किसानों के गबन मामले में उबाल,ओबीसी महासभा सहित कई संगठनों ने थाना ढीमरखेड़ा का किया घेराव।
दो माह बाद भी गिरफ्तारी नहीं,आक्रोशित किसानों और संगठनों का प्रदर्शन,पुलिस पर संरक्षण के आरोप,प्रशासन ने दिया कार्रवाई का भरोसा।
ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।
कटनी जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र में किसानों के साथ कथित धोखाधड़ी और लाखों रुपये के गबन का मामला अब गंभीर जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज होने के बावजूद करीब दो महीने बीत जाने पर भी गिरफ्तारी नहीं होने से किसानों, सामाजिक संगठनों और आमजन में भारी रोष व्याप्त है। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर भी व्यापक बहस छेड़ दी है।
जानकारी के अनुसार, मनीष पांडे, दिलीप दुबे, मुकेश पटेल और मुकंदी पटेल पर किसानों के साथ सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी कर लाखों रुपये के गबन के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच की, जिसमें आरोपियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई और उनके खिलाफ विधिवत प्रकरण दर्ज किया गया। लेकिन इसके बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाना कई तरह के संदेहों को जन्म दे रहा है।
पीड़ित किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है। किसानों का आरोप है कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों के लिए यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि जीवन-मरण का प्रश्न बन गया है। उनकी मेहनत की कमाई गबन होने के बाद अब न्याय में हो रही देरी ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
स्थानीय नागरिकों और संगठनों का आरोप है कि पुलिस जानबूझकर मामले में ढिलाई बरत रही है और आरोपियों को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आरोपियों की गिरफ्तारी हो जाती, तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। लगातार देरी से लोगों का भरोसा पुलिस और प्रशासन दोनों से कमजोर होता जा रहा है।
इसी बढ़ते आक्रोश के बीच ओबीसी महासभा, अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन और राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से बड़ा कदम उठाते हुए थाना ढीमरखेड़ा का घेराव किया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आने वाले समय में जिला स्तर पर बड़े आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्याय में देरी, अन्याय के समान है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने थाना प्रभारी अभिषेक चौबे पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि उनके कार्यकाल के दौरान क्षेत्र में अपराधियों के हौसले बढ़े हैं और कई मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर सवाल उठे हैं। लोगों का यह भी कहना था कि जहां-जहां उनकी पदस्थापना रही है, वहां इस प्रकार की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन जनआक्रोश में इन बातों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
प्रदर्शन के बाद तहसीलदार ढीमरखेड़ा नितिन पटेल को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। तहसीलदार ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर जल्द से जल्द उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सभी की नजरें प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। क्षेत्र के किसान और सामाजिक संगठन यह देखना चाहते हैं कि क्या उन्हें वास्तव में न्याय मिल पाएगा या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह लंबित रह जाएगा। फिलहाल, ढीमरखेड़ा में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और लोगों में आक्रोश स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।




