अनुविभागीय अधिकारी एवं तहसीलदार को ग्रामीणों ने सौंपा आवेदन,करहिया की शासकीय भूमि पर निर्माण की जांच की मांग।
खसरा नंबर 424 की 1 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर कथित निर्माण को लेकर उठे सवाल,पट्टे की जांच कर निर्माण कार्य रुकवाने की मांग।
रीठी। ग्राम पंचायत करहिया न. 1 में शासकीय भूमि पर कथित रूप से किए जा रहे निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया है। ग्रामीणों ने इस मामले में तहसीलदार रीठी तथा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कटनी को आवेदन सौंपकर संबंधित भूमि के दस्तावेजों, पट्टे एवं निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि पर निर्माण कार्य किया जा रहा है, वह शासकीय भूमि है और भविष्य में इसका उपयोग ग्राम के विकास एवं शासकीय भवनों के निर्माण के लिए किया जा सकता है।
तहसीलदार रीठी को सौंपे गए आवेदन में ग्रामवासियों ने बताया कि ग्राम पंचायत करहिया न. 1 के हल्का नंबर 16 में स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 424, रकबा 1.00 हेक्टेयर है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि उक्त भूमि के अंशभाग पर राजेन्द्र, पिता राममिलन लोधी, निवासी ग्राम मझगवां, तहसील रीठी द्वारा कथित रूप से पक्के मकान का निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि शासकीय भूमि पर निर्माण कार्य जारी रहा तो भविष्य में ग्राम करहिया में आवश्यक शासकीय भवनों के निर्माण के लिए भूमि की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की मौके पर जांच कराई जाए और यदि शासकीय भूमि पर नियम विरुद्ध निर्माण पाया जाता है तो तत्काल रोक लगाते हुए संबंधित स्थल से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए। आवेदन में यह भी कहा गया है कि शासकीय भूमि को भविष्य में ग्राम के विकास कार्यों एवं सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाना आवश्यक है।
इसी मामले को लेकर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, कटनी को भी ग्रामीणों की ओर से आवेदन प्रस्तुत किया गया है। आवेदन में ग्राम पंचायत करहिया न.1 के हल्का नंबर 16 में राजस्व निरीक्षण मंडल रीठी अंतर्गत स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 424, रकबा 1.00 हेक्टेयर का उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों ने इस भूमि से संबंधित कथित पट्टे की जांच कराने तथा यदि वह नियमों के विपरीत पाया जाता है तो उसे निरस्त करने की मांग की है।
आवेदन में नरेश कुमार लोधी, पिता राममिलन लोधी, निवासी ग्राम मझगवां द्वारा सड़क किनारे मकान निर्माण किए जाने का उल्लेख है। आवेदनकर्ताओं ने संबंधित व्यक्ति के भूमि संबंधी दस्तावेजों एवं भू-अधिकार की स्थिति की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित भूमि के संबंध में आवासीय भू-अधिकार योजना के तहत भू-अधिकार पत्र जारी किए गए हैं, इसलिए इन दस्तावेजों की भी राजस्व अभिलेखों एवं नियमानुसार जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष यह मांग रखी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष राजस्व जांच के लिए टीम गठित की जाए। टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर भूमि की वास्तविक स्थिति, सीमांकन, राजस्व अभिलेख, खसरा एवं संबंधित भू-अधिकार दस्तावेजों का परीक्षण किया जाए। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि संबंधित भूमि का आवंटन किस आधार पर किया गया और उस पर निर्माण की अनुमति एवं वैधानिक स्थिति क्या है।
आवेदनकर्ताओं ने कहा है कि शासकीय भूमि का संरक्षण प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि जांच में भूमि शासकीय पाई जाती है और निर्माण अथवा पट्टा नियमों के विपरीत पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में सरकारी भूमि पर किसी प्रकार का अतिक्रमण न हो सके।
ग्रामीणों ने अपने आवेदन के साथ भू-अधिकार पत्र तथा आवासीय भू-अधिकार योजना की नियम सूची सहित अन्य दस्तावेज संलग्न किए हैं। आवेदन दिनांक 24 सितंबर 2026 का है। इसकी प्रतिलिपि जिला कलेक्टर कटनी तथा लोकसभा क्षेत्र खजुराहो के सांसद को भी भेजे जाने का उल्लेख आवेदन में किया गया है।
अब इस मामले में ग्रामीणों की नजर राजस्व विभाग की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि प्रशासन द्वारा मौके पर जांच एवं सीमांकन कराया जाता है तो खसरा नंबर 424 की भूमि के वास्तविक स्वामित्व, भू-अधिकार, पट्टे तथा निर्माण की वैधानिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र जांच कर शासकीय भूमि को सुरक्षित रखने तथा नियम विरुद्ध पाए जाने वाले निर्माण पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।


