ग्वालियर म्यूजिक यूनिवर्सिटी में रिजल्ट घोटाला,बिना परीक्षा दिए छात्र भी पास।
परीक्षा में अनुपस्थित छात्रों को दिए गए नंबर,डेटा से छेड़छाड़ उजागर होने पर प्रशासन ने चुपचाप बदले परिणाम।
ग्वालियर,ग्रामीण खबर MP।
राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में परीक्षा परिणामों को लेकर बड़ा और गंभीर घोटाला सामने आया है। विश्वविद्यालय में ऐसे छात्रों को भी पास दिखा दिया गया, जो संबंधित परीक्षाओं में उपस्थित ही नहीं हुए थे। जांच में सामने आया कि परीक्षा परिणामों के डेटा में जानबूझकर छेड़छाड़ कर गैरहाजिर छात्रों को अंक प्रदान किए गए, जिससे विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों, विशेषकर संगीत से जुड़े विषयों में घोषित किए गए परीक्षा परिणामों में कई ऐसे छात्र पाए गए, जिनके नाम उपस्थिति पत्रक में दर्ज ही नहीं थे, फिर भी उनके सामने अंक और पास का उल्लेख किया गया था। जब कुछ छात्रों और अभिभावकों ने अपने परिणामों की पड़ताल की, तो यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि परीक्षा में शामिल न होने के बावजूद उन्हें उत्तीर्ण घोषित कर दिया गया।
मामले के उजागर होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई सार्वजनिक सूचना या प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के बजाय चुपचाप वेबसाइट से पुराने परिणाम हटाकर संशोधित परिणाम अपलोड कर दिए। इस प्रक्रिया में न तो किसी जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय की गई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि डेटा से छेड़छाड़ किसके निर्देश पर और कैसे की गई।
सूत्रों की मानें तो यह पूरा खेल परीक्षा शाखा और गोपनीय विभाग से जुड़े कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से किया गया। परीक्षा परिणाम अपलोड करने से पहले उपस्थिति और मूल्यांकन से संबंधित दस्तावेजों का समुचित मिलान नहीं किया गया, जिससे फर्जी तरीके से अंक जोड़ने का रास्ता साफ हुआ। आरोप यह भी है कि कुछ छात्रों को जानबूझकर लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह हेराफेरी की गई।
इस मामले के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों को इधर-उधर स्थानांतरित कर दिया गया है, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ ठोस विभागीय जांच या दंडात्मक कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है। इससे छात्रों और अभिभावकों में रोष व्याप्त है और वे इसे मामले को दबाने की कोशिश मान रहे हैं।
शिक्षाविदों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल विश्वविद्यालय की साख को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि ईमानदारी से परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ भी अन्याय करती हैं। यदि बिना परीक्षा दिए ही छात्रों को पास किया जाएगा, तो शैक्षणिक योग्यता और डिग्री की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में इस तरह के घोटाले और बढ़ सकते हैं। साथ ही उन्होंने मांग की है कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और डिजिटल डेटा की स्वतंत्र ऑडिट कराई जाए।
फिलहाल यह मामला प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग तक पहुंच चुका है और अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन स्तर पर इस गंभीर परीक्षा घोटाले को लेकर क्या कार्रवाई की जाती है। विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और छात्रों के भविष्य को देखते हुए निष्पक्ष और कठोर जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
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