नामांकन पत्र छीनकर कार से फरार होने का आरोप,छतरपुर की सीलोन पंचायत में मचा हड़कंप।
सरपंच उपचुनाव के नामांकन के दौरान सामने आया मामला,महिला प्रत्याशी के दस्तावेज कथित तौर पर छीने गए,वायरल वीडियो ने बढ़ाई चर्चा,प्रशासन ने दोबारा कराया नामांकन।
छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की राजनगर जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत सीलोन में सरपंच पद के उपचुनाव के नामांकन के दौरान कथित रूप से नामांकन पत्र छीनकर फरार होने का मामला सामने आया है। घटना के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग वाहन में बैठकर मौके से जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। हालांकि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान और घटना से उनकी भूमिका की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सरपंच पद के लिए महिला प्रत्याशी नामांकन दाखिल करने के लिए राजनगर जनपद पंचायत कार्यालय पहुंची थीं। बताया जा रहा है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान उनका नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसी दौरान कुछ लोग वहां पहुंचे और कथित तौर पर नामांकन पत्र अपने कब्जे में लेकर कार्यालय से बाहर निकल गए। इसके बाद वे एक कार में बैठकर मौके से रवाना हो गए।
घटना के दौरान मौके पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने वाहन को रोकने का प्रयास किया। प्रकाशित रिपोर्टों में यह भी आरोप सामने आया है कि वाहन को रोकने की कोशिश के दौरान जनपद पंचायत के एक लिपिक को वाहन से कुचलने का प्रयास किया गया। इस आरोप की पुष्टि पुलिस जांच और दर्ज प्रकरण के आधिकारिक विवरण से होना बाकी है।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। वीडियो में कथित रूप से कुछ लोगों को वाहन के साथ मौके से जाते हुए देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद लोगों द्वारा घटना को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में वीडियो की वास्तविकता, उसमें दिखाई देने वाले व्यक्तियों की पहचान और घटना के पूरे क्रम की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।
बताया गया है कि नामांकन पत्र छीन लिए जाने के बाद प्रशासन की ओर से महिला प्रत्याशी का नामांकन दोबारा भरवाया गया। राजनगर के रिटर्निंग ऑफिसर एवं तहसीलदार धीरज गौतम के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में मामले में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस द्वारा वायरल वीडियो सहित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटना में शामिल लोगों और वाहन की पहचान किए जाने की बात सामने आई है।
घटना के पीछे कुछ लोगों द्वारा पंचायत में निर्विरोध चुनाव कराने का प्रयास किए जाने का आरोप भी लगाया जा रहा है। महिला प्रत्याशी की ओर से इस संबंध में आरोप लगाए गए हैं। हालांकि यह आरोप फिलहाल संबंधित पक्ष का कथन है और इसे जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जा सकता। पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नामांकन पत्र छीने जाने की घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था।
ग्राम पंचायत सीलोन में सरपंच पद के लिए उपचुनाव की स्थिति पहले से बनी हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार पंचायत की तत्कालीन सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद सरपंच पद रिक्त हुआ था और कार्यवाहक व्यवस्था के तहत पंचायत का संचालन किया जा रहा था। इसी रिक्त पद के लिए उपचुनाव की प्रक्रिया के तहत नामांकन दाखिल किए जा रहे थे।
नामांकन प्रक्रिया के दौरान इस प्रकार की घटना सामने आने से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नामांकन दाखिल करने का अधिकार है। ऐसे में यदि किसी प्रत्याशी के नामांकन पत्र को जबरन छीने जाने की बात जांच में सही पाई जाती है, तो यह चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मामला माना जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा महिला प्रत्याशी का नामांकन दोबारा कराया जाना इस मामले में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वहीं, पुलिस जांच में यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य पुलिस जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से सामने आने वाले विवरण होंगे। वायरल वीडियो को आधार बनाकर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। प्रशासन और पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नामांकन पत्र किसने छीना, घटना में कितने लोग शामिल थे, वाहन किसका था और घटना के दौरान वास्तव में क्या परिस्थितियां बनी थीं।
राजनगर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत सीलोन में सामने आए इस घटनाक्रम ने पंचायत उपचुनाव की नामांकन प्रक्रिया को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज कर दी है। अब लोगों की नजर पुलिस जांच, एफआईआर तथा निर्वाचन अधिकारियों की आगामी कार्रवाई पर बनी हुई है।


