उमरियापान में आत्महत्या प्रकरण का खुलासा,आत्महत्या के लिए कथित रूप से विवश करने के आरोप में छह आरोपी गिरफ्तार।
भूमि विवाद और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों की जांच के बाद पुलिस ने दर्ज किया प्रकरण,न्यायालय में पेशी के उपरांत सभी आरोपियों को भेजा गया जिला जेल कटनी।
उमरियापान,ग्रामीण खबर MP।
कटनी जिले के उमरियापान थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बारगांव में हुए आत्महत्या के एक संवेदनशील मामले में पुलिस ने विस्तृत जांच के बाद महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए आत्महत्या के लिए कथित रूप से विवश करने के आरोप में एक ही परिवार के छह लोगों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है। न्यायालय द्वारा जेल वारंट जारी किए जाने के बाद सभी आरोपियों को जिला जेल कटनी भेज दिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई को क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मामले की जांच केवल घटनास्थल तक सीमित न रहकर मृतक द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट, परिजनों के बयान तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 8 जुलाई 2026 की रात लगभग 8:30 बजे डायल-112 के माध्यम से उमरियापान थाना पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम बारगांव में एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी उपनिरीक्षक महेन्द्र जायसवाल के नेतृत्व में पुलिस टीम तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई। मौके पर पहुंचने पर पुलिस ने देखा कि ग्राम बारगांव निवासी 50 वर्षीय सोहबत लाल चक्रवर्ती, पिता मगनलाल चक्रवर्ती का शव उनके खेत की मेड़ पर स्थित एक नीम के पेड़ से फांसी के फंदे पर लटका हुआ था। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित करते हुए आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया प्रारंभ की तथा पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
घटनास्थल की बारीकी से तलाशी लेने के दौरान पुलिस को मृतक द्वारा लिखे गए दो सुसाइड नोट प्राप्त हुए। इन दस्तावेजों को पुलिस ने महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में जब्त किया और उन्हें जांच का आधार बनाया। इसके साथ ही थाना उमरियापान में मर्ग क्रमांक 17/26 धारा 194 बीएनएसएस के तहत मर्ग कायम कर पूरे मामले की गंभीरता से जांच प्रारंभ की गई।
विवेचना के दौरान पुलिस ने मृतक के परिजनों, ग्रामीणों तथा अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। जांच में सामने आया कि मृतक का अपने चाचा पक्ष के साथ लंबे समय से भूमि संबंधी विवाद चल रहा था। आरोप है कि विवादित भूमि पर कब्जे को लेकर लगातार तनाव की स्थिति बनी हुई थी। परिजनों के कथनों एवं सुसाइड नोट में किए गए उल्लेख के आधार पर पुलिस को यह जानकारी प्राप्त हुई कि मृतक स्वयं को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रहा था और इसी कारण वह अत्यधिक तनाव में रहने लगा था।
पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आए कि मृतक ने अपने चाचा जगदीश चक्रवर्ती, जगन्नाथ चक्रवर्ती, बैजनाथ चक्रवर्ती, रामनाथ चक्रवर्ती तथा चाची गीता बाई चक्रवर्ती एवं सरला बाई चक्रवर्ती पर जमीन संबंधी विवाद के कारण मानसिक प्रताड़ना देने के आरोप लगाए थे। पुलिस के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों, सुसाइड नोट तथा परिजनों के बयानों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि कथित मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर मृतक ने 8 जुलाई को आत्मघाती कदम उठाया।
प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद उमरियापान थाना पुलिस ने आरोपी जगदीश चक्रवर्ती, जगन्नाथ चक्रवर्ती, बैजनाथ चक्रवर्ती, रामनाथ चक्रवर्ती, गीता बाई चक्रवर्ती तथा सरला बाई चक्रवर्ती के विरुद्ध अपराध क्रमांक 206/26 पंजीबद्ध करते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 एवं 3(5) के अंतर्गत मामला दर्ज किया। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर आवश्यक पूछताछ की तथा विधिक प्रक्रिया पूर्ण करते हुए माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। न्यायालय द्वारा जेल वारंट जारी किए जाने के बाद सभी आरोपियों को जिला जेल कटनी भेज दिया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आत्महत्या जैसे मामलों में प्रत्येक पहलू की गंभीरता से जांच की जाती है। घटनास्थल से प्राप्त भौतिक साक्ष्य, दस्तावेज, मृतक द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट, परिजनों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान तथा परिस्थितिजन्य तथ्यों का परीक्षण करने के बाद ही प्रकरण दर्ज किया गया। मामले की विवेचना अभी भी जारी है और यदि जांच के दौरान अन्य तथ्य अथवा साक्ष्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।
इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी उपनिरीक्षक महेन्द्र जायसवाल का नेतृत्व महत्वपूर्ण रहा। उनके साथ उपनिरीक्षक भरत सिंह मार्को, प्रधान आरक्षक आशीष झारिया, प्रधान आरक्षक अजय तिवारी, आरक्षक सतेन्द्र चौरसिया, आरक्षक नीलेश पटेल, आरक्षक मोहन मुबेल, आरक्षक रोहित झारिया, महिला आरक्षक दुर्गा शुक्ला सहित थाना उमरियापान के समस्त पुलिस स्टाफ ने सक्रिय भूमिका निभाई। पुलिस विभाग ने पूरी कार्रवाई को विधिसम्मत एवं साक्ष्य आधारित बताते हुए कहा है कि मामले में निष्पक्ष जांच जारी रहेगी और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि यह प्रकरण ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों के गंभीर सामाजिक प्रभाव की ओर भी संकेत करता है। ऐसे विवाद कई बार पारिवारिक रिश्तों में तनाव उत्पन्न कर देते हैं और परिस्थितियां अत्यंत दुखद रूप ले सकती हैं। हालांकि इस मामले में आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर किया जाएगा। फिलहाल पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के बाद पूरा मामला न्यायिक विचाराधीन है।

