विधायक संजय पाठक की पहल पर निर्माण एजेंसी बदली,जल संसाधन विभाग बाणसागर परियोजना से कराएगा 26 करोड़ का सुधार कार्य।
कुटेश्वर महानदी पुल के सुधार कार्य की दिशा में बड़ा कदम,जल्द शुरू होगा मरम्मत कार्य।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
बरही–मैहर मार्ग पर महानदी नदी पर बने कुटेश्वर पुल के सुधार कार्य को लेकर लंबे समय से बनी अनिश्चितता अब समाप्त होती नजर आ रही है। विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक के सतत प्रयासों और सक्रिय हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप शासन स्तर पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। पुल की मरम्मत एवं सुधार कार्य के लिए निर्माण एजेंसी बदले जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है, जिससे वर्षों से लंबित यह कार्य अब गति पकड़ने की संभावना बढ़ गई है।
मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग ने यह निर्णय लिया है कि कुटेश्वर महानदी पुल का सुधार कार्य अब लोक निर्माण विभाग के माध्यम से न कराते हुए जल संसाधन विभाग की बाणसागर परियोजना, आरडीसी शहडोल के जरिए कराया जाएगा। इस संबंध में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने विधायक संजय पाठक को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि पुल की मरम्मत और सुधार के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं तथा संबंधित अधिकारियों को कार्यवाही के लिए निर्देशित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि कुटेश्वर महानदी पुल का सुधार कार्य लगभग 26 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित है। इसके बावजूद पुल की जटिल संरचना और तकनीकी चुनौतियों के कारण अब तक तीन बार निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कोई ठेकेदार कार्य प्रारंभ नहीं कर सका। ठेकेदारों द्वारा कार्य छोड़ दिए जाने से क्षेत्रीय जनता में निराशा का माहौल बना हुआ था और आवागमन की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही थी।
मैहर को अमरकंटक से जोड़ने वाला यह मार्ग धार्मिक, पर्यटन और व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी मार्ग पर स्थित कुटेश्वर पुल पिछले तीन वर्षों से क्षतिग्रस्त अवस्था में है। तकनीकी जांच के दौरान यह पाया गया कि पुल के पियर क्रमांक 10 के डेक स्लैब के केंटिलीवर भाग में डिफ्लेक्शन उत्पन्न हो गया है। इसके कारण भारी वाहनों के गुजरने पर पुल में अत्यधिक कंपन होता है, जिससे किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसी कारण प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुल पर भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया था।
वर्तमान में पुल से केवल छोटे वाहनों को ही गुजरने की अनुमति दी गई है। भारी वाहनों के प्रतिबंध के कारण क्षेत्रीय जनता को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बस, ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, ट्रक और अन्य व्यावसायिक वाहनों का आवागमन बंद होने से न केवल यात्री परिवहन प्रभावित हुआ है, बल्कि कृषि कार्य, व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। किसानों को फसल परिवहन में अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं।
जनता की इस गंभीर समस्या को देखते हुए विधायक संजय पाठक ने लगातार इस मुद्दे को शासन के समक्ष उठाया। उन्होंने विधानसभा में भी कुटेश्वर पुल की जर्जर स्थिति और उससे हो रही परेशानियों को लेकर प्रश्न लगाए। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर के माध्यम से इंजीनियरों की एक टीम द्वारा पुल की तकनीकी जांच कराई गई, जिसके आधार पर सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए छोटे वाहनों के लिए पुल को आंशिक रूप से खोलने की अनुमति दी गई। हालांकि भारी वाहनों का प्रतिबंध यथावत बना रहा, जिससे समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो सका।
पिछले दो वर्षों में शासन स्तर पर पुल के सुधार कार्य को लेकर कई प्रयास किए गए। तीन बार निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद सेतु निर्माण निगम से जुड़े ठेकेदारों ने पुल की जटिल तकनीकी संरचना और विशेष इंजीनियरिंग आवश्यकता के कारण कार्य करने से असमर्थता जताई और काम छोड़ दिया। अधिकांश ठेकेदारों के पास इस प्रकार के जटिल पुलों के सुधार और मरम्मत का अनुभव न होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।
गौरतलब है कि कुटेश्वर महानदी पुल का मूल निर्माण जल संसाधन विभाग की बाणसागर परियोजना के अधिकारियों द्वारा किया गया था। उस समय पुल का निर्माण बाणसागर परियोजना की इंजीनियरिंग क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता के आधार पर हुआ था। बाद के वर्षों में प्रशासनिक व्यवस्था के तहत इस पुल को लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया। वर्तमान में उत्पन्न जटिल तकनीकी समस्याओं को देखते हुए यह महसूस किया गया कि पुल के मूल निर्माण से जुड़े अनुभवी इंजीनियरों की देखरेख में ही इसका सुधार कार्य प्रभावी ढंग से कराया जा सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए विधायक संजय पाठक ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से प्रत्यक्ष मुलाकात कर कुटेश्वर पुल की स्थिति से अवगत कराया और सुधार कार्य पुनः जल संसाधन विभाग की बाणसागर परियोजना के माध्यम से कराने की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने जनहित को प्राथमिकता देते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार किया, जिसके बाद विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
निर्माण एजेंसी बदले जाने के निर्णय से क्षेत्रीय जनता में उम्मीद जगी है कि अब कुटेश्वर महानदी पुल का सुधार कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा और लंबे समय से चली आ रही आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान निकल सकेगा। पुल के पूर्ण रूप से सुचारु हो जाने के बाद बरही–मैहर मार्ग पर यातायात व्यवस्था सामान्य होगी, जिससे धार्मिक यात्रियों, किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
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