वन विकास निगम रामपुर में जिम्मेदारी पर सवाल,रेंजर की कथित अनुपस्थिति से व्यवस्था बेपटरी,जंगलों की सुरक्षा भगवान भरोसे?

 वन विकास निगम रामपुर में जिम्मेदारी पर सवाल,रेंजर की कथित अनुपस्थिति से व्यवस्था बेपटरी,जंगलों की सुरक्षा भगवान भरोसे?

स्थानीय लोगों का आरोप-रेंजर मनीष रौर महीने में केवल एक-दो दिन ही कार्यालय पहुंचते हैं,डिप्टी रेंजर और बीट गार्ड के भरोसे चल रही पूरी रेंज,जिला प्रशासन और वन विकास निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच एवं कठोर कार्रवाई की मांग।

कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत वन विकास निगम रामपुर रेंज इन दिनों गंभीर चर्चाओं और सवालों के केंद्र में है। स्थानीय ग्रामीणों एवं क्षेत्र के लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि जिस अधिकारी के कंधों पर हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र की सुरक्षा, संरक्षण और निगरानी की जिम्मेदारी है, वह कथित रूप से अधिकांश समय मुख्यालय से अनुपस्थित रहता है और महीने में केवल एक या दो दिन ही कार्यालय में दिखाई देता है। यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल एक अधिकारी की कार्यशैली का मामला नहीं, बल्कि पूरे विभाग की जवाबदेही और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विकास निगम रामपुर में पदस्थ रेंजर मनीष रौर न तो नियमित रूप से मुख्यालय पर निवास करते हैं और न ही कार्यालय में नियमित उपस्थिति दर्ज कराते हैं। उनका कहना है कि कई बार आवश्यक कार्यों के दौरान भी रेंजर उपलब्ध नहीं रहते, जिसके कारण पूरे रेंज का संचालन डिप्टी रेंजर और बीट गार्ड के भरोसे होता है। इससे प्रशासनिक निर्णयों में विलंब होने के साथ-साथ वन सुरक्षा संबंधी कार्य भी प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।

ग्रामीणों का कहना है कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं बल्कि करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति, जैव विविधता और पर्यावरण का आधार हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र की निगरानी यदि प्रभावी ढंग से न हो तो अवैध कटाई, वन भूमि पर अतिक्रमण, अवैध उत्खनन, वन्यजीवों के शिकार तथा अन्य अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में यदि कोई गंभीर घटना घटित होती है तो उसका सीधा असर शासन की छवि और वन संरक्षण व्यवस्था पर पड़ता है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि रेंज कार्यालय की अधिकांश जिम्मेदारियां अधीनस्थ कर्मचारियों पर छोड़ दी गई हैं। डिप्टी रेंजर और बीट गार्ड अपने स्तर पर व्यवस्थाएं संभालने का प्रयास करते हैं, लेकिन जिन निर्णयों के लिए रेंजर स्तर की उपस्थिति आवश्यक होती है, वहां कठिनाइयां सामने आती हैं। लोगों का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारी की नियमित अनुपस्थिति से अधीनस्थ कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और विभागीय कार्यों की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि शासन अधिकारियों को जनता की सेवा और अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए वेतन, वाहन, संसाधन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराता है। ऐसे में यदि कोई अधिकारी अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं करता है तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सार्वजनिक धन और जनता के विश्वास दोनों के साथ न्याय न होने जैसा है। उनका कहना है कि यदि कोई कर्मचारी नियमित रूप से अनुपस्थित रहता है तो उसके विरुद्ध विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई होती है, इसलिए अधिकारियों पर भी समान नियम लागू होने चाहिए।

ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई है कि वन विकास निगम रामपुर रेंज में पिछले कई महीनों की उपस्थिति पंजिका, मुख्यालय निवास संबंधी रिकॉर्ड, भ्रमण डायरी, निरीक्षण रजिस्टर, कार्यालयीन आदेश, क्षेत्रीय निरीक्षण विवरण तथा सरकारी दायित्वों के निर्वहन से संबंधित सभी अभिलेखों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए ताकि शासन की जवाबदेही बनी रहे और अन्य अधिकारियों के लिए भी स्पष्ट संदेश जाए कि सरकारी सेवा में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वन संपदा राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है और उसकी सुरक्षा में किसी भी प्रकार की शिथिलता भविष्य के लिए गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकती है। ऐसे में यह आवश्यक है कि वन विकास निगम के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले का संज्ञान लें और वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराएं। यदि आरोप निराधार हैं तो उन्हें तथ्यों के साथ सार्वजनिक किया जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

अब निगाहें जिला प्रशासन, वन विकास निगम के वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित विभाग पर टिकी हैं। क्षेत्रवासी अपेक्षा कर रहे हैं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जाएगी, ताकि वन विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता का विश्वास कायम रह सके।

नोट: इस समाचार में वर्णित आरोप स्थानीय नागरिकों द्वारा लगाए गए आरोपों और प्राप्त शिकायतों पर आधारित हैं। संबंधित अधिकारी का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा। किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही उचित होगा।

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