विद्यार्थियों को श्री अन्न मोटे अनाज के अंतर्गत बाजरा उत्पादन एवं उपयोग का तकनीकी प्रशिक्षण।

 विद्यार्थियों को श्री अन्न मोटे अनाज के अंतर्गत बाजरा उत्पादन एवं उपयोग का तकनीकी प्रशिक्षण।

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय कटनी में जैविक खेती विशेषज्ञ ने दिया प्रशिक्षण।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय कटनी में विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, स्वावलंबी एवं स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से जैविक खेती का तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार बाजपेई के मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. व्ही. के. द्विवेदी के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे ने विद्यार्थियों को विस्तार से जानकारी दी।

प्रशिक्षण के दौरान स्नातक अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को श्री अन्न मोटे अनाज के अंतर्गत ज्वार, बाजरा, मक्का तथा लघु धान्य फसलों में कोदो, कुटकी, रागी, कंगनी आदि के उत्पादन, उपयोग एवं महत्व से अवगत कराया गया। विशेषज्ञ द्वारा बताया गया कि मोटे अनाज की फसल कम पानी एवं कम लागत में सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है। यह फसल कम वर्षा या अधिक वर्षा दोनों परिस्थितियों में अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है।

उन्होंने बताया कि मोटे अनाज की फसल खराब होने की स्थिति में पशुओं के चारे के रूप में उपयोगी होती है, जिससे इन्हें धान की पराली की तरह जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और पर्यावरण प्रदूषण से भी बचाव होता है। मोटे अनाज में कीट एवं रोगों से लड़ने की प्राकृतिक क्षमता अधिक होती है, जिससे रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का उपयोग कम करना पड़ता है।

प्रशिक्षण में मोटे अनाज के पोषण महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञ ने बताया कि बाजरा एवं अन्य मोटे अनाज शुगर, थायराइड, किडनी, लीवर एवं लिपिड संबंधी रोगों में लाभकारी माने जाते हैं तथा स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं।

श्री अन्न बाजरा उत्पादन की उन्नत तकनीकों के अंतर्गत भूमि का चयन, खेत की तैयारी, बोनी का समय एवं विधि, बीज की मात्रा, उन्नत किस्मों के बीज, जैविक कल्चर, जैविक खाद, सिंचाई प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, अंतरवर्तीय फसल, कीट एवं रोग नियंत्रण, कटाई, गहाई एवं विपणन से संबंधित तकनीकी जानकारी भी विद्यार्थियों को दी गई।

प्रशिक्षण में बताया गया कि मोटे अनाज की खेती से किसानों को अच्छा बाजार एवं उचित मूल्य मिल सकता है तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर आर्थिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों के लिए कृषि आधारित स्वरोजगार की दिशा में उपयोगी सिद्ध होगा।

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