मां वीरासन देवी मंदिर में भक्ति की गूंज,भजन संध्या में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब।
चैत्र नवरात्र पर प्रतिदिन आरती के बाद भजन-कीर्तन,विभिन्न मंडलियों के मधुर भजनों से भक्तिमय हुआ वातावरण।
सिलौंडी,ग्रामीण खबर MP।
ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत मां वीरासन देवी मंदिर में चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर इस वर्ष विशेष धार्मिक उत्साह और भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिल रहा है। नवरात्र के शुभारंभ से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की निरंतर भीड़ उमड़ रही है, जहां सुबह से लेकर देर रात्रि तक पूजा-अर्चना, दर्शन और धार्मिक कार्यक्रमों का क्रम जारी है। पूरे क्षेत्र में मां के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है, जिससे वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो गया है।
मंदिर में प्रतिदिन विधिवत पूजा-अर्चना और आरती के पश्चात भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में आसपास के ग्रामों से आई विभिन्न भजन मंडलियां अपनी-अपनी शैली में भक्ति गीतों की प्रस्तुति दे रही हैं। इन भजनों की मधुर धुनों और भावपूर्ण गायन से उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और देर रात तक भक्ति में लीन रहते हैं। जैसे-जैसे रात गहराती है, वैसे-वैसे भजनों का रस और अधिक गाढ़ा होता जाता है, जिससे मंदिर परिसर में एक अलौकिक आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हो जाता है।
नवरात्र के इन पावन दिनों में तिलमन, पाली, नेगाई और सिलौंडी सहित आसपास के अनेक ग्रामों की भजन मंडलियों ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। प्रत्येक मंडली ने अपनी विशिष्ट शैली और भक्ति भाव से भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे हर दिन का आयोजन विशेष और यादगार बनता जा रहा है। विगत रात्रि सिलौंडी की पाल भजन मंडली ने अपने सुमधुर, जोशीले और भावपूर्ण भजनों से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके गायन में भक्ति के साथ-साथ लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली, जिसने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया।
इस धार्मिक आयोजन में तिलमन के मुख्य पुजारी सौरभ दुबे की विशेष उपस्थिति रही, जिनके मार्गदर्शन में मंदिर की समस्त धार्मिक गतिविधियां सुचारू रूप से संपन्न हो रही हैं। इसके साथ ही गणेश बागरी की भजन मंडली, नेगाई के विक्की साहू, महेंद्र पाल, बलीराम गाडरी, संतोष पाल और संत पाल सिलौंडी सहित अनेक भजन गायकों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। सभी कलाकारों ने पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ भजनों का गायन किया, जिससे श्रोताओं के हृदय में भक्ति का भाव और अधिक प्रगाढ़ होता गया।
भजन संध्या के दौरान केवल संगीत ही नहीं, बल्कि सामूहिक भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम भी देखने को मिल रहा है। श्रद्धालु भजनों के साथ ताली बजाते हुए और जयकारे लगाते हुए भक्ति में डूब जाते हैं। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और युवा सभी वर्गों की सहभागिता इस आयोजन को और भी विशेष बना रही है। बच्चों में भी धार्मिक संस्कारों के प्रति उत्साह देखने को मिल रहा है, जो इस तरह के आयोजनों की सामाजिक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाता है।
धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक सेवा का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है। पंचमुखी सेवा न्यास और सेवा भारती के संयुक्त प्रयासों से प्रतिदिन दोपहर में विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इस भंडारे में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं सहित स्थानीय लोग बड़ी संख्या में प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। सेवा कार्य में लगे स्वयंसेवक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे हुए हैं, जिससे व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो रही है।
भंडारे के माध्यम से समाज में सेवा, सहयोग और परोपकार की भावना को बढ़ावा मिल रहा है। यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता का भी प्रतीक बन गया है। यहां सभी वर्गों के लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं, जो भारतीय संस्कृति की मूल भावना को दर्शाता है।
मां वीरासन देवी मंदिर में आयोजित यह संपूर्ण कार्यक्रम क्षेत्र के लिए आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं का एक जीवंत उदाहरण बनकर उभर रहा है। हर दिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि लोगों के हृदय में धार्मिक आस्था कितनी गहरी है। मंदिर परिसर में गूंजते भजनों, मां के जयकारों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति से ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरा क्षेत्र देवीमय हो गया हो।
इस प्रकार चैत्र नवरात्र के अवसर पर मां वीरासन देवी मंदिर में चल रहे भजन संध्या और भंडारा कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक वातावरण को सुदृढ़ किया है, बल्कि समाज में एकता, सेवा और भक्ति की भावना को भी नई ऊर्जा प्रदान की है। यह आयोजन आने वाले दिनों में भी इसी प्रकार श्रद्धालुओं को आकर्षित करता रहेगा और क्षेत्र की धार्मिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाएगा।
