अतरसुमा में भक्ति और उत्साह के साथ धूमधाम से मनाई गई भगवान विश्वकर्मा जयंती,गांव में दिनभर रहा धार्मिक माहौल।
भजन-कीर्तन, पूजन-अर्चन, शोभायात्रा और प्रसाद वितरण में शामिल हुए सैकड़ों श्रद्धालु, विश्वकर्मा समिती और स्थानीय नेतृत्व की रही प्रमुख भूमिका।
सिलौंडी,ग्रामीण खबर MP:
क्षेत्र के अतरसुमा गांव में मंगलवार को भगवान विश्वकर्मा जयंती बड़े ही हर्षोल्लास और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाई गई। सुबह से ही पूरे गांव का वातावरण भक्तिमय हो उठा। मंदिरों में घंटा-घड़ियाल की ध्वनि गूंजने लगी और ग्रामीण श्रद्धालु परिवार सहित भगवान विश्वकर्मा के दर्शन और पूजन-अर्चन के लिए पहुंचने लगे। ग्रामीणों ने श्रद्धा भाव से विधिविधानपूर्वक भगवान विश्वकर्मा की पूजा कर अपनी-अपनी समृद्धि, परिवार की खुशहाली और गांव के विकास की मंगलकामनाएं कीं।
भोर से ही मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। रंग-बिरंगे फूलों की झालरों और रोशनी से सजे मंदिर में जब भजन-कीर्तन आरंभ हुआ तो पूरा वातावरण भक्ति में डूब गया। महिलाएं मंगल गीत गाती रहीं और बच्चे उत्साहपूर्वक ढोलक-झांझ की थाप पर भजन गुनगुनाते रहे। गांव के युवाओं ने भी भक्ति संगीत की प्रस्तुति से माहौल को और भी जीवंत बना दिया।
पूजन-अर्चन के उपरांत दोपहर को शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। जगह-जगह शोभायात्रा का स्वागत किया गया और ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर भगवान विश्वकर्मा के जयकारे लगाए। पूरे गांव में इस दौरान धार्मिक उत्सव जैसा माहौल बन गया।
इस भव्य आयोजन में विश्वकर्मा समिती के पदाधिकारी सक्रिय रूप से शामिल रहे। वहीं भाजपा मंडल उपाध्यक्ष संतोष विश्वकर्मा, अन्नू पाल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने आपसी एकता और भाईचारे का संदेश दिया। समाज के वरिष्ठजनों ने इस अवसर पर कहा कि भगवान विश्वकर्मा सभी सृष्टि के रचयिता हैं और उनकी पूजा से जीवन में तरक्की, कार्यों में सफलता और समाज में समरसता का मार्ग प्रशस्त होता है।
पूरे दिन चले इस आयोजन में श्रद्धालु लगातार आते रहे। पूजन-अर्चन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी प्रसाद वितरण में सहयोग करते रहे। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे हर वर्ष इसी तरह सामाजिक एकता के साथ विश्वकर्मा जयंती का आयोजन करेंगे।
ग्रामीणों ने बताया कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से न केवल समाज में आपसी मेलजोल और भाईचारा बढ़ता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी परंपराओं और संस्कृति से जोड़ने का अवसर मिलता है। अतरसुमा गांव का यह आयोजन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा।
शाम होते-होते जब अंतिम भजन कीर्तन की गूंज गांव की गलियों में फैली तो श्रद्धालु भक्ति भाव से झूम उठे। कार्यक्रम का समापन सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। भक्तगण प्रसन्न मन और आस्था से परिपूर्ण हृदय लेकर अपने-अपने घरों की ओर लौटे।
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