महर्षि महेश योगी जी की पुण्यतिथि पर वैदिक विश्वविद्यालय में श्रद्धा,साधना और शांति से ओतप्रोत गरिमामय आयोजन।

 महर्षि महेश योगी जी की पुण्यतिथि पर वैदिक विश्वविद्यालय में श्रद्धा,साधना और शांति से ओतप्रोत गरिमामय आयोजन।

सामूहिक ध्यान,मौन श्रद्धांजलि एवं पुष्पांजलि के माध्यम से स्मरण किए गए महर्षि जी के वैश्विक,आध्यात्मिक और शैक्षणिक अवदान।

करौदी,ग्रामीण खबर MP।

दिनांक 5 फरवरी 2026, गुरुवार को सायं 5 बजे ज्योतिषपीठोद्वारक ब्रह्मानंद सरस्वती शंकराचार्य महाराज जी के कृपापात्र, पूर्ण समर्पित शिष्य, महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के संस्थापक, प्रथम कुलाधिपति एवं वैज्ञानिक सिद्ध संत महर्षि महेश योगी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर माननीय कुलगुरु महोदय के निर्देशानुसार विश्वविद्यालय परिसर में एक अत्यंत गरिमामय श्रद्धांजलि एवं पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिवार ने एकत्र होकर महर्षि जी के प्रति अपनी श्रद्धा, कृतज्ञता एवं भावपूर्ण स्मरण अर्पित किया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ महर्षि महेश योगी जी के चित्र पर विधिवत माल्यार्पण एवं दीपदान के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन के उपरांत उपस्थित समस्त गुरुजनों, शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों द्वारा सामूहिक ध्यान किया गया, जिसके माध्यम से महर्षि जी द्वारा प्रदत्त भावातीत ध्यान पद्धति के महत्व को आत्मसात किया गया। तत्पश्चात मौन श्रद्धांजलि अर्पित कर महर्षि जी के वैश्विक, आध्यात्मिक, शैक्षणिक, सामाजिक एवं व्यवहारिक अवदानों का गहन भाव से स्मरण किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर पूर्णतः शांति, साधना, अनुशासन एवं आध्यात्मिक चेतना से अनुप्राणित दिखाई दिया।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए महर्षि जी के साथ लगभग 40 वर्षों तक कार्य करने का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ ध्यान एवं सिद्दी शिक्षक गिरिजा शंकर चौधरी ने अपने उद्बोधन में महर्षि महेश योगी के जीवन दर्शन, उनके द्वारा प्रवर्तित भावातीत ध्यान आंदोलन, विश्व शांति हेतु किए गए सतत प्रयासों तथा भारतीय वैदिक एवं आध्यात्मिक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित करने में उनके अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महर्षि महेश योगी केवल एक संत या आध्यात्मिक गुरु ही नहीं थे, बल्कि वे एक वैज्ञानिक दृष्टा, युगप्रवर्तक एवं मानव चेतना के सूक्ष्म रहस्यों के उद्घाटक थे।

गिरिजा शंकर चौधरी ने यह भी कहा कि आज के भौतिकतावादी, प्रतिस्पर्धात्मक एवं मानसिक तनाव से ग्रस्त समाज में महर्षि महेश योगी जी के विचार, उनका ध्यान दर्शन एवं जीवनशैली पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने भावातीत ध्यान को मानव जीवन में मानसिक संतुलन, आंतरिक शांति, सृजनात्मकता एवं समग्र विकास का सशक्त माध्यम बताया।

उन्होंने अपने उद्बोधन में यह उल्लेख किया कि युगदृष्टा वैदिक ज्ञान-विज्ञान के प्रचारक एवं भावातीत ध्यान के प्रेरक महर्षि महेश योगी जी केवल किसी एक संस्था या विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे विश्व के असंख्य देशों में फैले उनके अनुयायियों, साधकों एवं विचारकों की चेतना में निरंतर विद्यमान रहे हैं, हैं और रहेंगे। उन्होंने शास्त्रवचन “कीर्ति यश सजीवती” का उल्लेख करते हुए कहा कि जिनकी कीर्ति और यश मानवता के कल्याण से जुड़े होते हैं, वे महापुरुष समय और देह की सीमाओं से परे सदैव जीवित रहते हैं।

तत्पश्चात ज्योतिष विभाग के विभागाध्यक्ष वरिष्ठ आचार्य प्रोफेसर मानवेन्द्र पांडेय ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि महर्षि महेश योगी जी ने ध्यान को केवल साधना तक सीमित न रखकर उसे जीवनशैली के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि महर्षि जी ने मानवता को यह सिखाया कि बाह्य उपलब्धियों के साथ-साथ आंतरिक शांति एवं संतुलन भी जीवन के लिए उतने ही आवश्यक हैं। प्रोफेसर पांडेय ने महर्षि जी के उदार चरित्र, करुणा, दूरदृष्टि एवं सार्वभौमिक चिंतन को आत्मसात करने का आह्वान किया।

उन्होंने यह भी कहा कि आज भी विश्वविद्यालय के प्रत्येक शैक्षणिक, शोधात्मक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम महर्षि जी की दैवीय छत्रछाया, उनके विचारों एवं उनके द्वारा स्थापित मूल्यों के आलोक में ही संपन्न होते हैं। महर्षि महेश योगी जी का मार्गदर्शन विश्वविद्यालय की कार्यसंस्कृति, अनुशासन एवं आध्यात्मिक चेतना का आधार है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित समस्त शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने एक स्वर में महर्षि महेश योगी जी के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने, भावातीत ध्यान एवं वैदिक ज्ञान-विज्ञान के प्रचार-प्रसार को जन-जन तक पहुँचाने तथा मानवता के कल्याण हेतु कार्य करने का संकल्प लिया।

इस गरिमामय श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रोफेसर मानवेन्द्र पांडेय, वरिष्ठ ध्यान शिक्षक गिरिजा शंकर चौधरी, डॉ. के. के. त्रिपाठी, विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ, आवासीय छात्र एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सम्पूर्ण कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, शांति, अनुशासन एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के अंत में उमाकांत त्रिपाठी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने माननीय कुलगुरु महोदय, सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन के उपरांत शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया।

महर्षि महेश योगी जी की पुण्यतिथि पर आयोजित यह संपूर्ण कार्यक्रम श्रद्धा, साधना, अनुशासन एवं आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण रहा, जिसने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के मन में शांति, प्रेरणा एवं आत्मिक ऊर्जा का संचार किया।

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