दियागढ़ के प्राचीन नागिन माता धाम में पेड़ की जड़ से प्रकट हुई माता की प्रतिमा,दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब।
झिन्नापिपरिया के समीप बियाबान जंगल में स्थित है नागिन माता का प्राचीन धाम,22 अगस्त को पहाड़ी पर मोहला के पेड़ की जड़ से प्रतिमा दिखाई देने की सूचना से क्षेत्र में श्रद्धा और भक्ति का माहौल।
ढीमरखेड़ा। तहसील क्षेत्र के झिन्नापिपरिया के समीप दियागढ़ के बियाबान जंगल में स्थित प्राचीन नागिन माता का स्थान एक बार फिर श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां नागिन माता के स्थान के समीप पहाड़ी के ऊपर मोहला के पेड़ की जड़ से माता की प्रतिमा प्रकट होने की सूचना सामने आई है। 22 अगस्त को प्रतिमा दिखाई देने की जानकारी जैसे ही आसपास के ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं को मिली, वैसे ही बड़ी संख्या में लोग माता के दर्शन के लिए मौके पर पहुंचने लगे। प्रतिमा के प्रकट होने की सूचना के बाद पूरे क्षेत्र में धार्मिक आस्था और भक्ति का माहौल दिखाई देने लगा है।
नागिन माता के मुख्य पुजारी गुरुदत्त पांडेय महाराज जी ने बताया कि दियागढ़ में स्थित नागिन माता का स्थान अत्यंत प्राचीन है और यह क्षेत्र लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। घने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र के बीच स्थित इस स्थान पर प्राकृतिक वातावरण के साथ धार्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है और अनेक लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर माता के दरबार में पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं में गहरी आस्था, मन्नत पूरी होने की मान्यता
मुख्य पुजारी गुरुदत्त पांडेय महाराज ने बताया कि नागिन माता के दरबार के प्रति श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। स्थानीय लोगों और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मान्यता है कि माता के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है। इसी विश्वास के चलते क्षेत्र के अलावा दूर-दराज के गांवों से भी लोग नागिन माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करते हैं। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद दोबारा माता के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना और प्रसाद चढ़ाते हैं। यही वजह है कि दियागढ़ स्थित नागिन माता का स्थान स्थानीय धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व रखता है।
तीन प्राकृतिक कुंड भी बने हैं आकर्षण का केंद्र
दियागढ़ स्थित नागिन माता धाम की एक खास विशेषता यहां मौजूद तीन प्राकृतिक कुंड हैं। पुजारी गुरुदत्त पांडेय महाराज के अनुसार इन प्राकृतिक कुंडों में वर्षभर पानी बना रहता है। क्षेत्र में गर्मी के मौसम में भीषण गर्मी पड़ने और सूखे जैसी परिस्थितियां बनने के बावजूद इन कुंडों में पानी रहने की बात श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का विषय है।
पुजारी महाराज ने बताया कि इन कुंडों का पानी मीठा बताया जाता है और श्रद्धालु इसे नागिन माता की कृपा से जोड़कर देखते हैं। जंगल और पहाड़ी के बीच प्राकृतिक रूप से बने इन कुंडों को देखने के लिए भी लोग यहां पहुंचते हैं। धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक वातावरण इस स्थान को और भी विशेष बनाता है।
मकर संक्रांति पर होता है श्रीराम कथा का भव्य आयोजन
नागिन माता के इस प्राचीन स्थान पर प्रतिवर्ष जनवरी माह में मकर संक्रांति के अवसर पर श्रीराम कथा का आयोजन भी किया जाता है। मुख्य पुजारी के अनुसार धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। कथा के दौरान पूरा दियागढ़ क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में दिखाई देता है।
श्रीराम कथा के आयोजन के दौरान आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और कथा श्रवण के चलते यहां कई दिनों तक धार्मिक वातावरण बना रहता है। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक अनुभूति का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।
22 अगस्त को सामने आई प्रतिमा प्रकट होने की जानकारी
मुख्य पुजारी गुरुदत्त पांडेय महाराज ने बताया कि हाल ही में 22 अगस्त को नागिन माता के मुख्य स्थान के समीप पहाड़ी के ऊपर मोहला के पेड़ की जड़ के पास माता की प्रतिमा दिखाई दी। प्रतिमा प्रकट होने की सूचना मिलने के बाद इसकी जानकारी आसपास के लोगों तक पहुंची। देखते ही देखते श्रद्धालुओं में उत्सुकता बढ़ने लगी और लोग माता के दर्शन के लिए मौके पर पहुंचने लगे।
बताया गया कि पेड़ की जड़ के पास माता की प्रतिमा दिखाई देने की खबर श्रद्धालुओं के बीच तेजी से फैल गई। इसके बाद मौके पर पहुंचने वाले लोगों ने श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की और माता के दर्शन किए। कई श्रद्धालुओं ने इसे माता का आशीर्वाद और प्रकट होना मानते हुए अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
मुख्य पुजारी ने पूजा-अर्चना कर किया माता का स्वागत
नागिन माता के मुख्य पुजारी गुरुदत्त पांडेय महाराज ने बताया कि प्रतिमा के प्रकट होने की जानकारी मिलने के बाद उनके द्वारा माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। उन्होंने श्रद्धा के साथ माता का स्वागत किया और पूजा कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं श्रद्धालुओं के कल्याण की कामना की।
प्रतिमा के प्रकट होने के बाद यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। लोग माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं और इस स्थान की धार्मिक मान्यता एवं प्राचीन परंपरा को श्रद्धा के साथ आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं।
बियाबान जंगल के बीच आस्था का प्राचीन केंद्र
दियागढ़ का नागिन माता स्थान अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण भी खास है। घने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र के बीच स्थित यह स्थान लंबे समय से स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ बताया जाता है। प्राकृतिक वातावरण के बीच माता का प्राचीन स्थान श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार नागिन माता के स्थान पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या विशेष पर्व और धार्मिक आयोजनों के दौरान काफी बढ़ जाती है। मकर संक्रांति के समय आयोजित होने वाली श्रीराम कथा में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी इस स्थान की लोकप्रियता को दर्शाती है।
प्रतिमा प्रकट होने की खबर से बढ़ी लोगों की उत्सुकता
मोहला के पेड़ की जड़ से नागिन माता की प्रतिमा दिखाई देने की सूचना के बाद श्रद्धालुओं में इस स्थान को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। बड़ी संख्या में लोग प्रतिमा के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु अपनी-अपनी आस्था के अनुसार पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
दियागढ़ नागिन माता धाम से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं, प्राकृतिक कुंड और घने जंगल का वातावरण पहले से ही लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं। अब प्रतिमा प्रकट होने की सूचना ने इस स्थान को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम
दियागढ़ का नागिन माता स्थान धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण दिखाई देता है। पहाड़ी, जंगल और प्राकृतिक जलकुंड इस स्थान की सुंदरता को बढ़ाते हैं। श्रद्धालु यहां माता के दर्शन के साथ प्रकृति के शांत वातावरण का भी अनुभव करते हैं।
22 अगस्त को मोहला के पेड़ की जड़ से नागिन माता की प्रतिमा प्रकट होने की सूचना के बाद यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ी है। मुख्य पुजारी गुरुदत्त पांडेय महाराज द्वारा पूजा-अर्चना कर माता का स्वागत किए जाने के बाद श्रद्धालुओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों के लिए यह घटना धार्मिक आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय बन गई है।
आने वाले समय में दियागढ़ नागिन माता धाम में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इस प्राचीन धार्मिक स्थल की मान्यता, परंपरा और प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित रखते हुए इसे श्रद्धालुओं के लिए और बेहतर बनाया जाना चाहिए, ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्त भी सुविधापूर्वक माता के दर्शन कर सकें।


