सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण पर सुनवाई:सरकार ने 40 याचिकाएं वापस लीं।

 सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण पर सुनवाई:सरकार ने 40 याचिकाएं वापस लीं।

सुप्रीम कोर्ट का सवाल: जब MP में 27% ओबीसी आरक्षण का कानून, तो लागू क्यों नहीं?

कटनी:

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार (14 फरवरी) को ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कुल 75 याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार ने इनमें से 40 याचिकाएं वापस ले लीं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां शामिल थे, ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि जब राज्य में 27% ओबीसी आरक्षण का कानून पहले से मौजूद है तो इसे लागू करने में देरी क्यों हो रही है।

इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सरकार की ओर से पैरवी कर रहे थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में न तो हाईकोर्ट और न ही सुप्रीम कोर्ट में कोई स्टे है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ओबीसी आरक्षण लागू करने की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

          ओबीसी महासभा ने रखी दलीलें:

ओबीसी महासभा के एडवोकेट धर्मेंद्र कुशवाह ने बताया कि इस सुनवाई में उनके अलावा सीनियर एडवोकेट वरुण ठाकुर और रामकरण ने ओबीसी पक्ष की ओर से दलीलें दीं। उन्होंने कहा कि सरकार को 27% ओबीसी आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करना चाहिए।

          कौन सी याचिकाएं वापस ली गईं?

हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण पर पैरवी करने वाले सीनियर एडवोकेट रामेश्वर सिंह लोधी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में जिन याचिकाओं पर सुनवाई हो रही थी, उनमें से कई पहले हाईकोर्ट में वापस ले ली गई थीं। इसके बावजूद सरकार ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करवा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से उन सभी याचिकाओं की सूची मांगी, जिन्हें हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर किया गया था।

सरकार भी 27 फीसदी आरक्षण देने के मूड में:

गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधि विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से ओबीसी आरक्षण की कानूनी स्थिति की जानकारी ली और सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई के लिए आवेदन करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 27% ओबीसी आरक्षण को लेकर उनकी सरकार पहले से ही प्रतिबद्ध है और सुप्रीम कोर्ट में इस विषय को पूरी ताकत से रखा जाएगा। साथ ही, एससी और एसटी वर्गों को भी कानून के तहत आरक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के 28 जनवरी के ताजा फैसले के बाद कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिसे दूर करने के लिए एडवोकेट जनरल को सभी कानूनी पहलुओं को स्पष्ट करना होगा। सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप कदम उठाएगी और पूरी पारदर्शिता के साथ इस मुद्दे का समाधान निकालेगी।

                          निष्कर्ष:

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई से स्पष्ट हो गया है कि ओबीसी आरक्षण के कार्यान्वयन में अब कोई कानूनी बाधा नहीं है। सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द इसे लागू करने के लिए कदम उठा रही है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेशों के आधार पर आरक्षण नीति को लागू करने की प्रक्रिया और तेज हो सकती है।


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