देश में E20 पेट्रोल पर बढ़ा सियासी घमासान,सरकार ने E0 और E10 की मांग ठुकराई।
केंद्र ने E20 को ही राष्ट्रीय मानक पेट्रोल बनाए रखने का लिया फैसला,विपक्ष ने पुराने वाहनों की सुरक्षा और उपभोक्ताओं के विकल्प का उठाया मुद्दा।
देश में E20 पेट्रोल को लेकर सियासी और तकनीकी बहस तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश में E20 पेट्रोल ही मानक ईंधन के रूप में लागू रहेगा और पेट्रोल पंपों पर बिना इथेनॉल वाला शुद्ध पेट्रोल (E0) अथवा E10 पेट्रोल को अलग विकल्प के रूप में उपलब्ध कराने की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दल इस निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है।
10 जुलाई को केंद्र सरकार ने अपने आधिकारिक रुख में कहा कि पूरे देश में अलग-अलग प्रकार के पेट्रोल की समानांतर आपूर्ति करना व्यावहारिक नहीं है। सरकार के अनुसार E20 पेट्रोल को राष्ट्रीय स्तर पर मानक ईंधन बनाए रखने से ईंधन वितरण व्यवस्था सरल होगी, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी तथा देश में इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का कहना है कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और गन्ना उत्पादक किसानों सहित जैव ईंधन उद्योग को भी लाभ मिलेगा।
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल तथा 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे तथा अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। केंद्र सरकार का दावा है कि इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर होने वाला खर्च घटेगा और देश ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा।
सरकार की घोषणा के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दिल्ली की सड़कों पर लोगों से E20 पेट्रोल के संबंध में राय ली और कहा कि वाहन मालिकों को अपनी आवश्यकता के अनुसार E20, E10 अथवा शुद्ध पेट्रोल (E0) चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। उनका कहना है कि विशेष रूप से पुराने वाहनों के मालिकों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने विभिन्न वाहन निर्माता कंपनियों से भी यह स्पष्ट करने की मांग की है कि पुराने वाहनों पर E20 के उपयोग का क्या प्रभाव पड़ेगा।
इस पूरे विवाद के बीच वाहन मालिकों के मन में भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2023 के बाद बाजार में आए अधिकांश नए वाहन E20 ईंधन के अनुरूप तैयार किए गए हैं। वहीं कुछ पुराने वाहनों में लंबे समय तक E20 के उपयोग से ईंधन प्रणाली के कुछ हिस्सों पर प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की गई है। हालांकि यह प्रभाव सभी वाहनों पर समान रूप से लागू नहीं होता और यह वाहन के मॉडल, निर्माण वर्ष तथा तकनीकी संरचना पर निर्भर करता है।
ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जिन वाहनों को E20 के अनुरूप डिजाइन किया गया है, उनमें किसी प्रकार की विशेष समस्या की संभावना नहीं है। वहीं पुराने वाहनों के संबंध में वाहन निर्माता कंपनियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक है। यदि किसी वाहन के निर्माता ने E20 के उपयोग की अनुमति नहीं दी है तो वाहन मालिकों को अधिकृत सर्विस सेंटर से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
सरकार का तर्क है कि इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से पर्यावरण को लाभ होगा क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इसके साथ ही गन्ना किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध होगा और देश में जैव ईंधन उद्योग का विस्तार होगा। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि जब तक सभी पुराने वाहनों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह स्पष्ट और वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध नहीं हो जाती, तब तक उपभोक्ताओं को वैकल्पिक ईंधन चुनने की सुविधा मिलनी चाहिए।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे बड़े देश में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए आम नागरिकों की शंकाओं का समाधान करना भी उतना ही आवश्यक है। पारदर्शी जानकारी, वाहन निर्माताओं की स्पष्ट सलाह तथा उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने से इस विवाद को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
फिलहाल केंद्र सरकार अपने निर्णय पर कायम है और देश में E20 पेट्रोल को ही मानक ईंधन बनाए रखने की नीति जारी रहेगी। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक E20 पेट्रोल का मुद्दा राजनीतिक और जनचर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।


