आस्था का अनोखा संगम,सिलौंडी से मां वीरासन देवी मंदिर तक पैदल पहुंचे भक्त,90 मीटर लंबी चुनरी चढ़ाई।

 आस्था का अनोखा संगम,सिलौंडी से मां वीरासन देवी मंदिर तक पैदल पहुंचे भक्त,90 मीटर लंबी चुनरी चढ़ाई।

करीब 8 किलोमीटर की पदयात्रा,दंडवत यात्रा के साथ भक्तों ने जताई गहरी श्रद्धा,महाआरती के बाद प्रसाद वितरण।

सिलौंडी,ग्रामीण खबर MP।

क्षेत्र में आस्था,श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब सिलौंडी की इंदिरा आवास कॉलोनी से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मां वीरासन देवी मंदिर के लिए पदयात्रा पर निकले। लगभग 8 किलोमीटर की इस यात्रा में हर आयु वर्ग के महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग श्रद्धालु शामिल हुए, जिन्होंने पूरे मार्ग में भक्ति गीतों, जयकारों और माता के नाम के उद्घोष से वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।

सुबह से ही श्रद्धालुओं का समूह संगठित होकर यात्रा पर रवाना हुआ। मार्ग में जगह-जगह स्थानीय लोगों द्वारा यात्रियों का स्वागत किया गया, साथ ही जलपान एवं विश्राम की भी व्यवस्थाएं की गईं। इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और सभी भक्त माता के दरबार तक पहुंचने के लिए पूरी आस्था और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ते रहे।

इस धार्मिक यात्रा का मुख्य आकर्षण 90 मीटर लंबी चुनरी रही, जिसे भक्तजन विशेष रूप से माता को अर्पित करने के लिए अपने साथ लेकर चले। मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ मां वीरासन देवी को चुनरी अर्पित की और अपने परिवार, समाज एवं क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

यात्रा में शामिल कई श्रद्धालुओं ने दंडवत यात्रा करते हुए मंदिर तक पहुंचकर अपनी अटूट श्रद्धा और विश्वास का परिचय दिया। कठिन तपस्या के रूप में मानी जाने वाली इस दंडवत यात्रा को देखकर अन्य श्रद्धालु भी भावविभोर हो उठे। यह दृश्य पूरे आयोजन का सबसे भावनात्मक और प्रेरणादायक क्षण रहा।

मंदिर परिसर पहुंचने के बाद विधिवत पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया, जिसमें पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजन संपन्न कराया गया। इसके पश्चात भव्य महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु एक साथ शामिल हुए और मां के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।

महाआरती के उपरांत प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर अपने आपको धन्य महसूस किया। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, सहयोग और धार्मिक उत्साह का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

स्थानीय ग्रामीणों और आयोजकों का कहना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन न केवल आस्था को सशक्त करते हैं, बल्कि समाज में एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूती प्रदान करते हैं। आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय समिति, युवाओं एवं ग्रामीणों का विशेष योगदान रहा।

पूरे कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और हर ओर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का माहौल देखने को मिला। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक समरसता और जनसहभागिता का भी उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया।

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