नमाज भी,हनुमान मंदिर में पूजा भी,भाजपा की मुस्लिम महिला नेता बिलकिस जहां की अनोखी राजनीतिक और आध्यात्मिक यात्रा चर्चा में।
करीब 45 वर्षों से भाजपा से जुड़ीं बिलकिस जहां ने राम मंदिर आंदोलन में भागीदारी,संगठन के प्रति समर्पण और सामाजिक सौहार्द को बताया अपनी पहचान।
भोपाल,ग्रामीण खबर MP।
भारत की राजनीति में ऐसे व्यक्तित्व कम ही देखने को मिलते हैं, जिनकी पहचान राजनीतिक सक्रियता के साथ-साथ धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता के अनूठे उदाहरण के रूप में भी स्थापित हो। मध्यप्रदेश भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की मुस्लिम महिला सदस्य बिलकिस जहां इन दिनों अपने जीवन, राजनीतिक संघर्ष और धार्मिक आस्था को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर खुलकर बात की।
बिलकिस जहां ने बताया कि वे प्रतिदिन सुबह लगभग तीन बजे नमाज अदा करती हैं और इसके बाद सुबह लगभग साढ़े सात बजे भोपाल स्थित हनुमान मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना तथा हनुमान चालीसा का पाठ करती हैं। उनका कहना है कि ईश्वर की आराधना का उद्देश्य समाज में प्रेम, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार करना है। वे लंबे समय से मंगलवार का व्रत भी रखती हैं।
उन्होंने बताया कि उनका भाजपा से जुड़ाव लगभग वर्ष 1980 के आसपास शुरू हुआ था। पिछले चार दशकों से अधिक समय में उन्होंने संगठन के साथ लगातार कार्य किया और अनेक राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे। उनका कहना है कि संगठन ने उन्हें हमेशा कार्यकर्ता के रूप में सम्मान दिया और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
राम मंदिर आंदोलन को याद करते हुए बिलकिस जहां ने कहा कि वे वर्ष 1990 के कारसेवा आंदोलन में शामिल होने के उद्देश्य से अयोध्या के लिए निकली थीं। उनके अनुसार, उस समय उन्हें प्रयागराज में प्रशासन द्वारा रोक लिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण राजनीतिक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और वे स्वयं भी श्रीराम के प्रति श्रद्धा रखती हैं।
साक्षात्कार के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक जीवन में उन्हें अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, आंदोलन और राजनीतिक गतिविधियों के दौरान उन पर कुल 18 राजनीतिक मुकदमे दर्ज हुए। उन्होंने इन मुकदमों को अपने सार्वजनिक जीवन का हिस्सा बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी संघर्ष से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। हालांकि इस संबंध में उपलब्ध जानकारी मुख्यतः उनके स्वयं के बयान पर आधारित है।
बिलकिस जहां का कहना है कि उनके लिए पार्टी का संगठन किसी भी व्यक्ति से बड़ा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाजपा में कार्यकर्ता सर्वोपरि होता है और संगठन की विचारधारा तथा अनुशासन ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने पूरे राजनीतिक जीवन में संगठन के निर्देशों के अनुसार कार्य करती रही हैं।
उन्होंने समाज में आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देते हुए कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है, जहां सभी धर्मों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उनका मानना है कि धार्मिक आस्था व्यक्तिगत विषय है, जबकि राष्ट्रहित और समाज सेवा सभी की साझा जिम्मेदारी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिलकिस जहां का व्यक्तित्व भारतीय लोकतंत्र की उस विविधता को दर्शाता है, जहां अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि के लोग विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के साथ सक्रिय भूमिका निभाते हैं। भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में उनकी मौजूदगी को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
हाल ही में मध्यप्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति में उन्हें मुस्लिम महिला सदस्य के रूप में स्थान मिला है। इसके बाद से उनकी राजनीतिक यात्रा, धार्मिक आस्था और संगठन के प्रति समर्पण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। उनके विचारों और जीवनशैली को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, लेकिन यह निर्विवाद है कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में स्वयं को एक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में स्थापित किया है।
बिलकिस जहां की यह यात्रा भारतीय लोकतंत्र, राजनीतिक प्रतिबद्धता, व्यक्तिगत आस्था और सामाजिक समरसता के एक ऐसे स्वरूप को सामने लाती है, जिस पर वर्तमान समय में व्यापक चर्चा हो रही है। उनके अनुभव यह भी दर्शाते हैं कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों की विविधता और व्यक्तिगत आस्था के साथ सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाना संभव है।

