भारत में तीन पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार, सुरक्षा एजेंसियों ने की बड़ी कार्रवाई।
हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में जासूसी मामलों का भंडाफोड़, आईएसआई से जुड़े तार सामने आये।
नई दिल्ली,ग्रामीण खबर mp:
भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने देश की सुरक्षा को कमजोर करने की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश करते हुए तीन अलग-अलग राज्यों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के लिए काम करने वाले तीन जासूसों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई दर्शाती है कि दुश्मन देश लगातार भारत की सुरक्षा और सामरिक संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने के प्रयास में सक्रिय है। हालाँकि भारत की खुफिया एजेंसियों की सतर्कता और सटीक कार्रवाई ने इन मंसूबों को असफल कर दिया है।
इन मामलों में पहली गिरफ्तारी हरियाणा से हुई, जहां एक लोकप्रिय यूट्यूबर और ट्रैवल व्लॉगर ज्योति मल्होत्रा को सुरक्षा एजेंसियों ने हिरासत में लिया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह पिछले कुछ महीनों से आईएसआई के एजेंट के संपर्क में थी और भारत की संवेदनशील जानकारी, जिनमें सीमावर्ती क्षेत्रों की गतिविधियाँ और सैन्य ठिकानों की सूचनाएँ शामिल हैं, पाकिस्तानी एजेंटों को भेज रही थी। जानकारी के अनुसार, उसने यह सूचनाएँ डिजिटल माध्यम से साझा कीं और इसके बदले में आर्थिक लाभ प्राप्त किया। उसकी हाल की लाहौर यात्रा और सोशल मीडिया गतिविधियाँ संदेहास्पद पाई गईं, जिसके आधार पर उसकी निगरानी की गई और फिर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
दूसरा मामला पंजाब के अमृतसर जिले से जुड़ा है, जहां पंजाब पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान पलक शेर मसीह और सूरज मसीह के रूप में हुई है। ये दोनों सीमावर्ती क्षेत्रों की तस्वीरें, सेना की गतिविधियों और एयरबेस से संबंधित जानकारियाँ पाकिस्तान भेज रहे थे। पुलिस की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि दोनों का संबंध अमृतसर सेंट्रल जेल में बंद हरप्रीत सिंह उर्फ पिट्टू से है, जो पहले भी पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोपों में जेल में है। दोनों आरोपियों को विदेशों से प्राप्त धनराशि के माध्यम से आर्थिक रूप से मदद दी जा रही थी। इनके पास से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं, जो जासूसी गतिविधियों को प्रमाणित करते हैं।
तीसरी बड़ी गिरफ्तारी राजस्थान के जैसलमेर जिले से हुई है, जहां इंटेलिजेंस एजेंसी ने पठान खान नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। 40 वर्षीय यह व्यक्ति लंबे समय से पाकिस्तान के संपर्क में था और भारत-पाक सीमा से सटे क्षेत्रों की गोपनीय जानकारी साझा करता रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में उसने स्वीकार किया है कि वह आईएसआई के इशारों पर काम कर रहा था और सीमावर्ती चौकियों, सैन्य मूवमेंट तथा ग्रामीण सुरक्षा पोस्टों से संबंधित जानकारियाँ पाकिस्तान भेजता था। उसके कब्जे से नक्शे, मोबाइल उपकरण, और संदिग्ध लेन-देन के विवरण प्राप्त हुए हैं, जो उसके जासूसी नेटवर्क की पुष्टि करते हैं।
इन तीनों मामलों में एक समानता यह है कि आरोपियों ने सामान्य नागरिकों की भूमिका में रहकर सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने का प्रयास किया। यह साफ दर्शाता है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी भारत में अपनी जासूसी गतिविधियाँ बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जिसमें सोशल मीडिया, यात्रा और डिजिटल भुगतान जैसे आधुनिक साधनों का उपयोग किया जा रहा है।
सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाएँ केवल एक चेतावनी हैं और इससे बड़ा नेटवर्क अभी भी सक्रिय हो सकता है। ऐसे में आवश्यक है कि सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्कता और निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करें। इसके साथ ही आम नागरिकों को भी सजग रहना होगा। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, गतिविधि या तकनीकी व्यवहार की जानकारी स्थानीय प्रशासन अथवा खुफिया एजेंसियों को तत्काल देनी चाहिए।
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत के विरुद्ध चल रहे गुप्त युद्ध में साइबर स्पेस, सोशल मीडिया और आम नागरिकों का इस्तेमाल करके भारत की सुरक्षा पर प्रहार किया जा रहा है। लेकिन भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ इन साजिशों को नाकाम करने में पूरी तरह सक्षम हैं और समय रहते की गई कार्रवाइयों ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि देश की सीमाएँ और आंतरिक सुरक्षा किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दी जाएगी।
इस तरह की गिरफ्तारियों से न केवल जासूसी गतिविधियों पर अंकुश लगता है, बल्कि समाज में सुरक्षा के प्रति विश्वास भी बढ़ता है। यह ज़रूरी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामलों में केवल सरकार ही नहीं, बल्कि हर नागरिक की भूमिका भी अहम हो। सतर्कता, जागरूकता और सहयोग से ही देश को सुरक्षित रखा जा सकता है।
