संरक्षण प्राप्त पैकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?करण सिंह चौहान ने पुलिस-आबकारी की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल।
महुआ लाहन पर कार्रवाई तक सीमित अभियान पर उठे सवाल,चाय-पान दुकानों,किराना दुकानों और ढाबों में कथित शराब बिक्री को लेकर प्रशासन से मांगा जवाब।
कटनी। सागर जिले के बांदा क्षेत्र में जहरीली शराब से बड़ी संख्या में लोगों की मौत की घटना के बाद प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अवैध शराब के कारोबार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसी क्रम में कटनी जिले में भी अवैध शराब की बिक्री और कथित पैकारियों को लेकर कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष एवं छिंदवाड़ा प्रभारी करण सिंह चौहान ने पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि जिले में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर मुख्य रूप से महुआ लाहन से तैयार होने वाली कच्ची शराब के ठिकानों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि कथित रूप से संचालित संरक्षण प्राप्त पैकारियों और दुकानों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है।
करण सिंह चौहान ने कहा कि कटनी जिले में शराब बिक्री की स्थिति को तीन स्तरों पर देखा जा सकता है। उनके अनुसार पहला स्तर अधिकृत सरकारी शराब दुकानों का है, जहां निर्धारित स्थान पर लाइसेंस के तहत शराब का विक्रय किया जाता है। दूसरा स्तर कथित रूप से संचालित पैकारियों का है, जिनके माध्यम से सरकारी ठेका क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों तक शराब पहुंचने का आरोप है। श्री चौहान के मुताबिक ऐसी शराब चाय-पान दुकानों, किराना दुकानों और ढाबों तक पहुंचाकर बेचे जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
तीसरा स्तर महुआ लाहन से तैयार होने वाली कच्ची शराब का है। श्री चौहान ने आरोप लगाया कि जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में नदी-नालों और गांवों के आसपास महुआ लाहन से कच्ची शराब तैयार कर प्लास्टिक के डिब्बों में रखकर सीधे ग्राहकों को उपलब्ध कराने की शिकायतें हैं। उनका कहना है कि ऐसी शराब स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है और इसके सेवन से गंभीर घटनाएं होने की आशंका बनी रहती है।
पूर्व जिला अध्यक्ष करण सिंह चौहान का आरोप है कि प्रशासन द्वारा अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करते समय तीसरे प्रकार की कच्ची शराब पर तो लगातार कार्रवाई की जाती है, लेकिन कथित रूप से संरक्षण प्राप्त पैकारियों के नेटवर्क पर उतनी गंभीरता से कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुलिस और आबकारी विभाग को ऐसी कथित गतिविधियों की जानकारी है, तो फिर इनके विरुद्ध व्यापक स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
श्री चौहान ने दावा किया कि कटनी जिले में बड़ी संख्या में ऐसी कथित पैकारियां संचालित होने की शिकायतें हैं, जहां सरकारी शराब दुकान अथवा अन्य स्रोतों से देसी शराब प्राप्त कर उसे निर्धारित लाइसेंसी दुकान के बाहर चाय-पान दुकानों, किराना दुकानों और ढाबों के माध्यम से बेचने का आरोप है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि जांच में अवैध शराब बिक्री की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
बड़वारा क्षेत्र को लेकर भी करण सिंह चौहान ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बड़वारा क्षेत्र की कुछ चाय-पान दुकानों और ढाबों में शराब उपलब्ध होने की चर्चा आम है। उन्होंने इस पूरे मामले में कथित पुलिस संरक्षण की चर्चा का भी उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि यदि क्षेत्र में अवैध रूप से शराब बिक्री की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो संबंधित थाना और आबकारी अमला इस पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
श्री चौहान ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि जिले में किस थाना क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री सबसे अधिक होती है, इसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर होने वाली चर्चाओं और शिकायतों से आसानी से मिल सकती है। उन्होंने तंज कसते हुए आरोप लगाया कि जिन थाना क्षेत्रों में अवैध शराब के कारोबार की अधिक चर्चा रहती है, वहां पोस्टिंग को लेकर भी पुलिस अधिकारियों में रुचि होने की बात कही जाती है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
उन्होंने कहा कि अवैध शराब का कारोबार केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा हुआ मामला है। यदि किसी क्षेत्र में बिना लाइसेंस या निर्धारित नियमों के विपरीत शराब की बिक्री हो रही है और उस पर समय रहते रोक नहीं लगाई जाती, तो भविष्य में गंभीर घटनाओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
करण सिंह चौहान ने कहा कि सागर जिले के बांदा में हुई शराब त्रासदी से प्रशासन को सबक लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी बड़ी घटना के बाद कार्रवाई शुरू करने के बजाय प्रशासन को पहले से सक्रिय होकर अवैध शराब के स्रोत, सप्लाई चैन, परिवहन और बिक्री के ठिकानों की पहचान करनी चाहिए। उनका कहना है कि केवल कच्ची शराब बनाने वाले छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई करने से अवैध शराब के पूरे नेटवर्क पर प्रभावी रोक नहीं लगाई जा सकती।
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर कटनी जिले में अवैध शराब के कारोबार की व्यापक जांच और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। श्री चौहान के अनुसार पत्र की प्रतियां पुलिस महानिदेशक भोपाल और पुलिस अधीक्षक कटनी को भी भेजी गई हैं। उन्होंने मांग की है कि जिले के सभी थाना क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री की शिकायतों की समीक्षा कराई जाए तथा सरकारी शराब दुकानों से शराब की निकासी और उसके वितरण की भी जांच की जाए।
पूर्व जिला अध्यक्ष ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि चाय-पान दुकानों, किराना दुकानों, ढाबों एवं अन्य स्थानों पर यदि निर्धारित नियमों के विपरीत शराब बेची जा रही है तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही यदि किसी सरकारी कर्मचारी, पुलिसकर्मी या आबकारी अधिकारी की लापरवाही, मिलीभगत अथवा संरक्षण की पुष्टि होती है तो उसके विरुद्ध भी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि करण सिंह चौहान द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों और मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के बाद जिला प्रशासन, पुलिस एवं आबकारी विभाग क्या कदम उठाता है। क्या जिले में कथित पैकारियों की वास्तविक स्थिति की जांच होगी और क्या चाय-पान दुकानों एवं ढाबों पर शराब बिक्री की शिकायतों को लेकर कोई व्यापक अभियान चलाया जाएगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।


