कानपुर कचहरी के बाहर पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच सड़क पर मारपीट,वीडियो वायरल होने के बाद सिपाही निलंबित।

 कानपुर कचहरी के बाहर पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच सड़क पर मारपीट,वीडियो वायरल होने के बाद सिपाही निलंबित।

सिविल लाइंस क्षेत्र में हुई घटना ने पुलिस और अधिवक्ता समुदाय के बीच खड़े किए कई सवाल,मामले की जांच जारी।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में स्थित सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के कचहरी परिसर के समीप 10 जुलाई की दोपहर उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच बीच सड़क पर कहासुनी के बाद मारपीट हो गई। घटना के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने पूरी घटना अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर ली, जिसका वीडियो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, किसी बात को लेकर पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गया। सड़क पर हुई इस घटना के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट होती रही, जबकि मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव का प्रयास भी किया। घटना के कारण कुछ समय के लिए वहां यातायात भी प्रभावित हुआ और लोगों की भीड़ एकत्र हो गई।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद कानपुर पुलिस प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया। प्रथम दृष्टया अनुशासनहीनता और अशोभनीय आचरण पाए जाने पर यूपी-112 में तैनात एक सिपाही को संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) विपिन टाडा के निर्देश पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। विभागीय स्तर पर पूरे प्रकरण की जांच के आदेश भी दिए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना से संबंधित सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है। वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई भी की जाएगी।

सोशल मीडिया पर घटना को लेकर कई प्रकार के दावे किए जा रहे हैं, जिनमें पुलिसकर्मी के नशे में होने जैसी बातें भी शामिल हैं। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

सूत्रों के अनुसार, घटना के समय मौजूद दूसरा सिपाही पहले से ही लाइन हाजिर चल रहा था। हालांकि, इस संबंध में भी विस्तृत आधिकारिक जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट होने की संभावना है।

घटना के वायरल वीडियो ने कानून व्यवस्था और सार्वजनिक स्थानों पर सरकारी कर्मचारियों के आचरण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिवक्ता और पुलिस दोनों ही कानून व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। ऐसे में सार्वजनिक स्थान पर इस प्रकार की घटना न केवल दोनों संस्थाओं की छवि को प्रभावित करती है, बल्कि आम जनता के बीच भी गलत संदेश पहुंचाती है।

फिलहाल पुलिस विभाग ने मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी है और अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी। दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पूरे घटनाक्रम पर अधिवक्ता संगठनों और आम लोगों की भी नजर बनी हुई है तथा सभी जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

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