगशाला द्वारा दी गई सिफारिशों के अनुसार ही खाद एवं पोषक तत्वों का उपयोग करना चाहिए। मिट्टी परीक्षण से जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश तथा पीएच मान की जानकारी मिलती है, जिससे मिट्टी की अम्लीयता या क्षारीयता का पता चलता है। साथ ही विद्युत चालकता के माध्यम से मिट्टी में घुलनशील लवणों की स्थिति की भी जानकारी प्राप्त होती है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित हुआ और जैविक खेती को अपनाकर भविष्य में स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।




