पोषक तत्व एवं मिट्टी परीक्षण की दी गई तकनीकी जानकारी।

 पोषक तत्व एवं मिट्टी परीक्षण की दी गई तकनीकी जानकारी।

जैविक खेती प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को मिला व्यावहारिक ज्ञान।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ आत्मनिर्भर, स्वावलंबी एवं स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत वीरांगना रानी दुर्गावती शासकीय महाविद्यालय बहोरीबंद में जैविक खेती से संबंधित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों से अवगत कराते हुए उन्हें भविष्य में रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. इंद्र कुमार के मार्गदर्शन तथा प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. मंजू द्विवेदी के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिल रही है। प्रशिक्षण में जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे द्वारा कृषि से जुड़ी मूलभूत एवं तकनीकी जानकारियों को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समझाया जा रहा है।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान विद्यार्थियों को फसलों के समुचित विकास के लिए आवश्यक 17 प्रकार के पोषक तत्वों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञ द्वारा बताया गया कि पौधों की स्वस्थ वृद्धि एवं संतुलित उत्पादन के लिए इन सभी पोषक तत्वों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्यतः रासायनिक उर्वरकों में केवल दो या तीन प्रमुख पोषक तत्व ही उपलब्ध होते हैं, जबकि जैविक खादों में सूक्ष्म एवं प्रमुख सभी पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से विद्यमान रहते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता, संरचना एवं जल धारण क्षमता में निरंतर सुधार होता है।

मिट्टी परीक्षण की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया गया कि सफल खेती के लिए मिट्टी की वास्तविक स्थिति को जानना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए गर्मी के मौसम में गेहूं की कटाई के बाद खेत से प्रति हेक्टेयर 10 से 15 विभिन्न स्थानों से मिट्टी के नमूने एकत्र किए जाते हैं, ताकि संपूर्ण खेत की स्थिति का सही आकलन किया जा सके। निर्धारित विधि के अनुसार लगभग 500 ग्राम मिट्टी को साफ-सुथरे तरीके से नमूना पत्र के साथ मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जाता है।

प्रयोगशाला से प्राप्त परिणाम पत्रक के माध्यम से मिट्टी का पीएच मान, जैविक कार्बन की मात्रा, विद्युत चालकता, अम्लीयता, क्षारीयता के साथ-साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश की उपलब्धता की जानकारी प्राप्त होती है। इन परिणामों के आधार पर विशेषज्ञों द्वारा दी गई सिफारिशों के अनुसार ही फसलों में खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए, जिससे अनावश्यक खर्च से बचा जा सके और भूमि की सेहत भी बनी रहे।

मिट्टी परीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पौधों की वृद्धि एवं विकास के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्व संतुलित मात्रा में तथा उपलब्ध अवस्था में प्रदान किए जा सकें। साथ ही यह भी आवश्यक है कि भूमि किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव अथवा विषैले तत्वों से मुक्त रहे, जिससे दीर्घकालीन कृषि उत्पादन प्रभावित न हो।

प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को यह जानकारी भी दी गई कि खादों का उचित मात्रा में, उचित समय पर तथा उचित विधि से प्रयोग करने पर फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन दोनों में वृद्धि की जा सकती है। वैज्ञानिक ढंग से किए गए मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद प्रबंधन अपनाने से लागत कम होती है और अधिकतम उपज प्राप्त करना संभव होता है।

कार्यक्रम के अंत में मिट्टी परीक्षण हेतु मिट्टी का नमूना लेने की विधि का प्रयोगात्मक प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को现场 पर ही नमूना एकत्र करने की सही प्रक्रिया समझाई गई। इस व्यावहारिक प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ वास्तविक कृषि कार्यों की समझ विकसित करने का अवसर मिला, जो भविष्य में उनके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

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