फर्जी PMO पहचान पत्र और रिवॉल्वर के साथ दो संदिग्ध गिरफ्तार,PM मोदी के कार्यक्रम से पहले मचा हड़कंप।

 फर्जी PMO पहचान पत्र और रिवॉल्वर के साथ दो संदिग्ध गिरफ्तार,PM मोदी के कार्यक्रम से पहले मचा हड़कंप।

सुरक्षा जांच के दौरान खुला मामला,दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद क्राइम ब्रांच कर रही पूछताछ,पुलिस को तीसरे व्यक्ति की तलाश।

मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई दौरे और उनके कार्यक्रम से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम स्थल के आसपास फर्जी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पहचान पत्र के जरिए प्रवेश का प्रयास करने वाले दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनमें से एक व्यक्ति के पास लाइसेंसी रिवॉल्वर और छह जिंदा कारतूस मिलने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में शामिल होने का कार्यक्रम था। इसी कार्यक्रम को लेकर BKC क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम से एक दिन पहले सुरक्षा जांच के दौरान दो संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियां पुलिस के संज्ञान में आईं। पूछताछ और जांच के दौरान एक व्यक्ति द्वारा फर्जी PMO पहचान पत्र का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में 24 वर्षीय रोहन प्रेमल पारिख और 49 वर्षीय दिलीप राजाराम कुंडे शामिल हैं। कुंडे के बारे में बताया गया है कि वह सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी है और बॉडीगार्ड के तौर पर काम करता था। जांच के दौरान उसके पास लाइसेंसी रिवॉल्वर तथा छह जिंदा कारतूस बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

सुरक्षा व्यवस्था के बीच फर्जी पहचान पत्र के साथ किसी व्यक्ति के कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने का प्रयास अपने आप में गंभीर मामला माना जा रहा है। हालांकि पुलिस की शुरुआती जांच में अभी तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि गिरफ्तार किए गए लोगों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नुकसान पहुंचाने की कोई योजना थी या वे प्रधानमंत्री के बेहद नजदीकी सुरक्षा घेरे तक पहुंच गए थे।

जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी PMO पहचान पत्र तैयार कैसे किया गया, उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था और आरोपी कार्यक्रम स्थल के किस हिस्से तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों को किसी अन्य व्यक्ति ने कार्यक्रम स्थल में प्रवेश कराने में मदद तो नहीं की थी।

मामले में एक तीसरे व्यक्ति का नाम भी जांच में सामने आया है। पुलिस के अनुसार प्रथमेश बागुल नामक व्यक्ति की तलाश की जा रही है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि पूरे मामले की कड़ियां अन्य लोगों से भी जुड़ी हो सकती हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट मामले की जांच कर रही है।

इस घटना के बाद प्रधानमंत्री के कार्यक्रम स्थल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने कार्यक्रम में प्रवेश करने वाले लोगों की पहचान और दस्तावेजों की जांच को लेकर विशेष सतर्कता बरती। प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगी विशेष सुरक्षा समूह यानी SPG और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय भी इस तरह के मामलों में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा व्यवस्था देश की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं में शामिल है। प्रधानमंत्री के किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम से पहले कार्यक्रम स्थल, आसपास के क्षेत्र, प्रवेश मार्ग और वहां पहुंचने वाले लोगों की कई स्तरों पर जांच की जाती है। ऐसे में फर्जी PMO पहचान पत्र के साथ प्रवेश का प्रयास और हथियार की बरामदगी सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है।

हालांकि, उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी के आधार पर इसे प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में सीधे सेंध या प्रधानमंत्री पर हमले की कोशिश के रूप में बताना जल्दबाजी होगी। पुलिस फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उनकी वास्तविक मंशा क्या थी।

जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन, दस्तावेजों, पहचान पत्रों और उनके संपर्क में रहे लोगों की भी जानकारी जुटाई जा सकती है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि फर्जी PMO पहचान पत्र कहां तैयार कराया गया और उसमें किस तरह की जानकारी दर्ज थी।

फिलहाल दो आरोपियों की गिरफ्तारी और तीसरे व्यक्ति की तलाश के बीच यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण जांच का विषय बना हुआ है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों का उद्देश्य केवल कार्यक्रम स्थल में अवैध प्रवेश करना था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी।

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से ठीक पहले सामने आए इस मामले ने एक बार फिर VIP और हाई-सिक्योरिटी कार्यक्रमों में पहचान सत्यापन तथा प्रवेश व्यवस्था की गंभीरता को सामने ला दिया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मामले के प्रत्येक पहलू की जांच कर रही हैं और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

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