सिलौंडी और कछार गांव के जैन मंदिरों में श्रावकों की भक्ति,प्रवचनों से गूंजा धर्ममय वातावरण।

 सिलौंडी और कछार गांव के जैन मंदिरों में श्रावकों की भक्ति,प्रवचनों से गूंजा धर्ममय वातावरण।

दश धर्मों का महत्व,संस्कारों और समाज कल्याण पर दिया गया विशेष संदेश।

सिलौंडी,ग्रामीण खबर MP:

धर्म और आध्यात्मिकता की सुगंध इन दिनों सिलौंडी और आसपास के क्षेत्रों में विशेष रूप से फैल रही है। जैन धर्म की परंपरा और साधना का अनुपम संगम यहां के तीनों जैन मंदिरों और श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर, कछार गांव बड़ा में देखने को मिल रहा है। प्रतिदिन प्रातःकाल से ही श्रावक-श्राविकाएं मंदिर पहुंचकर अभिषेक, शांति धारा, पूजन, विधान और प्रवचनों में सम्मिलित होकर अपनी आत्मा को शुद्ध और पवित्र करने का प्रयास कर रहे हैं। वातावरण इतना शांत और भक्तिमय हो जाता है कि श्रद्धालु स्वयं को धर्ममय अनुभूति से भरपूर पाते हैं।

कछार गांव के मंदिर में ब्रह्मचारी भैया जी के मार्गदर्शन में पूरे विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं। वे समाज को अपने प्रवचनों में यह बता रहे हैं कि दश धर्म जीवन को उत्तम और अनुशासित बनाने की प्रेरणा देते हैं। क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य—ये दस धर्म न केवल आत्मा को शुद्ध करते हैं बल्कि सामाजिक जीवन को भी श्रेष्ठता की ओर ले जाते हैं। ब्रह्मचारी पारस भैया जी अपने मधुर और प्रेरणादायी शब्दों से समाज को यह संदेश दे रहे हैं कि जीवन की वास्तविक शांति और आनंद केवल धर्म के मार्ग पर चलने से ही प्राप्त हो सकता है।

इसी क्रम में सिलौंडी में पंडित प्रमोद जैन प्रतिदिन प्रवचनों का आयोजन कर रहे हैं। वे समाज को यह समझा रहे हैं कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक उत्तम पद्धति है। उनके प्रवचनों में यह बात प्रमुखता से सामने आती है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति धर्म के सिद्धांतों को अपनाए तो समाज में शांति, सहयोग और भाईचारे का वातावरण स्वतः निर्मित हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म से जुड़ना केवल आत्मिक शांति ही नहीं देता, बल्कि यह समाज कल्याण की दिशा में भी हमें अग्रसर करता है।

आयोजन में समाज के वरिष्ठजनों और प्रबुद्ध वर्ग की उपस्थिति ने पूरे कार्यक्रम की महत्ता को और अधिक बढ़ा दिया। सरपंच कैलाश चंद्र जैन, दादा प्रकाश चंद्र जैन, शीतल चंद्र जैन, सुभाष चंद्र जैन, कमलेश जैन, शैलेश जैन, आकाश जैन, सुधा जैन, नीरज जैन, दीपु जैन, विनोद जैन, संतोष जैन, देवेंद्र जैन, जितेंद्र जैन, अंकित जैन, अर्पित जैन, पीयूष जैन, श्रीवि जैन, श्रेयांश जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु लगातार उपस्थित रहकर धर्म लाभ ले रहे हैं।

विशेष रूप से बच्चों के संस्कार कराए गए, जिससे उनके जीवन में प्रारंभ से ही धार्मिक मूल्यों की स्थापना हो सके। साथ ही विवाहित जोड़ों का मौजी बंधन संस्कार भी हुआ, जो वैवाहिक जीवन में आपसी विश्वास, श्रद्धा और धार्मिकता की नींव को और मजबूत बनाता है। यह परंपरा न केवल सामाजिक जीवन में सामंजस्य लाती है बल्कि पारिवारिक रिश्तों को भी पवित्र और स्थायी बनाती है।

श्रावक-श्राविकाओं की भक्ति, बच्चों के संस्कार और समाज के लोगों की सक्रिय सहभागिता ने इन आयोजनों को और अधिक प्रभावशाली बना दिया है। वातावरण में भक्ति रस की धारा प्रवाहित हो रही है, जहां हर कोई आत्मा की शुद्धि और परमात्मा की शरण में जाने की प्रेरणा पा रहा है। धर्म, संस्कार और समाज सेवा का यह सुंदर संगम पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिकता और सकारात्मक ऊर्जा से आलोकित कर रहा है।

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