स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में पटवारी संघ की कठिनाइयों का समाधान।

 स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में पटवारी संघ की कठिनाइयों का समाधान।

शासन ने व्यावहारिक एवं विधिक बिंदुओं पर स्थिति की स्पष्ट,अब योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में पटवारियों से सक्रिय भागीदारी की अपेक्षा।

कटनी। प्रदेश में ग्रामीण परिवारों को उनकी आबादी भूमि पर संपत्ति अधिकार संबंधी अभिलेख उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित स्वामित्व योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर पटवारी संघ द्वारा उठाई गई व्यावहारिक, विधिक एवं प्रक्रियात्मक कठिनाइयों का शासन स्तर पर निराकरण किया गया है। योजना के क्रियान्वयन से संबंधित विभिन्न विषयों पर पटवारी संघ के प्रतिनिधियों और शासन के बीच विस्तृत चर्चा हुई, जिसके बाद कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट की गई है।

पटवारी संघ की ओर से योजना के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली कठिनाइयों तथा संभावित व्यक्तिगत दायित्व को लेकर अपनी चिंताएं शासन के समक्ष रखी गई थीं। इन विषयों पर विचार-विमर्श के लिए गठित पांच सदस्यीय मंत्री समूह की बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मौजूदगी में पटवारी संघ के प्रतिनिधियों की बात सुनी गई तथा व्यावहारिक और विधिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

पांच सदस्यीय मंत्री समूह में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप, परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह तथा सहकारिता एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग शामिल रहे।

बैठक में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 के अंतर्गत पटवारियों की भूमिका, अभिलेखों की स्थिति, विलेख के निष्पादन एवं पंजीयन की प्रक्रिया तथा विवादित अथवा त्रुटिपूर्ण अभिलेखों से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई।

अधिकार अभिलेख के आधार पर ही होगा विलेख का निष्पादन

शासन द्वारा स्पष्ट किया गया कि योजना के अंतर्गत विलेख का निष्पादन एवं पंजीयन पूर्व में सक्षम राजस्व प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किए गए अधिकार अभिलेखों में दर्ज अधिकारों के आधार पर ही किया जाएगा। विलेख के माध्यम से अधिकार अभिलेख में दर्ज अधिकारों से अलग कोई नया अधिकार निर्धारित नहीं किया जाएगा। इससे योजना के अंतर्गत दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है।

पटवारी अपने निर्धारित शासकीय दायित्व के अंतर्गत अधिकृत निष्पादक अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। सक्षम प्रक्रिया के माध्यम से पूर्व में तैयार किए गए अभिलेखों के आधार पर विधिसम्मत दायित्व का निर्वहन करने वाले पटवारियों पर अनावश्यक व्यक्तिगत दायित्व निर्धारित नहीं किए जाने की बात भी स्पष्ट की गई है।

विवादित एवं त्रुटिपूर्ण अभिलेखों पर नहीं होगा विलेख का निष्पादन

योजना के क्रियान्वयन के दौरान यदि कोई अधिकार अभिलेख त्रुटिपूर्ण, अपूर्ण अथवा विवादित पाया जाता है, तो ऐसे अभिलेख के आधार पर विलेख का निष्पादन नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों का निराकरण संबंधित सक्षम राजस्व प्राधिकारी द्वारा किया जाएगा। इससे पटवारियों के सामने आने वाली उन परिस्थितियों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हुई है, जिनमें अभिलेखों की स्थिति स्वयं स्पष्ट नहीं होती।

शासन की ओर से दी गई इन स्पष्टताओं के बाद पटवारी संघ की योजना से जुड़ी प्रमुख व्यावहारिक, विधिक एवं प्रक्रियात्मक चिंताओं का समाधान होने की बात सामने आई है। बैठक में चर्चा के दौरान विभिन्न बिंदुओं पर आवश्यक मार्गदर्शन और प्रक्रिया संबंधी स्पष्टता भी प्रदान की गई।

योजना के क्रियान्वयन में सहयोग पर बनी सहमति

बैठक में आवश्यक विधिक एवं प्रक्रियात्मक स्पष्टता दिए जाने के बाद पटवारी संघ के प्रतिनिधियों ने भी स्वामित्व योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने पर सहमति व्यक्त की। अब योजना को मैदानी स्तर पर गति देने के लिए राजस्व अमले की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ग्रामीण परिवारों को संपत्ति अधिकार संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में स्वामित्व योजना को महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। योजना के माध्यम से आबादी भूमि से संबंधित संपत्ति अधिकारों के अभिलेख उपलब्ध कराने का उद्देश्य है, जिससे ग्रामीण परिवारों को अपनी संपत्ति से जुड़े दस्तावेज प्राप्त हो सकें और भविष्य में संपत्ति संबंधी विभिन्न कार्यों में इन अभिलेखों का उपयोग किया जा सके।

मैदानी स्तर पर पटवारियों की भूमिका महत्वपूर्ण

स्वामित्व योजना के सफल क्रियान्वयन में पटवारियों की मैदानी जानकारी और राजस्व अभिलेखों के संबंध में उनकी समझ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पटवारी राजस्व संबंधी कार्यों के लिए आम नागरिकों और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। ऐसे में योजना के क्रियान्वयन में उनकी सक्रिय भागीदारी से प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

मंत्री समूह की ओर से भी स्पष्ट किया गया कि आवश्यक स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद अब सभी संबंधित पक्षों को आपसी समन्वय और टीम भावना के साथ योजना के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाना है। शासन की अपेक्षा है कि पटवारी निर्धारित शासकीय दायित्वों का निर्वहन करते हुए योजना में सक्रिय भूमिका निभाएंगे और पात्र ग्रामीण परिवारों को उनके संपत्ति अधिकार संबंधी दस्तावेज समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों के संपत्ति संबंधी अधिकारों को अभिलेखीय रूप से व्यवस्थित करना और उन्हें आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना है। शासन और पटवारी संघ के बीच हुई चर्चा के बाद अब योजना के मैदानी क्रियान्वयन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों एवं मैदानी अमले पर रहेगी।

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